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कर्नाटक: सीजेआई ने पूछा- क्या अदालत के आदेश को स्पीकर दे सकता है चुनौती?

Fri, 12 Jul 2019 02:26 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 12 Jul 2019 02:26 PM IST
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Karnataka Rebel Mlas: Mukul Rohtagi said Speaker is answerable to this court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या विधानसभा अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है। 10 बागी विधायकों के इस्तीफों के मामले में फैसला करने का निर्देश देने के शीर्ष अदालत के गुरुवार के आदेश के खिलाफ कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के. आर. रमेश की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल किया।

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मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ कर्नाटक संकट पर विधान सभा अध्यक्ष और कांग्रेस तथा जेडीएस के बागी विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई की।
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इन बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके इस्तीफा देने के फैसलों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है जबकि इस्तीफों को स्वीकार करने के संबंध में उन्हें कोई छूट नहीं प्राप्त है। विधायकों का तर्क था कि उनके इस्तीफे के मामले को लंबित रखने का मकसद उन्हें पार्टी व्हिप के प्रति बाध्यकारी बनाना है।
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कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष का पद संवैधानिक है और बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए पेश याचिका पर फैसला करने के लिए वह सांविधानिक रूप से बाध्य हैं। इस बीच, न्यायालय ने कर्नाटक युवा कांग्रेस के एक नेता अनिल चाको जोसेफ को इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति प्रदान कर दी। जोसेफ के वकील का कहना था कि असंतुष्ट विधायकों का इस्तीफा दल बदल का हिस्सा है। 


मुख्यमंत्री का आरोप: कर्नाटक विधायकों के इस्तीफे पर अध्यक्ष को नोटिस के बगैर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इन बागी विधायकों की याचिका पर न्यायालय को विचार नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इन विधायकों ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं लेकिन इसके बावजूद उनका पक्ष सुने बगैर ही आदेश पारित किया गया।

धवन ने कहा कि बागी विधायकों में से एक विधायक पर पोंजी योजना में संलिप्त होने का आरोप है और इसके लिए ‘हमारे ऊपर आरोप लगाया जा रहा है’। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को स्वंय को इस तथ्य के बारे में संतुष्ट करना होगा कि इन विधायकों ने स्वेच्छा से इस्तीफे दिए हैं।



उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने जब दूसरे पक्ष को सुने बगैर ही आदेश पारित कर दिया तो ऐसी स्थिति में अध्यक्ष क्या कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल को याचिका की प्रति नहीं दी गई।

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