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कौशांबी में दलित महिला अधिकारी को नहीं दिया बर्तन में पानी, छह के खिलाफ मामला दर्ज

Thu, 02 Aug 2018 06:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Aug 2018 06:08 AM IST
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Kaushambi: Case against 6 people for humiliating Dalit woman officer
प्रतीकात्मक तस्वीर

छुआछूत को खत्म करने के लिए तमाम कानून भले ही बनाये गए हो लेकिन जाति व्यवस्था में जकड़ा समाज अभी भी इस बुराई से मुक्त नहीं हो पाया है। कौशाम्बी जिले में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दलित होने की वजह से बर्तन में पानी नहीं देने के मामले में छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपियों में तीन ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी, वीडीओ और कोटेदार शामिल हैं। रिपोर्ट लिखने के बाद पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है। 

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उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा ने बताया कि जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के निर्देश पर मंगलवार को वह विकास कार्यों की समीक्षा करने सदर ब्लॉक के अंबावां पूरब गांव गई थीं। वहां उनकी बॉटल का पानी खत्म हो गया। इस पर उन्होंने वहां मौजूद जिम्मेदारों से पानी मांगा।
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सभी ने दलित होने की वजह से बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया। अफसर के मुताबिक मौजूद ग्रामीणों से पानी मांगा तो उन्हें भी इशारा करके मना कर दिया गया। एक क्षेत्र पंचायत सदस्य ने साफ कह दिया कि बर्तन में पानी देने से बर्तन अशुद्ध हो जाएगा। पानी नहीं मिलने की वजह से अफसर की तबीयत बिगड़ गई थी। बीते बुधवार को पीड़ित अफसर ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को शिकायती पत्र दिया।
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डीएम के निर्देश पर एसपी प्रदीप गुप्ता ने अंबावां पूरब ग्राम प्रधान शिवसंपत, सेक्रेटरी रविदत्त मिश्र, बीडीसी झल्लर तिवारी, कोटेदार राजेश सिंह, भइला मकदूमपुर प्रधान पति पवन यादव व संइबसा प्रधान अंसार अली के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति निश्पृश्यता अधिनियम के तहत नगर कोतवाली में केस दर्ज करा दिया है। एसपी ने बताया कि प्रकरण की बारीकी से जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। 

अंग्रेजी में थी तहरीर, दर्ज हुई गलत रिपोर्ट

पीड़ित महिला अफसर ने अंग्रेजी में तहरीर दी थी। कोतवाली पुलिस इसे ठीक तरीके से पढ़ नहीं पाई। छह की जगह तीन आरोपियों के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज कर दी। इंस्पेक्टर अजीत कुमार पांडेय ने बाकायदा बयान दिया कि तीन के खिलाफ ही केस दर्ज हुआ है। बाद में सीओ को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने एफआईआर निरस्त करवाकर दूसरा केस दर्ज कराया। इस लापरवाही से साफ है कि कोतवाली पुलिस अंग्रेजी समझ नहीं पाई।
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