केन-बेतवा लिंक परियोजना: बदल जाएगी बुंदेलखंड की तस्वीर, खत्म होगा पानी के लिए हर साल मचने वाला हाहाकार
दशकों से यह क्षेत्र सूखे का शिकार है। इस कारण क्षेत्र में व्यापक गरीबी के कारण अन्य जिलों की तुलना में यहां से पलायन भी बहुत ज्यादा है। परियोजना तय समय पूरी हुई तो क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल के संकट का स्थायी समाधान हो जाएगा।
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करीब 17 साल के इंतजार के बाद महत्वाकांक्षी केन-बेतवा परियोजना पर कैबिनेट की मुहर मध्यप्रदेश के आठ और उत्तर प्रदेश के चार जिले वाले बुंदेलखंड की तस्वीर बदल कर रख देगी। दशकों से पेय जल और सिंचाई संकट का सामना कर रहे इस क्षेत्र के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं है। मोदी सरकार का यह निर्णय चंद महीने बाद होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है।
दशकों से यह क्षेत्र सूखे का शिकार है। इस कारण क्षेत्र में व्यापक गरीबी के कारण अन्य जिलों की तुलना में यहां से पलायन भी बहुत ज्यादा है। अगर यह परियोजना तय समय आठ साल में पूरी हुई तो इस पूरे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल के संकट का स्थायी समाधान हो जाएगा।
परियोजना की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके जरिये 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई की जद में आएगी। इसके अलावा 62 लाख लोगों को पीने का पानी नसीब होगा। परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो बैराज और मध्यप्रदेश की नदियों पर सात बांध बनाए जाएंगे। 103 मेगावाट हाइड्रो पावर और 27 मेगावाट सोलर पावर का उत्पादन होगा।
परियोजना की खास बातें
- 44,605 करोड़ रुपये की है परियोजना
- 1062 लाख हैक्टेयर भूमि की होगी सिंचाई
- 62 लाख किसानों को मिलेगा पानी
- 103 मेगावाट जल ऊर्जा और 27 मेगावाट
- सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होगा
- 8 साल में बनकर होगा तैयार
इन जिलों को मिलेगा लाभ
- मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छत्तरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी
- उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी व ललितपुर जिलों को लाभ मिलेगा
यूपी के लिए इसलिए है अहम
बुंदेलखंड क्षेत्र में यूपी के चार जिले बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर शामिल हैं। इस परियोजना से यूपी के इन चार जिलों को 750 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी मिलेगा। इन चार जिलों की दो लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी। इन चार जिलों का पेयजल संकट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इसके अलावा इस परियोजना के तहत यूपी में दो बैराज बनने हैं। बिजली का लाभ अलग से मिलेगा।
यूपी और एमपी को करना होगा पांच फीसदी खर्च, 39317 करोड़ खर्च केंद्र करेगा
44,605 करोड़ की इस परियोजना का नब्बे फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी और यूपी को महज पांच फीसदी ही खर्च उठाना होगा। केंद्र का खर्च 39,317 करोड़ होगा। शेष दस फीसदी राशि में ही उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार को योगदान देना होगा। सरकार ने इस परियोजना को हर हाल में आठ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
पानी के कारण दशकों से गरीबी झेल रहे कई इलाके
परियोजना को ऐसे समय में मंजूरी दी गई है जब करीब दो महीने बाद ही यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस परियेाजना से यूपी के जिन चार जिलों को लाभ हासिल होना है, वहां पानी की कमी के कारण दशकों से भयानक स्तर की गरीबी है। परियोजना को मंजूरी मिल जाने के बाद सरकार की कोशिश चुनाव से पहले काम शुरू करने की है। जाहिर तौर पर इसके जरिये भाजपा इन चार जिलों के मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी।