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केरल: ईडी अधिकारियों पर हमले के आरोपियों को राहत नहीं, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

Sat, 30 May 2026 11:06 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 30 May 2026 11:06 PM IST
सार

केरल की अदालत ने ईडी अधिकारियों की गाड़ियों पर हमले के मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह हमला संगठित था, जिससे अधिकारियों में भय और चोटें आईं, इसलिए इसे राज्य के खिलाफ अपराध माना जा सकता है। पढ़िए रिपोर्ट-

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Kerala court denies bail to 5 accused of attack on ED officials' vehicles
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

केरल की एक अदालत ने शनिवार को उन पांच लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिन पर भीड़ का हिस्सा बनकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को ले जा रहे वाहनों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने का आरोप है। ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के किराये के घर पर उनकी बेटी के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में तलाशी ली थी।
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तिरुवनंतपुरम न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट-III तानिया मरियम जोस ने आरोपियों को राहत देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस चरण में जमानत देने से उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को भविष्य में ऐसे ही कृत्य करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और समाज पर इसका निरुत्साहित करने वाला प्रभाव पड़ेगा।
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कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए हमले को राज्य के खिलाफ अपराध माना जा सकता है और आरोपियों की मौत का कारण बनने की मंशा उनके कृत्यों से आसानी से पहचानी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी के अधिकारियों पर हुए हमले को राज्य के खिलाफ अपराध माना जा सकता है और आरोपियों की मौत का कारण बनने की मंशा उनके कृत्यों से आसानी से पहचानी जा सकती है। 
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'हमले से असुरक्षा की भावना पैदा हुई'
इसने कहा, इस अदालत की राय में इस हमले से ईडी अधिकारियों और उस वाहन के चालक में भय, मानसिक आघात और असुरक्षा की भावना पैदा हुई, जिसमें वे यात्रा कर रहे थे। आरोपियों की ओर से इस्तेमाल किए गए खतरनाक हथियार ईंट, पत्थर और डंडे थे। कार चालक की दोनों आंखों में चोट आई। यह अदालत पीड़ितों द्वारा झेले गए मानसिक और शारीरिक तनाव से आंखें नहीं मूंद सकती। इस हमले को राज्य के खिलाफ अपराध माना जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस हमले को स्वतःस्फूर्त नहीं माना जा सकता। उसका मानना था कि पांचों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है, क्योंकि यह घटना किसी व्यक्तिगत झगड़े की नहीं बल्कि एक संगठित राजनीतिक हमले की थी। कोर्ट ने यह भी जिक्र किया कि वाहनों को हुए नुकसान का आकलन तीन लाख रुपये किया गया है। जांच अभी शुरू ही हुई है। आरोपियों की पहचान नहीं कराई गई है और इस घटना के संबंध में अभी बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी बाकी है।


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'मामले का समाज पर असर पड़ा'
अदालत ने आगे कहा कि लोगों ने इस घटना को मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से देखा और कथित आरोपियों की'शरारत' के बारे में समाचार पत्रों आदि से जानकारी प्राप्त की। इसलिए इस मामले को ऐसा दुर्लभ मामला माना जा सकता है, जिसका समाज पर प्रभाव पड़ा है। अदालत ने कहा, पीड़ितों और व्यापक समाज के हितों पर भी जोर दिया जाना चाहिए। इसलिए इन कारणों को देखते हुए जमानत याचिका खारिज की जाती है। 
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