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UPSC 2017: कश्मीरी टॉपर फजलुल हसीब ने कहा- जिस कुर्सी पर बैठूंगा, उससे कोई इंकलाब ला दूंगा

Tue, 01 May 2018 03:09 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Tue, 01 May 2018 03:09 PM IST
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Kashmir topper of UPSC 2017 Fazlul Haseeb said i will bring change
फजलुल हसीब

जम्मू-कश्मीर से 15 उम्मीदवारों ने 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है, जिनमें श्रीनगर के फजलुल हसीब सबसे ऊपर हैं जिन्हें देशभर की रैंकिंग में 36वां स्थान मिला है। बीते सालों के मुकाबले यह संख्या थोड़ी ज्यादा है। 2016 में कुल 14 उम्मीदवार कामयाब रहे थे। इस साल सफल हुए उम्मीदवारों में जम्मू-कश्मीर की दो युवतियां भी हैं।

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पिछले साल आए परिणामों में राज्य के बिलाल मोहिउद्दीन बट ने देशभर में 10वीं रैंक हासिल की थी, जबकि उससे पहले 2016 में कश्मीरी युवक अतहर आमिर खान दूसरे नंबर पर आए थे। इस बार सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले जम्मू-कश्मीर के पंद्रह उम्मीदवारों में से श्रीनगर के हैदरपुरा के रहने वाले 26 वर्षीय फजलुल हसीब भी शामिल हैं।
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किससे मिली प्रेरणा?

परीक्षा में हसीब के लिए कामयाबी के झंडे गाड़ना कोई आसान काम नहीं था। वह कहते हैं, "मैं इससे पहले भी दो बार 2015 और 2016 में सिविल सेवा परीक्षा में बैठा था, लेकिन मैं सिर्फ प्रीलिम्स ही पास कर पाया। मैंने हिम्मत नहीं हारी। कभी-कभी तो निराश भी होता था, लेकिन मेरे जहन में एक ही बात रहती थी कि मेरे सामने आईएएस जैसा बड़ा लक्ष्य है।" "इसलिए मैं निराशा से खुद को आसानी से निकाल लेता था। इस बात की भी ये उम्मीद थी कि जो कुछ मैं कर रहा हूं, उसका कुछ न कुछ तो मेहनताना मिलेगा ही।"
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ये पूछने पर कि आईएएस बनने का खयाल कहां से आया और उन्हें किनसे प्रेरणा मिली तो वह अपने पिता का नाम लेते हैं। वह कहते हैं, "आईएएस बनने की प्रेरणा मुझे मेरे पिता से मिली। उन्होंने मेरे सपने को मजबूती दी। इसके बाद मैं दिल्ली आ गया और तैयारी शुरू कर दी।" हसीब 2014 में दिल्ली आए थे। उन्होंने स्कूली शिक्षा श्रीनगर के बर्न्हाल स्कूल से पूरी की। इसके बाद हसीब ने जम्मू के मियेट कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

हसीब ने वैकल्पिक विषय के रूप में उर्दू को चुना था। उन्होंने बचपन में उर्दू के मुहावरे और लेखकों को पढ़ा था, जो सिविल सेवा की परीक्षा में उनके काम आए। हसीब कहते हैं, "मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा है कि मैं जिस कुर्सी पर बैठूंगा, उससे कोई इंकलाब ला दूंगा।" हालांकि, वह उम्मीद करते हैं कि वह अपना काम पूरी ईमानदारी से करेंगे और दूसरे ईमानदार लोगों का उन्हें साथ मिलेगा। 

हसीब का मानना है कि शिक्षा एक बुनियादी जरूरत है जो समाज के विकास के लिए जरूरी है। बीबीसी से उन्होंने कहा, "मैं ये नहीं कहता कि शिक्षा से सारे मसले हल हो जाएंगे, पर शिक्षा के जरिए समस्याओं का हल ढूंढा जा सकता है। अगर आप दुनिया का इतिहास उठाकर देखें तो ये बात जाहिर हो जाएगी कि शिक्षा विकास के लिए एक जरूरी तत्व है।"

वह आगे कहते हैं, "ये एक बहुत ही जरूरी बात है। अगर उलझी हुई स्थिति भी हो तो वहां शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी होता है। शिक्षा का कोई मुकाबला नहीं है। बच्चों को चाहिए कि वह हर हाल में शिक्षा हासिल करें। अगर वह शिक्षित नहीं होते हैं तो इसका मतलब है कि उनका भविष्य अंधेरे में होगा।"

तैयारी कैसे करें?

हसीब ने बताया कि इंटरव्यू में उनसे ज्यादातर सवाल करेंट अफेयर्स के पूछे गए थे। कश्मीर के वे बच्चे, जो सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं, हसीब ने सलाह दी है कि सबसे पहले उन्हें यह समझना होगा कि परीक्षा की तैयारी होती क्या है और उसकी पढ़ाई कैसे की जाती है। उन्हें यह तय करना होगा कि उन्हें क्या पढ़ना चाहिए और बाहरी दुनिया से उन्होंने खुद को कैसे जोड़ रखा है।

उन्होंने यह भी सलाह दी है कि तैयारी करने वाले छात्र उनसे ज्यादा बात करें जिन्होंने यह परीक्षा पास कर ली है। साथ ही साथ सकारात्मक सोच न सिर्फ परीक्षा में सफलता दिलाएगी बल्कि जिंदगी की दौड़ में भी आगे रखने में मदद करेगी। हसीब अपने परिवार वालों को धन्यवाद कहा है जिन्होंने उनका हर पल हौसला बढ़ाया।

जम्मू-कश्मीर से जिन दूसरे उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी हासिल की है, उनमें राहुल भट्ट (68), अभिषेक शर्मा (69), अक्षय लबरो (104), सईद इमरान मसूदी (198), श्लेष जैन (259), निबात खालिक (378), सुदर्शन भट्ट (434), हरिस रशीद (487), आमिर बशीर (843), अतुल चौधरी (896), शशांक भारद्वाज (907), मोहम्मद फारूक चौधरी (939), शीतल अंग्राल (945) और विवेक भगत (967) शामिल हैं।


बीते कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर से ऐसे युवा आए हैं, जिन्होंने सिविल सेवा जैसी मुश्किल परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। सिविल सेवा परीक्षा 2009 में कश्मीर के शाह फैसल ने पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त किया था।

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