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Kavya: महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख सचिव डॉ अतुल पाटणे के कविता संग्रह 'कल थी उनकी दिवाली' का विमोचन
Sat, 08 Jun 2024 09:47 PM IST
नितिन गौतम
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 08 Jun 2024 09:47 PM IST
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विस्तार
महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख सचिव डा अतुल पाटणे के कविताओं में आम आदमी का दर्द और संघर्ष दिखता है। अतुल की कविता किसी कवि की कल्पना मात्र नहीं हैं। उन्होंने जो देखा उसे कविता का रूप दिया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अतुल पाटणे के कविता संग्रह 'कल थी उनकी दीवाली' के विमोचन समारोह में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष व साहित्यकार डा दामोदर खडसे ने यह भावना व्यक्त की।डॉ. दामोदर खडसे ने कहा कि जो दूसरों की संवेदना समझ सकता है, वही उसे कागज पर उतार सकता है। उन्होंने जो देखा वह लिखा। उनके कविता संग्रह को पढ़ने के दौरान महसूस किया कि प्रशासन संभालने के साथ कविता के सानिध्य में रहना कितना मुश्किल काम होता है। एक मराठी भाषी द्वारा हिंदी में इतनी अच्छी कविताएं लिखना बड़ी बात है। उन्होंने ठेठ हिंदी में भावनाओं को शब्दबद्ध किया है। पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ विकास महात्मे ने कहा कि 'मैं राजनीति में रहा पर राजनेता नहीं बन सका। मैं लोकनीति वाला आदमी हूं।' डॉ. महात्मे ने कहा कि 'मैंने मेडिकल की पढ़ाई की है। इसलिए जानता हूं कि भावनाएं दिल से नही दिमाग से निकलती है। उन्होंने कहा कि 'प्रशासनिक कामकाज के बीच कविता लिखना मुश्किल काम है। कवि कोमल हृदय का होता है। वह आम आदमी को तकलीफ को अच्छी तरह समझता है। इस दौरान उन्होंने कविता की हास्यपूर्ण ढंग से व्याख्या करते हुए कहा कि कविता और निबंध में यह फर्क होता है कि प्रेमिका के मुंह से निकले शब्द कविता और पत्नी बोले तो निबंध।'
वे देखते हैं ख्वाब हम देखते हैं सपना- डॉ. पांढरपट्टे
लोकसेवा आयोग के सदस्य व गजलकार डॉ दिलीप पांढरपट्टे ने कहा कि उर्दू व हिंदी एक ही है। इसे सिर्फ मुसलमानों की भाषा समझा जाता है लेकिन, मुसलमानों का उर्दू से कोई संबंध नहीं है। दोनों भाषाओं के अंतर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि "वे देखते है ख्वाब, हम देखते हैं सपना।' इस दौरान उन्होंने अपना एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि मॉरीशस में खूब हिंदी भोजपुरी बोली जाती है। मैंने वहां आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम के लिए अपनी उर्दू गजल को भेजा तो आयोजकों ने कहा कि हमें उर्दू नहीं हिंदी साहित्य चाहिए। फिर मैंने उर्दू को हिंदी लिपि में बदल कर भेज दिया तो वे खुश हो गए।' डॉ. पाटणे के कविता संग्रह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 'उनकी कविता सामाजिक विषयों पर होती है जिसमें दुनिया का दुख दर्द होता है।' प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री डॉ. शंकर बाबा पापड़कर ने कहा कि 'अतुल पाटणे कविता के माध्यम से समाज सेवा करने वाले व्यक्ति है।' उन्होंने कहा कि 'विनोवा भावे ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कहा था अच्छे अधिकारी साथ में रखो, वही देश बदल सकते हैं।'
कालेज की ट्रिप, मैं नहीं जा सका, गरीबी में बीमारी का बहाना था दोस्तों...
कविता संग्रह के विमोचन के दौरान डॉ. पाटणे ने अपने कविता संग्रह की कुछ कविताओं का पाठ किया। "कालेज की गई ट्रिप, मै जा नही सका। गरीबी में बीमारी का बहाना था दोस्तों"। "खाने वाले थे ज्यादा, रोटियां थी कम, उपवास का तो एक बहाना था दोस्तो"। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईएएस व साहित्यकार डा.विश्वास पाटिल ने कहा कि दूसरों की दिवाली की चिंता करना बड़ी बात है। डा पाटणे ने एक उत्तम काव्य संग्रह हिंदी भाषा को दिया है। एक प्रशासनिक अधिकारी को दुनियाभर के पत्र लिखने-पढ़ने पड़ते हैं। इसके बीच कविता लिखना मुश्किल होता है लेकिन, अतुल पाटणे यह मुश्किल काम बखूबी करते हैं। कविता की एक ताकत होती है। वह ताकत इनके कविता संग्रह में हैं। इस मौके पर सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक पद्मश्री डा तात्याराव लहाने ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर आईएएस अधिकारी अंशुल सिन्हा, उद्योगपति व आचार्य महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन के उपाध्यक्ष गनपत कोठारी आदि मौजूद थे।