धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है केरल में जिंदगी, राहत शिविरों में अब भी दो लाख लोग
केरल के मुख्मंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि अब जब युद्ध स्तर पर केरल को पटरी पर लाने का काम चल रहा है ऐसे में अब हमें यह चर्चा करने और तय करने की जरूरत है कि जो जगह भूस्खलन और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं वहां पुनर्वास किया जाना चाहिए या नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि केरल में आई विपदा को देखते हुए दुनियाभर से मदद के हाथ उठ रहे हैं और 28 अगस्त तक मुख्यमंत्री राहत कोष में अभी तक 738 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
केरल के 60 फीसदी बच्चे स्कूलों में लौटे, सबसे ज्यादा प्रभावित इडुक्की में सभी स्कूल खुले, शिक्षकों ने गानों और तालियों से स्वागत किया
100 साल बाद की सबसे भीषण बाढ़ झेल चुके केरल में अब धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लौट रही है। जो स्कूल राहत कैंप बने थे, वहां भी साफ-सफाई होने लगी है। बुधवार को आधे से ज्यादा स्कूल खुल गए हैं। जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो स्कूलों में टीचर बच्चों का स्वागत गाना गाकर और तालियां बजाकर कर रहे हैं। यहां तक की बच्चों को मिठाई भी बांटी गई। स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने में अभी समय लगेगा लेकिन बाढ़ का विभत्स मंजर देख कर लौटे बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगाया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रम का मकसद बच्चों के दिलोदिमाग से बाढ़ के मिले जख्मों को भूलाना है।
बच्चों ने तस्वीरों में उकेरा बाढ़ पीड़ित केरल और सेना को बनाया पालनहार
पहले दिन जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो शिक्षकों ने उनसे पेंटिंग बनवाई। इन पेटिंग में बच्चों ने बाढ़ में डूबते केरल में सेना के रेस्क्यू की तस्वीरें बनाईं। अलापुझा जिले के एक सरकारी स्कूल की टीचर ने कहा कि ये सारी कवायद बच्चों को शांत रखने के लिए की जा रही है। उनके दिल-दिमाग पर बाढ़ ने काफी गहर असर डाला है। कई बच्चों को अपने परिजनों को भी खोना पड़ा है। खास बात यह है कि बारिश और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इडुक्की में सभी 458 स्कूल खुल गए हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर सी रवींद्रनाथ के मुताबिक 60 फीसदी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है। लेकिन अभी भी कुछ राहत कैंप बने हुए हैं। उम्मीद है कि तीन सितंबर तक सभी स्कूल शुरू हो जाएंगे। अभी राहत कैंपों में करीब दो लाख लोग रह रहे हैं।
नया केरल बनाने की है परियोजना
राज्य के मुख्यमंत्री पी विजयन कह चुके हैं कि उनका राज्य इस आपदा से उपजी परिस्थितियों को नया केरल बनाने की चुनौती के तौर पर लेगा। इसी वजह से सभी विधायकों की बैठक बुला ली गई है। हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजना बनाई जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब पानी उतर रहा है। नदियां किनारों की ओर लौट रही हैं। लोग राहत कैंप छोड़कर अपने घर पहुंचे तो यहां उनकी एक अलग जद्दोजहद शुरू हुई। घर के भीतर कीचड़ जम चुका है। सामान खराब हो चुके हैं। लोग इन्हें समेटकर, साफ-सफाई करके वापस गृहस्थी जमा रहे हैं।
बाढ़ की विभत्सा झेल कर लौटे लोगों में एक चीज बदली है वह है लोग आगे बढ़कर एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। मदद से कोई पीछे नहीं हट रहा। घर का जो भी सामान खराब हो गया है, उसे केरल की किसी बड़ी-छोटी दुकान पर छूट के साथ मरम्मत किया जा रहा है। केरल के जो लोग राज्य या देश से बाहर जाकर बस गए हैं, वो भी किसी न किसी रूप में मदद भेज रहे हैं।
देशभर के साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों मुख्यमंत्री राहत कोष में 738 करोड़ से अधिक राशि भेज चुके हैं। मलप्पुरम में एक स्कूल के 50 से ज्यादा बच्चे जिला कलेक्टर अमित मीना के पास पहुंचे और उन्हें अपना पिग्गी बैंक डोनेट किया। कासरगोड के 450 निजी बस ऑपरेटरों ने तय किया है कि वे अपनी एक दिन की कमाई रिलीफ फंड के लिए देंगे।
15 दिन बाद कोच्चि एयरपोर्ट शुरू
कोच्चि एयरपोर्ट का संचालन बुधवार को शुरू हो गया। बाढ़ की वजह से एयरपोर्ट में 4 मीटर तक पानी भर गया था। एयरपोर्ट के सबस्टेशन, सभी जनरेटर और सिस्टम डूब गए थे। रडार, नेवीगेशन सिस्टम भी प्रभावित हो गया था। इससे एयरपोर्ट को करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। फैक्ट कोच्चि एयरपोर्ट ओवरऑल ट्रैफिक के लिहाज से सातवां, अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक के लिहाज से दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के बाद चौथा एयरपोर्ट है। यहां के 55 फीसदी यात्री अंतरराष्ट्रीय हैं।
वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने बताया कि मंगलवार तक 28,757 घर, 288 सार्वजनिक संस्थान जैसे अस्पताल और दफ्तर, 52 स्कूल और 122 सार्वजनिक जगहों जैसे बाजारों को साफ किया गया है।
इस सफाई अभियान में 60 हजार वॉलंटियर्स तैनात किए गए हैं। बैंक शाखाएं और एटीएम भी चालू किए जा रहे हैं। बैंकों को निर्देश दिया है कि वे खराब नोटों को बदलें, आईटीआर की तारीख 31 से बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी गई है।
रोड ट्रैफिक टूटी सड़कें बनने में दो साल लगेंगे
पीडब्ल्यूडी के मुताबिक तबाह हुई सड़कों और ब्रिज बनाने में डेढ़ साल लग सकते हैं। 5815 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 34,732 किमी की सड़कें और 218 ब्रिज तबाह हुए हैं। सड़कों की सफाई,
पत्थर और गाद हटाने के काम पर अभी तक 5 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। एक अनुमान के तहत 5774 किमी रोड पर सिर्फ गड्ढे भरने में 368 करोड़ रुपए लगेंगे। कोट्टयम, इडुक्की, त्रिशूर जिले में सड़क और रेल यातायात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
दुनियाभर से पहुंच रही मदद
देश के आम लोगों ने 14 दिन में केरल को 713.92 करोड़ रुपए की सहायता दी है। ये रकम केरल के मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (सीएमडीआरएफ) में 3.91 लाख लोगों ने जमा कराई है। यह रकम केंद्र सरकार की तरफ से राज्य को दी गई 600 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद से 20 फीसदी अधिक है।
713.92 करोड़ रुपए में 132.62 करोड़ रुपए बैंकों और सीएमडीआरएफ गेटवे के साथ लिंक यूपीआई के जरिए मिली है। पेटीएम के जरिए 43 करोड़ रुपए आए हैं। सीएमडीआरएफ के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया वाले खाते में 518.24 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। इसके अलावा कैश, चेक और डॉफ्ट के जरिए 20 करोड़ की मदद मिली। पिछले साल ओखी तूफान ने भी केरल के तटीय इलाकों में तबाही मचाई थी। तब 104 करोड़ की मदद मिली थी।
राज्य सरकार की वर्ल्ड बैंक से 3 हजार करोड़ लोन लेने की योजना
केरल सरकार राज्य को दोबारा खड़ा करने के लिए विश्व बैंक से 3 हजार करोड़ रुपए का लोन लेने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि वो जल्द ही विश्व बैंक के अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। विजयन का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब केंद्र सरकार संयुक्त अरब अमीरात की 700 करोड़ रुपए की मदद की पेशकश ठुकरा चुकी है।
केरल की इस बाढ़ में 384 लोग मारे गए हैं। 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। 50 हजार मकान पूरी तरह से तबाह हो गए। इस तबाही में 4 लाख से ज्यादा पक्षी और 22 हजार से ज्यादा जानवर भी मारे गए हैं। बता दें कि इस आपदा में 80 हजार किमी रोड बह गई और 39 ब्रिज पूरी तरह से ढह गए। राज्य सरकार के अनुमान के मुताबिक 26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।