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Karnataka: कर्नाटक से बड़ा संदेश, 2024 में पुरानी पेंशन पर कौन मोल लेगा 10 करोड़ बाबुओं के कुनबे की नाराजगी
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पुरानी पेंशन योजना
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अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बाजी मार ली है। कांग्रेस की जीत में कर्नाटक के सरकारी कर्मियों की एक बड़ी भूमिका रही है। पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा, अब केंद्र या किसी एक राज्य की सीमा से बाहर निकल चुका है। 2024 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन का मुद्दा अपना असर दिखा सकता है।
केंद्र में स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सचिव और 'नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्सन' (एनजेसीए) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा कहते हैं कि देखिये कर्नाटक के रिजल्ट से बड़ा संदेश मिला है। अब देखने वाली बात यह होगी कि 2024 में 'पुरानी पेंशन' पर देश के 10 करोड़ सरकारी बाबुओं के कुनबे की नाराजगी कौन मोल लेगा। हमने यह आंकड़ा केंद्र सरकार को दे दिया है। साथ ही यह भी बता दिया है कि 'जो पुरानी पेंशन बहाल करेगा, वही देश पर राज करेगा।'
शिवगोपाल मिश्रा ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ हुई बातचीत में कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए 'नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्सन' (एनजेसीए) द्वारा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी इस प्लान को आगे बढ़ा रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के कई चरण पूरे हो चुके हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आठ जुलाई को सरकारी कर्मचारी, नई दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचेंगे। सभी राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन होंगे।मानसून सत्र में संसद के बाहर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद एनजेसीए की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय करेंगे। बतौर मिश्रा, इस रणनीति में भारत बंद का आह्वान भी शामिल है।
ऐसे में सरकारी कमेटी पर भरोसा कैसे करें ...
पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारी संगठनों के दबाव के चलते केंद्र सरकार ने एनपीएस में सुधार के लिए कमेटी गठित कर दी। इसी तर्ज पर कई दूसरे भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसी ही कमेटियां बना दी गई। मिश्रा ने कहा कि अब देखिये, इन पर कर्मचारी कैसे भरोसा करें कि ये कमेटियां, कर्मियों के हित में फैसला देंगी।संसद के बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए स्पष्ट शब्दों में ओपीएस को लेकर अपने मन की बात कही थी। पीएम मोदी ने इशारों इशारों में 'पुरानी पेंशन' पर कहा, ऐसा पाप न करें, जो आपके बच्चों का अधिकार छीन ले। उन्होंने आर्थिक संकट में फंसे एक पड़ोसी मुल्क का उदाहरण भी दिया। कुछ राज्य आज उसी राह पर चल रहे हैं। वे तत्कालीन भुगतान के चक्कर में देश को बर्बाद कर देंगे। अपने फैसलों के द्वारा वे आने वाली पीढ़ियों पर भारी बोझ डाल रहे हैं। पीएम ने यह बात ओपीएस को लेकर कही थी।
कर्मियों ने एनपीएस में सुधार की बात नहीं की ...
एक सरकारी कर्मचारी जो तीन दशक से ज्यादा समय तक सेवा देता है, उसे पेंशन नहीं मिल रही। दूसरी ओर, हमारे जनप्रतिनिधि हैं, जिनके दो दिन के कार्यकाल के बाद जीवन भर की सुविधाएं मिल जाती हैं। पुरानी पेंशन बहाल न करने का मतलब, सामाजिक सुरक्षा पर हमला है। केंद्र सरकार से ओपीएस बहाली की मांग की तो एनपीएस सुधार के लिए कमेटी गठित कर दी गई। कर्मियों ने एनपीएस में सुधार की बात कभी नहीं कही। सभी कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है कि एनपीएस की समाप्ति और ओपीएस की बहाली। सभी राज्यों में ओपीएस के लिए विभिन्न मोर्चे तैयार किए गए हैं। एनजेसीए के प्रतिनिधि सभी राज्यों का दौरा करेंगे। 21 जनवरी को दिल्ली में एनपीएस के खिलाफ एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। एनजेसीए के बैनर तले आयोजित उस सम्मेलन में 50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के लगभग 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
एनपीएस में 17 वर्ष बाद मिलती है 4900 रुपये पेंशन ...
पिछले साल एचवीएफ अवाडी (एक आयुध निर्माणी) से रिटायर हुए आर रामचंद्रन को एनपीएस के तहत 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है। उनका मूल वेतन 30500 रुपये था। पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू होती तो उन्हें कम से कम 15250 रुपये की मासिक पेंशन मिलती। के. भास्कर राव, जिनका मूल वेतन 34300 रुपये था। इन्हें 15 साल की सेवा के बाद 2506 रुपये मासिक पेंशन मिली है। पुरानी पेंशन व्यवस्था में उन्हें 17150 रुपये मिलते। एस शिवाशंकरन का मूल वेतन 56900 रुपये था। उन्होंने 17 वर्ष तक नौकरी की है। रिटायरमेंट पर उन्हें 4900 रुपये पेंशन मिली है। अगर वे ओपीएस में होते तो उन्हें 28450 रुपये मिल जाते। शिवगोपाल मिश्रा ने कहा, 2024 के लोकसभा चुनाव में सभी कर्मचारी संगठन लोगों के बीच पहुंचेंगे। जो राजनीतिक पार्टी पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा करेगी, उसे ही दस करोड़ वोट मिलेंगे।