आत्मरक्षा के लिए तैयार होतीं कश्मीरी लड़कियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर में लड़कियां जज्बे और जोश से लबरेज हो आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) का हुनर सीख रही हैं। इनमें से कुछ पहली बार आत्मरक्षा का हुनर सीख रही हैं तो कुछ कई सालों से इसका प्रशिक्षण ले रही हैं। श्रीनगर के महाराजा बाजार की रहने वाली अमीना फयाज बीते कई सालों से ताइक्वांडो की बारीकियां सीख रही हैं। वे कहती हैं कि कश्मीर में हर दिन खराब हालात रहने के बावजूद वह अपने इस शौक और मकसद को पूरा करने के लिए घर से निकलती हैं।
उन्होंने बताया, "मैं जहां रहती हूँ, वहां हर दिन हालात खराब रहते हैं। हर दिन कर्फ्यू लगा रहता है। मैं श्रीनगर के निचले हिस्से में रहती हूँ, वहां हर दिन ही कर्फ्यू रहता है। आज भी जब मैं आई तो घर से फोन आया कि यहाँ फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया है।" अमीना आगे बताती हैं, "मेरी जैसी लड़कियों को प्रैक्टिस करने के लिए जाते वक्त इसका ख्याल रखना पड़ता है। इसके बावजूद मेरी जैसी लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सीखने चाहिए। ये नहीं कि जिस लड़की के परिवार वाले पढ़े-लिखे हैं, वो ही ये सीखे। हर एक को सीखना चाहिए।"
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली श्रीनगर के छतबल की रहने वाली मंशा ने बैंकॉक में खेले गए मुकाबले में सिल्वर का तमगा हासिल किया। मंशा के पिता की बचपन में मौत हो गई थी। मंशा इन दिनों श्रीनगर के इनडोर स्टेडियम में लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं। उनका कहना है कि कश्मीर में लड़कियाँ तो आगे आ रही हैं, लेकिन कुछ माँ, बाप अब भी अपने बच्चों को खेलों से दूर रख रहे हैं।
उनका कहना था, "लड़कियां तो अब आहिस्ता-आहिस्ता आगे आ रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में नहीं। कुछ माँ, बाप अब भी अपने बच्चों पर भरोसा नहीं करते हैं। बच्चे पर भरोसा करना चाहिए। खेल-कूद बच्चों के लिए जरूरी है। आजकल के जमाने में तो सेल्फ डिफेंस एक लड़की के लिए बहुत अहम है।" मंशा कहती हैं कि इस मुकाम तक पहुंचना कोई आसान काम नहीं था। वह कहती हैं, "अक्सर मेरे पास पैसे नहीं होते थे। लेकिन मेरे कोच मुजफ्फर सर ने हमेशा मेरी मदद की और आगे बढ़ने का मौका दिया।"
दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग की रहने वाली मरिया पहली बार आत्मरक्षा का हुनर सीख रही है। मरिया कहती हैं कि वह हर जगह अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। उन्होंने कहा, "हम जब गाड़ी में बैठते हैं, तो लड़के ऐसी गंदी हरकतें करते हैं कि शर्म आती है। ये भी एक वजह थी कि मैं आत्मरक्षा के गुर सीखूं। अब मुझमें आत्मविश्वास पैदा हो रहा है, जब से मैंने ये सीखना शुरू किया है।"
ऑटो रिक्शा चलाने वाले की बेटी सकीना 14 सालों से ताइक्वांडो खेलती आ रही हैं। अब तक सकीना ने आठ राष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लिया है। सकीना कहती है कि एक ऐसा समय भी आया था जब माँ के सिवा हर किसी ने उनसे मुंह मोड़ लिया था। उन्होंने कहा, "जब मैंने ताइक्वांडो खेलना शुरू किया तो मेरे सब रिश्तेदारों और मेरे भाइयों ने मुझसे मुंह मोड़ लिया था। बस एक माँ थी जो मेरे साथ थी। लेकिन अब सब कहते हैं कि नहीं मेरा फैसला गलत नहीं था।" कश्मीर ताइक्वांडो एसोसिएशन के सेक्रेटरी शुजात शाह कहते हैं कि कश्मीर में हर खेल के लिए लड़कियों के अंदर हुनर मौजूद है।