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Karnataka: भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर मंत्री का अल्टीमेटम, कहा- सबूत दें अन्यथा मानहानि का केस करूंगा
Thu, 25 Aug 2022 09:53 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 25 Aug 2022 09:53 PM IST
सार
मंत्री ने ठेकेदारों के संघ को मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत देने के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत दें अन्यथा एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए माफी मांगें।
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कर्नाटक के बागवानी मंत्री मुनिरत्न
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बागवानी मंत्री मुनिरत्न ने गुरुवार को कहा कि वह कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि और आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराएंगे। ठेकेदार संघ ने सरकार के खिलाफ 40 प्रतिशत कमीशन का आरोप गया है। उन पर पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है।
मंत्री ने संघ को मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत देने के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि वे मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत दें अन्यथा एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए माफी मांगें। उन्होंने आगे कहा कि मामला 7वें दिन के बाद जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में दायर किया जाएगा।
'कार्रवाई किए बिना छोड़ दिया तो गलत संदेश जाएगा'
मुनिरत्न ने कहा, गहरे दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस ठेकेदार संघ का मैं कभी सदस्य था, उसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने की स्थिति आ गयी है। अगर कार्रवाई किए बिना छोड़ दिया गया तो यह राज्य के लोगों में एक गलत संदेश जाएगा।
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यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि लोगों में गलत संदेश जाए, इसलिए वह कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ और उसके सभी पदाधिकारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रहे हैं।
'अदालत के सामने देना होगा सबूत, बदनामी नहीं होने दी जा सकती'
उन्होंने कहा, उन्हें अदालत के सामने आना होगा और सबूत देना होगा कि यह सरकार 40 प्रतिशत कमीशन मांग रही है और खुद को मामले से अलग कर रही है। अगर वे अदालत को सबूत देने में असमर्थ होंगे तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने आगे कहा, अगर हमने कोई गलती की है तो हमें दंडित किया जाना चाहिए, लेकिन आरोपों से बदनामी नहीं होने दी जा सकती।
मुनिरत्न ने कहा कि प्रचार के लिए पत्र लिखने के बजाय आरोपों को जल्द से जल्द साबित करने के लिए सबूत और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए और मंत्रियों, अधिकारियों और राजनेताओं को बेनकाब किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें सात दिनों में लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज की जानी चाहिए, यदि लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज करने या मीडिया के समक्ष जारी करने के लिए कोई सबूत नहीं है, तो उन्हें बुधवार को लगाए गए आरोपों के लिए माफी मांगते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति को जारी करना चाहिए।
मंत्री ने सात दिनों का अल्टीमेटम दिया
उन्होंने आगे कहा, "यदि सात दिनों के बाद भी ऐसा नहीं किया जाता है तो हम दो मामले दर्ज करेंगे- 50 करोड़ रुपये की मानहानि और आपराधिक मानहानि। न केवल केम्पन्ना (ठेकेदार संघ के अध्यक्ष) बल्कि पूरे संघ के खिलाफ।" उनके मुताबिक ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और विपक्ष के नेता सिद्धारमैया के मार्गदर्श में लगाए गए हैं।
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ के अध्यक्ष केम्पन्ना ने बुधवार को एक जिला प्रभारी मंत्री (कोलार जिले के प्रभारी मंत्री मुनिरत्न) पर बिना नाम बताए अधिकारियों से पैसे लेने और उसके लिए धमकी देने का आरोप लगाया था। जिला प्रभारी मंत्री के बारे में पूछे जाने पर केम्पन्ना ने कहा था कि यह कोलार जिले के प्रभारी मंत्री हैं, जिन्होंने पैसा नहीं लेने पर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित करने की धमकी दी। वह अधिकारियों से पैसे इकट्ठा करने और प्राप्त करने के लिए कह रहे हैं।
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मंत्री ने संघ को मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत देने के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि वे मीडिया के सामने या लोकायुक्त को सबूत दें अन्यथा एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए माफी मांगें। उन्होंने आगे कहा कि मामला 7वें दिन के बाद जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में दायर किया जाएगा।
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'कार्रवाई किए बिना छोड़ दिया तो गलत संदेश जाएगा'
मुनिरत्न ने कहा, गहरे दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस ठेकेदार संघ का मैं कभी सदस्य था, उसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने की स्थिति आ गयी है। अगर कार्रवाई किए बिना छोड़ दिया गया तो यह राज्य के लोगों में एक गलत संदेश जाएगा।
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यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि लोगों में गलत संदेश जाए, इसलिए वह कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ और उसके सभी पदाधिकारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रहे हैं।
'अदालत के सामने देना होगा सबूत, बदनामी नहीं होने दी जा सकती'
उन्होंने कहा, उन्हें अदालत के सामने आना होगा और सबूत देना होगा कि यह सरकार 40 प्रतिशत कमीशन मांग रही है और खुद को मामले से अलग कर रही है। अगर वे अदालत को सबूत देने में असमर्थ होंगे तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने आगे कहा, अगर हमने कोई गलती की है तो हमें दंडित किया जाना चाहिए, लेकिन आरोपों से बदनामी नहीं होने दी जा सकती।
मुनिरत्न ने कहा कि प्रचार के लिए पत्र लिखने के बजाय आरोपों को जल्द से जल्द साबित करने के लिए सबूत और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए और मंत्रियों, अधिकारियों और राजनेताओं को बेनकाब किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें सात दिनों में लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज की जानी चाहिए, यदि लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज करने या मीडिया के समक्ष जारी करने के लिए कोई सबूत नहीं है, तो उन्हें बुधवार को लगाए गए आरोपों के लिए माफी मांगते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति को जारी करना चाहिए।
मंत्री ने सात दिनों का अल्टीमेटम दिया
उन्होंने आगे कहा, "यदि सात दिनों के बाद भी ऐसा नहीं किया जाता है तो हम दो मामले दर्ज करेंगे- 50 करोड़ रुपये की मानहानि और आपराधिक मानहानि। न केवल केम्पन्ना (ठेकेदार संघ के अध्यक्ष) बल्कि पूरे संघ के खिलाफ।" उनके मुताबिक ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और विपक्ष के नेता सिद्धारमैया के मार्गदर्श में लगाए गए हैं।
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ के अध्यक्ष केम्पन्ना ने बुधवार को एक जिला प्रभारी मंत्री (कोलार जिले के प्रभारी मंत्री मुनिरत्न) पर बिना नाम बताए अधिकारियों से पैसे लेने और उसके लिए धमकी देने का आरोप लगाया था। जिला प्रभारी मंत्री के बारे में पूछे जाने पर केम्पन्ना ने कहा था कि यह कोलार जिले के प्रभारी मंत्री हैं, जिन्होंने पैसा नहीं लेने पर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित करने की धमकी दी। वह अधिकारियों से पैसे इकट्ठा करने और प्राप्त करने के लिए कह रहे हैं।