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होम क्वारंटीन में कोरोना को मात देने के साथ मन भी रखें स्वस्थ, परिवार और समाज को भी निभानी होगी अपनी जिम्मेदारी
Thu, 23 Jul 2020 06:13 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Thu, 23 Jul 2020 06:13 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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देश में कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही अस्पतालों में बेड कम पड़ने से घर पर इलाज कराने वालों यानी होम क्वारंटीन में रहने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बंगलूरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (निमहान्स) के मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि होम क्वारंटीन से बीमारी को ठीक करने के साथ उसे दूसरों तक फैलने से रोका जा सकता है, लेकिन मरीज और उसके परिवार के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। बीमारी के साथ घर में कैद रहने के बीच मन को स्वस्थ रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए सभी को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।
क्वारंटीन की समयसीमा स्पष्ट हो
विशेषज्ञों के अनुसार क्वारंटीन खत्म होने से पहले अचानक समय सीमा बढ़ाया जाए तो मरीज और तीमारदार के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। क्वारंटीन की अधिकतम समयसीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। अचानक समय बढ़ने से मरीज और तीमारदारों को बेचैनी और घबराहट हो सकती है।
सोशल मीडिया, फर्जी खबरों से दूरी
क्वारंटीन में व्यक्ति दुनिया से अलग हो जाता है। ऐसी स्थिति में कोशिश करनी चाहिए कि वो सोशल मीडिया पर चलने वाली फर्जी सूचना या जानकारी से दूर रहे, क्योंकि इससे तनाव बढ़ सकता है। सनसनीखेज खबरों को देखकर मरीज के मानसिक स्तर पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे उसका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। व्हाट्सएप पर चलने वाली खबरों और इलाज पर विश्वास न करें इससे तकलीफ बढ़ सकती है।
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क्वारंटीन की समयसीमा स्पष्ट हो
विशेषज्ञों के अनुसार क्वारंटीन खत्म होने से पहले अचानक समय सीमा बढ़ाया जाए तो मरीज और तीमारदार के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। क्वारंटीन की अधिकतम समयसीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। अचानक समय बढ़ने से मरीज और तीमारदारों को बेचैनी और घबराहट हो सकती है।
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सोशल मीडिया, फर्जी खबरों से दूरी
क्वारंटीन में व्यक्ति दुनिया से अलग हो जाता है। ऐसी स्थिति में कोशिश करनी चाहिए कि वो सोशल मीडिया पर चलने वाली फर्जी सूचना या जानकारी से दूर रहे, क्योंकि इससे तनाव बढ़ सकता है। सनसनीखेज खबरों को देखकर मरीज के मानसिक स्तर पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे उसका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। व्हाट्सएप पर चलने वाली खबरों और इलाज पर विश्वास न करें इससे तकलीफ बढ़ सकती है।
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वायरस से संक्रमण का डर...
क्वारंटीन में रहने वाले को चिंता होती है कि उसने और कितनों को संक्रमित किया होगा। वो खुद को कमजोर भी समझने लगता है। स्वास्थ्य में हल्का भी बदलाव आने पर वो उसे लक्षण समझेगा और ये मान लेगा कि उसे बीमारी है। मरीज के सवाल का जवाब मिलना चाहिए।
खुद को कलंकित महसूस न करें
कोरोना की चपेट में आने पर खुद को कलंकित महसूस न करें। करीबियों को भी इस बात का ध्यान रखना होगा। आसपास कोई रोगी है तो उससे या परिवार से भेदभाव न करें। फोन से हालचाल लें। इससे रोगी और परिवार का मनोबल बढ़ेगा। बीमारी से ठीक हो गए लेकिन लोग भेदभाव कर रहे हैं तो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।
क्वारंटीन में रहने वाले को चिंता होती है कि उसने और कितनों को संक्रमित किया होगा। वो खुद को कमजोर भी समझने लगता है। स्वास्थ्य में हल्का भी बदलाव आने पर वो उसे लक्षण समझेगा और ये मान लेगा कि उसे बीमारी है। मरीज के सवाल का जवाब मिलना चाहिए।
खुद को कलंकित महसूस न करें
कोरोना की चपेट में आने पर खुद को कलंकित महसूस न करें। करीबियों को भी इस बात का ध्यान रखना होगा। आसपास कोई रोगी है तो उससे या परिवार से भेदभाव न करें। फोन से हालचाल लें। इससे रोगी और परिवार का मनोबल बढ़ेगा। बीमारी से ठीक हो गए लेकिन लोग भेदभाव कर रहे हैं तो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।
रोगी परिवार से जुड़ा रहे...
होम क्वारंटीन में जाने का मतलब ये नहीं कि सभी से संपर्क खत्म हो जाए। ऐसे में दिनचर्या खराब होती है, लोगों से बातचीत बंद होने से तनाव हो सकता है। क्वारंटीन में रहते हुए परिवार और सगे संबंधियों के साथ कंप्यूटर या फोन के जरिए जुड़े रहना होगा। पुरानी दिनचर्या का पालन करना होगा। खुद को व्यस्त रखने के लिए किताब पढ़ें, गाना सुनें, कुछ नई चीज के बारे में जानना समझना चाहते हैं तो इंटरनेट की मदद लें। ये सबसे बेहतर समय है।
दिनचर्या को प्रभावित न होने दें...
दिनचर्या को प्रभावित न होने दें। पूरी नींद लें। सुबह-शाम क्षमतानुसार व्यायाम और योग करें। शराब या किसी नशीली दवा का प्रयोग बिलकुल न करें।
तुरंत करें फोन...
क्वारंटीन में बुखार, सूखी खांसी, सांस में तकलीफ व अन्य असामान्य बदलाव दिखते ही अपने क्षेत्रीय स्वास्थ्य विभाग या 1921 पर फोन कर जानकारी दें।
होम क्वारंटीन में जाने का मतलब ये नहीं कि सभी से संपर्क खत्म हो जाए। ऐसे में दिनचर्या खराब होती है, लोगों से बातचीत बंद होने से तनाव हो सकता है। क्वारंटीन में रहते हुए परिवार और सगे संबंधियों के साथ कंप्यूटर या फोन के जरिए जुड़े रहना होगा। पुरानी दिनचर्या का पालन करना होगा। खुद को व्यस्त रखने के लिए किताब पढ़ें, गाना सुनें, कुछ नई चीज के बारे में जानना समझना चाहते हैं तो इंटरनेट की मदद लें। ये सबसे बेहतर समय है।
दिनचर्या को प्रभावित न होने दें...
दिनचर्या को प्रभावित न होने दें। पूरी नींद लें। सुबह-शाम क्षमतानुसार व्यायाम और योग करें। शराब या किसी नशीली दवा का प्रयोग बिलकुल न करें।
तुरंत करें फोन...
क्वारंटीन में बुखार, सूखी खांसी, सांस में तकलीफ व अन्य असामान्य बदलाव दिखते ही अपने क्षेत्रीय स्वास्थ्य विभाग या 1921 पर फोन कर जानकारी दें।