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कश्मीरी पंडित: पाकिस्तान तो गर्म लोहे पर चोट करता है, असल भरोसा तो यहां के मुस्लिमों से मिलना है

Wed, 17 Aug 2022 05:40 PM IST
निर्मल कांत जितेंद्र भारद्वाज
जितेंद्र भारद्वाज Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 17 Aug 2022 05:40 PM IST
सार

सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर कहते हैं, दरअसल अब टारगेट किलिंग के जरिए पाकिस्तानी आईएसआई, अनुच्छेद 370 की समाप्ति को चुनौती दे रही है। कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। ऐसा नहीं है कि वहां केवल पंडितों पर ही अटैक होता है। 

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Kashmiri Pandit Pakistan strikes on hot iron real trust will come only from Muslims
Kashmiri Pandit - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

कश्मीरी पंडितों को आतंकियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। टारगेट किलिंग को लेकर घाटी के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हिंदू गुस्से में हैं। 90 के दशक में खराब हालातों के बावजूद जिन कश्मीरी पंडितों ने घाटी नहीं छोड़ी, अब वही निशाने पर हैं। केंद्र सरकार ने जिस मंशा से 'अनुच्छेद 370' को खत्म किया था, वह मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है।
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राजनीतिक एवं सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं, पाकिस्तान तो गर्म लोहे पर चोट करता है। वह घाटी का माहौल सुधरने ही नहीं देता। यहां के बिगड़े माहौल से ही वहां की सरकार को संजीवनी मिलती है। मोदी-शाह द्वारा अनुच्छेद 370 खत्म करने की पहल को चुनौती दी जा रही है। एक तरफ आर्मी एवं दूसरे सुरक्षा बल, आतंकियों को मार रहे हैं तो दूसरी ओर बड़े आतंकी समूहों के छोटे ग्रुप नया नाम लेकर खड़े हो रहे हैं।
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ये सब कश्मीरी घाटी के लोगों के बीच हो रहा है। आतंकी समूहों को स्थानीय लोगों का समर्थन हासिल है। अल्पसंख्यक हिंदुओं को असल भरोसा, सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि लोकल मुस्लिमों से मिलना है। जिस रोज यह संभव होगा, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद भी तब अंतिम सांस ले रहा होगा।
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'कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स' ने दी है चेतावनी ... 
मंगलवार को चोटीगाम शोपियां में हाईब्रिड आतंकियों ने दो सगे भाईयों सुनील कुमार और पिंटु कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। इसमें सुनील कुमार मारे गए, जबकि उनके भाई पिंटु, गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कश्मीरी हिंदुओं से कह दिया कि वे पलायन कर किसी सुरक्षित जगह चले जाएं। सरकार ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी है। अगर हत्याओं का सिलसिला यूं ही चलता रहा तो आतंकी सभी कश्मीरी पंडितों को मार देंगे।

सुनील कुमार का परिवार उन लोगों में शामिल है, जिन्होंने 90 के दशक में भी कश्मीर नहीं छोड़ा था। हमला करने के बाद 'कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स' ने एक खुला पत्र जारी किया है। इसमें लिखा है ये दोनों विभिन्न एजेंसियों को हमारी सूचना दे रहे थे। लोगों को जबरन तिरंगा लगाने को मजबूर किया। इसके अलावा इस संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि जो कोई व्यक्ति, कश्मीर की डेमोग्राफी से छेड़छाड़ करेगा, उसके साथ यही होगा। खुले पत्र में पंडितों और नॉन लोकल का जिक्र किया गया है। इस पत्र के मजमून को समझें तो यही निष्कर्ष सामने आता है कि जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठन, अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद घाटी में हो रहे बदलावों से खफा हैं। 

सुरक्षा बल नहीं, अवाम के खड़ा होने का वक्त है ...  
जम्मू कश्मीर के राजनीतिक एवं सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर कहते हैं, दरअसल अब टारगेट किलिंग के जरिए पाकिस्तानी आईएसआई, अनुच्छेद 370 की समाप्ति को चुनौती दे रही है। कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। ऐसा नहीं है कि वहां केवल पंडितों पर ही अटैक होता है। दूसरे समुदायों को भी निशाना बनाया जाता रहा है। सिखों पर भी अटैक हुआ था, लेकिन उनके भारी विरोध के चलते पाकिस्तान ने कदम पीछे खींच लिए। संभव है कि उसमें खालिस्तान को लेकर पाकिस्तान की कोई रणनीति रही हो। घाटी में सीमा पार के आतंकी संगठनों के अंडर ग्राउंड वर्कर व ओवर ग्राउंड वर्कर मौजूद हैं। यही लोग टारगेट किलिंग कर रहे हैं।

बतौर अनिल गौर, ऐसा नहीं है कि ये वर्कर किलिंग के वक्त ही प्रकट होते हैं। ये आम लोगों के बीच रह रहे हैं। लोगों को इनकी जानकारी है, लेकिन वे किन्हीं कारणों से मौन साधे रहते हैं। अब घाटी से आतंक को पूरी तरह खत्म करना है तो उसके लिए अवाम को सामने आना होगा। बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय को आवाज उठानी होगी। जब अवाम खड़ा होगा तो हाईब्रिड आतंकियों को छिपने की जगह नहीं मिलेगी। जिस दिन अवाम ने यह ठान लिया कि वे आतंकियों का समर्थन नहीं करेंगे, समझो उसी दिन से आतंकियों की कमर टूटना शुरु हो जाएगी। घाटी में 50 से अधिक हाईब्रिड आतंकी मौजूद हैं। 

किसे है कश्मीर की डेमोग्राफी बिगड़ने का डर ... 
जब अनुच्छेद 370 की समाप्ति हुई तो जोरों से यह प्रचार हुआ था कि अब वहां बाहर के लोग बस जाएंगे। जमीनें खरीदी जाएंगी। पहले दो साल तक, दर्जनभर लोग भी वहां जमीन खरीदने नहीं पहुंचे। दूसरी ओर, स्थानीय मुस्लिमों में यह भय हो गया कि अब कश्मीर की डेमोग्राफी बिगड़ जाएगी। 'कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स', इस संगठन ने कश्मीरी पंडित भाईयों पर हमला करने की जिम्मेदारी ली है। साथ ही लोगों को यह चेतावनी भी दी कि अगर किसी ने कश्मीर की डेमोग्राफी से छेड़छाड़ की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हाईब्रिड आतंकी, पब्लिक के बीच मौजूद हैं। वे ज्यादातर हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।

अनिल गौर कहते हैं, 2000 के दशक में जब कश्मीर में पर्यटन उद्योग, सिमट रहा था तो ट्रैवल एंड ट्रेड एसोसिएशन ने हुर्रियत जैसे संगठनों के माध्यम से आतंकियों तक यह संदेश पहुंचाया कि टूरिस्ट सीजन में वे अपनी गतिविधियां बंद कर दें। ऐसा हुआ भी, आतंकियों ने वह मांग मान ली थी। इस बार भी कश्मीर में टूरिस्ट सीजन, टॉप पर रहा है। अब उसके खत्म होते ही आतंकियों ने टारगेट किलिंग शुरु कर दी। कश्मीरी पंडितों के पास अच्छी खासी जमीन रही है। सरकार उनकी वापसी का प्रयास कर रही है। स्थानीय लोगों को यह रास नहीं आ रहा कि कश्मीरी पंडित वापसी करें। वजह, उनके घर व जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं।

"इग्रेंट पैकेज के तहत जॉब पर लगे पंडितों को भी नहीं बख्शा जा रहा। पाकिस्तान, इन्हीं बातों का फायदा उठाता है। उसका मकसद है कि घाटी के हिंदुओं में डर पैदा हो। वहां आर्थिक व्यवस्था गति न पकड़ने पाए। भारत सरकार को इसके लिए पाकिस्तान पर कॉस्ट इम्पोस्ड करनी होगी। वहां आतंकियों को ट्रेनिंग देने वाले लांचिंग पैड को नष्ट करना होगा। कठोर कदम के बिना काम नहीं चलेगा।"

सोशल मीडिया से तो कश्मीरी महफूज नहीं होंगे ... 
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू के अनुसार, पाकिस्तान का गेम प्लान है। वह घाटी को अशांत रखेगा। जिन पंडितों को पीएम पैकेज के तहत जॉब मिली है, वे सुरक्षित नहीं हैं। अगर श्रीनगर के लालचौक में सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए कुछ लोग विरोध प्रदर्शन करते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि घाटी के पंडित सुरक्षित हो गए हैं। उन्हें तो आज भी तीस साल पहले जैसे हालात झेलने पड़ रहे हैं। कुछ बदलाव नहीं दिख रहा। सब कुछ अच्छा नहीं है। नब्बे के दशक में तीस हजार कश्मीरी पंडित थे, आज उनकी संख्या 800 पर सिमट चुकी है। गत अक्तूबर में सरकार से मांग की गई थी कि वे दूरवर्ती इलाकों में रह रहे कश्मीरी पंडितों को श्रीनगर में सुरक्षित जगह मुहैया कराई जाए। सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। यहां पर हमें आर्मी हर समय नहीं चाहिए। 

घाटी में अच्छे मुस्लिम भी हैं, वे चाहते हैं पंडित लौटें... 
ऐसा नहीं है कि सारे मुस्लिम, पंडितों की वापसी नहीं चाहते। अच्छे मुस्लिम भी हैं, लेकिन कुछ लोग घाटी के सौहार्द और संस्कृति को खत्म करना चाहते हैं। सरकार को आर्मी नहीं, बल्कि सीधे ही स्टेक होलडर से बात करनी होगी। सिस्टम में जो छिद्र हैं, उन्हें भरना होगा। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना ने कहा, कश्मीर में जब आजादी का पर्व मनाया तो उसे दुनिया ने देखा। यह सब आतंकियों से बर्दास्त नहीं हुआ। हाईब्रिड आतंकियों का सफाया तय है।


भाजपा प्रवक्ता, सैयद जफर इस्लाम के मुताबिक, सरकार ने शिकंजा कसा है। घाटी के हालात सुधरे हैं। छोटे गांव में भी सुरक्षा दी जा रही है। लोगों ने सुरक्षा महसूस की है तभी तो भरपूर पर्यटक घाटी में आए हैं। पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य कहते हैं, इंटेलिजेंस के मानवीय पहलू पर ध्यान देना होगा। युवा, आतंक के रास्ते पर क्यों जा रहे हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकना होगा। छोटे हथियारों पर अंकुश लगाना पड़ेगा।
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