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सुकमा हमलाः रोड बनाने की रफ्तार को लेकर CRPF ने दी थी चेतावनी, छग सरकार ने किया अनसुना
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Thu, 27 Apr 2017 09:28 AM IST
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सीआरपीएफ
- फोटो : source
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दो दिन पहले सुकमा में सीआरपीएफ के कैंप पर हुए नक्सली हमले में 25 जवान शहीद हो गए। सीआरपीएफ के 74th बटालियन के जवान एक अंडर क्रंस्ट्रक्शन रोड की सुरक्षा में तैनात थे। इस हमले पर सीआरपीएफ के बड़े अधिकारी ने कहा कि वो राज्य सरकार को बार-बार सुस्त रफ्तार से चल रहे निर्माण कार्य के बारे में चेतावनी देते रहे।
सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशन) डीपी उपाध्याय ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने कई दफा सरकार को सड़क निर्माण की सुस्त रफ्तार के बारे में चेताया। हम लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। यह हमारा फर्ज है, मगर सालों से बन रहीं इस रोड का निर्माण बहुत मंद गति से हो रहा था।"
एक रिपोर्ट के अनुसार एक नई तकनीक को अपना कर इस 1 किलोमीटर लंबी रोड को सिर्फ 2 दिनों में भी बनाया जा सकता था, मगर इस प्रस्ताव की फाइल सरकारी दफ्तरों में 3 सालों से धूल ही खाती रही। सीआरपीएफ ने बताया कि छोटे ठेकेदारों को दिए कॉन्ट्रैक्ट का नुकसान यह होता है कि उनके पास संसाधनों की खासी कमी होती है। उन्होंने इस जवानों के समय की बर्बादी बताया।
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सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशन) डीपी उपाध्याय ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने कई दफा सरकार को सड़क निर्माण की सुस्त रफ्तार के बारे में चेताया। हम लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। यह हमारा फर्ज है, मगर सालों से बन रहीं इस रोड का निर्माण बहुत मंद गति से हो रहा था।"
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एक रिपोर्ट के अनुसार एक नई तकनीक को अपना कर इस 1 किलोमीटर लंबी रोड को सिर्फ 2 दिनों में भी बनाया जा सकता था, मगर इस प्रस्ताव की फाइल सरकारी दफ्तरों में 3 सालों से धूल ही खाती रही। सीआरपीएफ ने बताया कि छोटे ठेकेदारों को दिए कॉन्ट्रैक्ट का नुकसान यह होता है कि उनके पास संसाधनों की खासी कमी होती है। उन्होंने इस जवानों के समय की बर्बादी बताया।
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