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JDS Rift: देवेगौड़ा ने 'बागी' को हटाया, अपदस्थ अध्यक्ष इब्राहिम का दावा- तकनीकी-मानसिक रूप से पार्टी के साथ
Sun, 22 Oct 2023 08:16 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 22 Oct 2023 08:16 PM IST
सार
कर्नाटक की प्रमुख राजनीतिक पार्टी- जेडीएस में फूट की खबरों के बीच पार्टी के अपदस्थ अध्यक्ष सीएम इब्राहिम ने कहा, वे तकनीकी और मानसिक रूप से अभी भी जनता दल सेकुलर (जेडीएस) के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे अभी भी कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष हैं।
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कर्नाटक में जेडीएस नेता सीएम इब्राहिम
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक में जनता दल सेकुलर (जेडीएस) के अपदस्थ अध्यक्ष सीएम इब्राहिम बगावती तेवर दिखा रहे हैं। गत दिनों इन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा से एनडीए का दामन न थामने की अपील की थी। ताजा घटनाक्रम में रविवार को इब्राहिम ने कहा, इस बात पर जोर दिया कि वह "तकनीकी और मानसिक रूप से" अभी भी जनता दल (सेक्युलर) में हैं। उन्होंने कहा कि वे अभी भी राज्य में पार्टी के प्रमुख हैं। उन्होंने पद से हटाए जाने की कार्रवाई को गलत करार दिया।
कुमारस्वामी-इब्राहिम आमने-सामने
इब्राहिम ने ये भी कहा कि वह भविष्य की कार्रवाई पर फैसला करेंगे, जिसमें कानूनी लड़ाई भी शामिल है। बता दें कि 16 अक्टूबर के बयान के बाद उन्हें जेडीएस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से इब्राहिम की सीधी टक्कर हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेगौड़ा के फैसले के खिलाफ जाने वाले इब्राहिम ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
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पूर्व पीएम ने इब्राहिम को हटाकर बेटे को बनाया अध्यक्ष
गौरतलब है कि कि भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले पर जेडी(एस) आलाकमान के फैसले के खिलाफ बोलने वाले इब्राहिम के विद्रोह को पार्टी की शर्मिंदगी का कारण माना जा रहा है। देवेगौड़ा ने गुरुवार को पार्टी की कर्नाटक इकाई को भंग कर इब्राहिम को अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उन्होंने इब्राहिम की जगह पूर्व मुख्यमंत्री और अपने बेटे कुमारस्वामी को जेडीएस का तदर्थ अध्यक्ष (ad-hoc president) नियुक्त किया था।
देवेगौड़ा भाजपा के साथ जाने पर दोबारा विचार करें
इब्राहिम ने कहा, देवेगौड़ा वरिष्ठ नेता हैं। वे एक बार फिर हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध करना चाहते हैं कि वे भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले पर पुनर्विचार करें। उन्होंने दावा किया कि जेडीएस की केरल, तमिलनाडु, राजस्थान इकाई भाजपा के साथ जाने के फैसले के खिलाफ हैं।" उन्होंने गौड़ा से उस विचारधारा के साथ खड़े रहने का आग्रह किया, जिसका पार्टी हमेशा से पालन करती रही है।
कुमारस्वामी बना रहे पिता पर दबाव
अपदस्थ अध्यक्ष इब्राहिम ने कहा, वे राजस्थान के उदयपुर का दौरा कर रहे हैं। इस सप्ताह के अंत में वे जेडीएस नेताओं से मिलने के लिए मुंबई भी जाएंगे। इब्राहिम ने कहा, देवेगौड़ा जानते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री कैसे बनाया गया था। वह जानते हैं कि 1995 में जनता दल का गठन कैसे हुआ था। यह उनके लिए नया नहीं है, वह जानते हैं, लेकिन क्या करना है, इस मुद्दे पर उन पर कुमारस्वामी का दबाव है।
पीएम मोदी और शाह से वैचारिक मतभेद
पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मुखातिब इब्राहिम ने अपील की, "आप एक भाई की तरह हैं...कृपया बीजेपी के साथ जाने पर पुनर्विचार करें, बाबासाहेब अंबेडकर, बसवन्ना और राष्ट्र कवि - पुट्टप्पा (कुवेम्पु) की विचारधाराओं को स्वीकार करें।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति हमारे मन में सम्मान है। निजी तौर पर हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वैचारिक तौर पर हम अलग रास्ते पर हैं।"
भाजपा-जेडीएस के साथ आने की कहानी
बता दें कि इब्राहिम ने जेडीएस नेतृत्व की अवहेलना करते हुए हाल ही में कहा था कि उनके पास जितने जेडीएस नेताओं का समर्थन है, वही "असली जद(एस)" है। गौरतलब है कि पिछले महीने नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक के बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी की बैठक हुई थी। इसके बाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन करने का फैसला किया था।
देवेगौड़ा और जेडीएस दोनों जानते हैं, इब्राहिम नहीं हटेगा
उन्होंने दावा किया कि जेडीएस के कई जिला अध्यक्ष और विधायक उनके संपर्क में हैं। वे संगठन में बिखराव नहीं चाहते इसलिए अभी तक उन्हें बैठक के लिए नहीं बुलाया है। स्थिति अभी तक खराब नहीं हुई है। उनका ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। इब्राहिम के अनुसार, उन्होंने जिला अध्यक्षों और विधायकों से कहा है कि वे जहां हैं वहीं रहें। संसदीय चुनाव मार्च-अप्रैल में हैं। समय आने पर बात करेंगे। बकौल इब्राहिम, "मुझे हटाया नहीं जा सकता, ये बात देवेगौड़ा और कुमारस्वामी जानते हैं। वे पार्टी की राज्य इकाई को भंग नहीं कर सकते। उन्होंने गलत किया है।" उन्होंने कहा, अब भी उम्मीद है कि दोनों चीजों को हमारी विचारधारा के अनुसार सुधारेंगे।
अध्यक्ष को हटाने के नियम
इब्राहिम के अनुसार, जेडीएस चुनाव आयोग के साथ पंजीकृत पार्टी का एक निर्वाचित निकाय है। हमें पार्टी को नियमों के अनुसार चलाना है, न कि किसी की इच्छा के अनुसार। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, मैंने कोर कमेटी का गठन किया और पदाधिकारियों की नियुक्ति की। प्रदेश अध्यक्ष के पास जद (एस) की राज्य इकाई के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति है। अगर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष जेडीएस के संविधान के खिलाफ जाता है, तो दो-तिहाई सदस्यों को नोटिस देना होगा। बैठक बुलाकर उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाना होगा।
पुराने साथी CM सिद्धारमैया के फोन पर क्या बोले?
कानूनी लड़ाई के बारे में इब्राहिम ने कहा, "26 अक्टूबर के बाद देखते हैं। मैं विजयादशमी तक निर्णय का इंतजार करूंगा। मुझे देवेगौड़ा पर भरोसा है, लेकिन फैसला कुमारस्वामी को करना है। मुझे उन पर भरोसा नहीं है।" क्या उन्हें कांग्रेस खासकर अपने पुराने दोस्त और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तरफ से फोन आया है? इस पर इब्राहिम ने कहा, "मुझे हर जगह से फोन आ रहे हैं, लेकिन, फिलहाल न तो सिद्धारमैया ने मुझे फोन किया है, न ही मैंने।
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कुमारस्वामी-इब्राहिम आमने-सामने
इब्राहिम ने ये भी कहा कि वह भविष्य की कार्रवाई पर फैसला करेंगे, जिसमें कानूनी लड़ाई भी शामिल है। बता दें कि 16 अक्टूबर के बयान के बाद उन्हें जेडीएस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से इब्राहिम की सीधी टक्कर हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेगौड़ा के फैसले के खिलाफ जाने वाले इब्राहिम ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
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#WATCH | Bengaluru: Karnataka JD(S) President CM Ibrahim speaks on BJP- JD(S) alliance, says, "I am the state president (of JDS)... We will decide with whom to alliance, except BJP... I will ask him (Kumaraswamy) to come back..." pic.twitter.com/KUiDSU1mHz
— ANI (@ANI) October 16, 2023
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पूर्व पीएम ने इब्राहिम को हटाकर बेटे को बनाया अध्यक्ष
गौरतलब है कि कि भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले पर जेडी(एस) आलाकमान के फैसले के खिलाफ बोलने वाले इब्राहिम के विद्रोह को पार्टी की शर्मिंदगी का कारण माना जा रहा है। देवेगौड़ा ने गुरुवार को पार्टी की कर्नाटक इकाई को भंग कर इब्राहिम को अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उन्होंने इब्राहिम की जगह पूर्व मुख्यमंत्री और अपने बेटे कुमारस्वामी को जेडीएस का तदर्थ अध्यक्ष (ad-hoc president) नियुक्त किया था।
देवेगौड़ा भाजपा के साथ जाने पर दोबारा विचार करें
इब्राहिम ने कहा, देवेगौड़ा वरिष्ठ नेता हैं। वे एक बार फिर हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध करना चाहते हैं कि वे भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले पर पुनर्विचार करें। उन्होंने दावा किया कि जेडीएस की केरल, तमिलनाडु, राजस्थान इकाई भाजपा के साथ जाने के फैसले के खिलाफ हैं।" उन्होंने गौड़ा से उस विचारधारा के साथ खड़े रहने का आग्रह किया, जिसका पार्टी हमेशा से पालन करती रही है।
कुमारस्वामी बना रहे पिता पर दबाव
अपदस्थ अध्यक्ष इब्राहिम ने कहा, वे राजस्थान के उदयपुर का दौरा कर रहे हैं। इस सप्ताह के अंत में वे जेडीएस नेताओं से मिलने के लिए मुंबई भी जाएंगे। इब्राहिम ने कहा, देवेगौड़ा जानते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री कैसे बनाया गया था। वह जानते हैं कि 1995 में जनता दल का गठन कैसे हुआ था। यह उनके लिए नया नहीं है, वह जानते हैं, लेकिन क्या करना है, इस मुद्दे पर उन पर कुमारस्वामी का दबाव है।
पीएम मोदी और शाह से वैचारिक मतभेद
पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मुखातिब इब्राहिम ने अपील की, "आप एक भाई की तरह हैं...कृपया बीजेपी के साथ जाने पर पुनर्विचार करें, बाबासाहेब अंबेडकर, बसवन्ना और राष्ट्र कवि - पुट्टप्पा (कुवेम्पु) की विचारधाराओं को स्वीकार करें।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति हमारे मन में सम्मान है। निजी तौर पर हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वैचारिक तौर पर हम अलग रास्ते पर हैं।"
भाजपा-जेडीएस के साथ आने की कहानी
बता दें कि इब्राहिम ने जेडीएस नेतृत्व की अवहेलना करते हुए हाल ही में कहा था कि उनके पास जितने जेडीएस नेताओं का समर्थन है, वही "असली जद(एस)" है। गौरतलब है कि पिछले महीने नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक के बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी की बैठक हुई थी। इसके बाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन करने का फैसला किया था।
देवेगौड़ा और जेडीएस दोनों जानते हैं, इब्राहिम नहीं हटेगा
उन्होंने दावा किया कि जेडीएस के कई जिला अध्यक्ष और विधायक उनके संपर्क में हैं। वे संगठन में बिखराव नहीं चाहते इसलिए अभी तक उन्हें बैठक के लिए नहीं बुलाया है। स्थिति अभी तक खराब नहीं हुई है। उनका ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। इब्राहिम के अनुसार, उन्होंने जिला अध्यक्षों और विधायकों से कहा है कि वे जहां हैं वहीं रहें। संसदीय चुनाव मार्च-अप्रैल में हैं। समय आने पर बात करेंगे। बकौल इब्राहिम, "मुझे हटाया नहीं जा सकता, ये बात देवेगौड़ा और कुमारस्वामी जानते हैं। वे पार्टी की राज्य इकाई को भंग नहीं कर सकते। उन्होंने गलत किया है।" उन्होंने कहा, अब भी उम्मीद है कि दोनों चीजों को हमारी विचारधारा के अनुसार सुधारेंगे।
अध्यक्ष को हटाने के नियम
इब्राहिम के अनुसार, जेडीएस चुनाव आयोग के साथ पंजीकृत पार्टी का एक निर्वाचित निकाय है। हमें पार्टी को नियमों के अनुसार चलाना है, न कि किसी की इच्छा के अनुसार। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, मैंने कोर कमेटी का गठन किया और पदाधिकारियों की नियुक्ति की। प्रदेश अध्यक्ष के पास जद (एस) की राज्य इकाई के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति है। अगर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष जेडीएस के संविधान के खिलाफ जाता है, तो दो-तिहाई सदस्यों को नोटिस देना होगा। बैठक बुलाकर उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाना होगा।
पुराने साथी CM सिद्धारमैया के फोन पर क्या बोले?
कानूनी लड़ाई के बारे में इब्राहिम ने कहा, "26 अक्टूबर के बाद देखते हैं। मैं विजयादशमी तक निर्णय का इंतजार करूंगा। मुझे देवेगौड़ा पर भरोसा है, लेकिन फैसला कुमारस्वामी को करना है। मुझे उन पर भरोसा नहीं है।" क्या उन्हें कांग्रेस खासकर अपने पुराने दोस्त और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तरफ से फोन आया है? इस पर इब्राहिम ने कहा, "मुझे हर जगह से फोन आ रहे हैं, लेकिन, फिलहाल न तो सिद्धारमैया ने मुझे फोन किया है, न ही मैंने।