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करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के दिए आदेश; TVK की याचिका मंजूर, पूर्व जज अजय रस्तोगी करेंगे निगरानी
Mon, 13 Oct 2025 11:11 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:11 AM IST
सार
करूर में अभिनेता-राजनेता विजय के रैली के दौरान भगदड़ में 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस मामले में विजय की पार्टी तमिलागा वेट्री कजगम ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतंत्र जांच की मांग की थी। टीवीके का कहना है कि सिर्फ तमिलनाडु पुलिस की एसआईटी जनता का भरोसा जीतने में सक्षम नहीं होगी।
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करूर हादसे पर 'सुप्रीम' सुनवाई
- फोटो : ANI
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विस्तार
तमिलनाडु के करूर में अभिनेता-राजनेता विजय के रैली के दौरान मची भगदड़ के मामले में TVK ने सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र जांच की याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुनाया और मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि टीवीके ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि भगदड़ की जांच एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में हो, क्योंकि पार्टी का कहना है कि सिर्फ तमिलनाडु पुलिस की तरफ से बनाई गई विशेष जांच दल (एसआईटी) से जनता का भरोसा नहीं बनेगा। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भगदड़ पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने 27 सितंबर को अभिनेता विजय की रैली में हुई भगदड़ से संबंधित याचिकाओं पर विचार करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच का आदेश देने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन सेंथिलकुमार की भी आलोचना की। पीठ ने कहा, 'जब इस घटना की जांच की मांग वाली याचिकाएं मदुरै पीठ के समक्ष लंबित थीं, तब मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बिना मुख्य पीठ के एकल न्यायाधीश के लिए याचिकाओं पर विचार करने का कोई अवसर नहीं था।'
यह भी पढ़ें - केरल की राजनीति में हलचल: BJP नेता सुरेश गोपी ने कही दिल की बात, कहा- अगर पद छोड़ना पड़े तो भी कोई अफसोस नहीं
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यह देखते हुए कि विजय के तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) और उसके सदस्यों को पक्षकार नहीं बनाया गया था, शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ टिप्पणियां की गईं। पीठ ने कहा, 'यह फैसला इस बारे में पूरी तरह से मौन है कि एकल न्यायाधीश इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचे, अदालत ने किन सामग्रियों का अवलोकन किया। उक्त आदेश केवल अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतियों का संदर्भ देता है।'
पूर्व जज अजय रस्तोगी करेंगे निगरानी
वहीं टीवीके की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी को करूर भगदड़ मामले में सीबीआई जांच की निगरानी करने वाली समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। टीवीके के सचिव आधव अर्जुना ने इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने एसआईटी का गठन किया था, जिसे टीवीके ने चुनौती दी थी।
शीर्ष अदालत ने 10 अक्तूबर को विजय की राजनीतिक पार्टी और अन्य की तरफ से दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। टीवीके ने सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिसमें तर्क दिया गया है कि यदि केवल तमिलनाडु पुलिस के अधिकारी ही निष्पक्ष जांच करेंगे तो यह संभव नहीं होगा। टीवीके की याचिका में उच्च न्यायालय की तरफ से केवल तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों के साथ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में पार्टी और अभिनेता-राजनेता के खिलाफ उच्च न्यायालय की इस तीखी टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई गई है कि घटना के बाद वे वहां से चले गए और उन्होंने कोई खेद व्यक्त नहीं किया।
टीवीके के कई सदस्यों पर एफआईआर
भगदड़ के तुरंत बाद विवाद और आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। करूर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर टीवीके के करूर (उत्तर) जिला सचिव माधियाझगन, जनरल सेक्रेटरी बसी आनंद, और ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सीटीआर निर्मल कुमार के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, और अन्य की जान जोखिम में डालना जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस का कहना है कि भगदड़ में कोई खुफिया चूक नहीं हुई। रैली में विजय देर से पहुंचे, और लोग कई घंटे से इंतजार कर रहे थे।
कैसे बेताब हुई भीड़?
पुलिस अधिकारियों ने आयोजकों से कहा था कि विजय की विशेष रैली बस को निर्धारित स्थान से कम से कम 50 मीटर पहले रोक दें। लेकिन आयोजकों ने तय जगह पर ही बस खड़ी की। पुलिस के अनुसार, '10 मिनट तक नेता बस से बाहर नहीं आए, जिससे भीड़ असंतुष्ट हो गई। लोग उन्हें देखने के लिए बेताब थे।'
यह भी पढ़ें - ED: कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई, ईडी ने श्रीसन फार्मा के सात ठिकानों पर की छापेमारी
टीवीके पर शर्तों का पालन न करने का आरोप
बता दें कि, इस रैली के लिए टीवीके ने 10,000 लोगों के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन रैली में लगभग 25000 लोग जमा हो गए। पुलिस ने कहा कि पार्टी ने पर्याप्त पानी, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं नहीं कीं और अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया।
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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने 27 सितंबर को अभिनेता विजय की रैली में हुई भगदड़ से संबंधित याचिकाओं पर विचार करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच का आदेश देने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन सेंथिलकुमार की भी आलोचना की। पीठ ने कहा, 'जब इस घटना की जांच की मांग वाली याचिकाएं मदुरै पीठ के समक्ष लंबित थीं, तब मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बिना मुख्य पीठ के एकल न्यायाधीश के लिए याचिकाओं पर विचार करने का कोई अवसर नहीं था।'
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यह देखते हुए कि विजय के तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) और उसके सदस्यों को पक्षकार नहीं बनाया गया था, शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ टिप्पणियां की गईं। पीठ ने कहा, 'यह फैसला इस बारे में पूरी तरह से मौन है कि एकल न्यायाधीश इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचे, अदालत ने किन सामग्रियों का अवलोकन किया। उक्त आदेश केवल अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतियों का संदर्भ देता है।'
पूर्व जज अजय रस्तोगी करेंगे निगरानी
वहीं टीवीके की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी को करूर भगदड़ मामले में सीबीआई जांच की निगरानी करने वाली समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। टीवीके के सचिव आधव अर्जुना ने इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने एसआईटी का गठन किया था, जिसे टीवीके ने चुनौती दी थी।
शीर्ष अदालत ने 10 अक्तूबर को विजय की राजनीतिक पार्टी और अन्य की तरफ से दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। टीवीके ने सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिसमें तर्क दिया गया है कि यदि केवल तमिलनाडु पुलिस के अधिकारी ही निष्पक्ष जांच करेंगे तो यह संभव नहीं होगा। टीवीके की याचिका में उच्च न्यायालय की तरफ से केवल तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों के साथ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में पार्टी और अभिनेता-राजनेता के खिलाफ उच्च न्यायालय की इस तीखी टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई गई है कि घटना के बाद वे वहां से चले गए और उन्होंने कोई खेद व्यक्त नहीं किया।
टीवीके के कई सदस्यों पर एफआईआर
भगदड़ के तुरंत बाद विवाद और आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। करूर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर टीवीके के करूर (उत्तर) जिला सचिव माधियाझगन, जनरल सेक्रेटरी बसी आनंद, और ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सीटीआर निर्मल कुमार के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, और अन्य की जान जोखिम में डालना जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस का कहना है कि भगदड़ में कोई खुफिया चूक नहीं हुई। रैली में विजय देर से पहुंचे, और लोग कई घंटे से इंतजार कर रहे थे।
कैसे बेताब हुई भीड़?
पुलिस अधिकारियों ने आयोजकों से कहा था कि विजय की विशेष रैली बस को निर्धारित स्थान से कम से कम 50 मीटर पहले रोक दें। लेकिन आयोजकों ने तय जगह पर ही बस खड़ी की। पुलिस के अनुसार, '10 मिनट तक नेता बस से बाहर नहीं आए, जिससे भीड़ असंतुष्ट हो गई। लोग उन्हें देखने के लिए बेताब थे।'
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टीवीके पर शर्तों का पालन न करने का आरोप
बता दें कि, इस रैली के लिए टीवीके ने 10,000 लोगों के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन रैली में लगभग 25000 लोग जमा हो गए। पुलिस ने कहा कि पार्टी ने पर्याप्त पानी, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं नहीं कीं और अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया।