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RS: कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, असम को मिली बाढ़ राहत की सबसे ज्यादा धनराशि, राज्यसभा में केंद्र ने दी जानकारी
Wed, 07 Aug 2024 05:33 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 07 Aug 2024 05:33 PM IST
सार
राज्यसभा में केंद्र सरकार ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों, 2022-2024 में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और अमस को सबसे अधिक आवंटन दिया गया है।
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इन राज्यों को मिली बाढ़ राहत की सबसे ज्यादा धनराशि- केंद्र
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल के वायनाड में आए विनाशकारी भूस्खलन के बाद राहत-बचाव कार्य अभी भी जारी है। लेकिन इसे लेकर केंद्र सरकार ने दावा किया कि भूस्खलन को लेकर केरल सरकार को दी गई चेतावनी को नजरअंदाज किया गया था। जिसके बाद तमाम आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
इसी बीच राज्यसभा में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों, 2022-2024 में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और अमस को सबसे अधिक आवंटन दिया गया है। यह धनराशि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए दी गई।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी जानकारी
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में कहा कि केंद्र की उच्च स्तरीय समिति ने कर्नाटक के लिए 941 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और असम के लिए 2022-24 में बाढ़ और भूस्खलन के लिए 873 करोड़ रुपये और 594 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में तमिलनाडु को बाढ़ और चक्रवात के लिए 276 करोड़ रुपये, सिक्किम को बाढ़ और भूस्खलन के लिए 267 करोड़ रुपये और नागालैंड को 68 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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नुकसान का आकलन करने के लिए आईएमसीटी गठित
मंत्री ने कहा कि 2024-25 (31 जुलाई, 2024 तक) के दौरान, मिजोरम और मणिपुर में चक्रवाती तूफान रेमल, असम में बाढ़ और भूस्खलन और केरल में भूस्खलन के कारण हुए नुकसान का मौके पर आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) गठित किए गए हैं। मिजोरम और मणिपुर ने एनडीआरएफ से क्रमशः 216.73 करोड़ और 711.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए ज्ञापन प्रस्तुत किए हैं।
उन्होंने कहा, एनडीआरएफ से अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर स्थापित प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाता है। इसके अलावा, राज्य एनडीआरएफ से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग करते हुए अपना ज्ञापन तैयार करते समय आम तौर पर अयोग्य मदों को शामिल करते हैं और निर्धारित मानदंडों से परे व्यय का आकलन करते हैं।
'राज्य की मांगों और केंद्र की स्वीकृति में भिन्नता'
नित्यानंद राय ने बताया कि एनडीआरएफ के तहत धनराशि तत्काल राहत के लिए प्रदान की जाती है, न कि दीर्घकालिक पुनर्वास और पुनर्वास कार्यों के लिए। यही कारण है कि राज्यों की तरफ से प्रस्तुत मांगों और केंद्र सरकार की तरफ से स्वीकृत राशि में भिन्नता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) का आवंटन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत समय-समय पर गठित वित्त आयोगों की सिफारिशों पर आधारित है।
गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है सहायता का वितरण
इसके अलावा, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ से सहायता का वितरण दिशानिर्देशों और सहायता के मदों और मानदंडों की तरफ से नियंत्रित होता है, जो राज्यों समेत सभी हितधारकों के परामर्श से तैयार किए जाते हैं और ये गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार दिशानिर्देशों की शर्तों को पूरा करने के अधीन स्थापित प्रक्रिया के अनुसार दो बराबर किस्तों (1 जून और 2 दिसंबर) में राज्य सरकारों को एसडीआरएफ का अपना हिस्सा जारी करती है।
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इसी बीच राज्यसभा में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों, 2022-2024 में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और अमस को सबसे अधिक आवंटन दिया गया है। यह धनराशि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए दी गई।
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी जानकारी
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में कहा कि केंद्र की उच्च स्तरीय समिति ने कर्नाटक के लिए 941 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और असम के लिए 2022-24 में बाढ़ और भूस्खलन के लिए 873 करोड़ रुपये और 594 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में तमिलनाडु को बाढ़ और चक्रवात के लिए 276 करोड़ रुपये, सिक्किम को बाढ़ और भूस्खलन के लिए 267 करोड़ रुपये और नागालैंड को 68 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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नुकसान का आकलन करने के लिए आईएमसीटी गठित
मंत्री ने कहा कि 2024-25 (31 जुलाई, 2024 तक) के दौरान, मिजोरम और मणिपुर में चक्रवाती तूफान रेमल, असम में बाढ़ और भूस्खलन और केरल में भूस्खलन के कारण हुए नुकसान का मौके पर आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) गठित किए गए हैं। मिजोरम और मणिपुर ने एनडीआरएफ से क्रमशः 216.73 करोड़ और 711.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए ज्ञापन प्रस्तुत किए हैं।
उन्होंने कहा, एनडीआरएफ से अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर स्थापित प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाता है। इसके अलावा, राज्य एनडीआरएफ से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग करते हुए अपना ज्ञापन तैयार करते समय आम तौर पर अयोग्य मदों को शामिल करते हैं और निर्धारित मानदंडों से परे व्यय का आकलन करते हैं।
'राज्य की मांगों और केंद्र की स्वीकृति में भिन्नता'
नित्यानंद राय ने बताया कि एनडीआरएफ के तहत धनराशि तत्काल राहत के लिए प्रदान की जाती है, न कि दीर्घकालिक पुनर्वास और पुनर्वास कार्यों के लिए। यही कारण है कि राज्यों की तरफ से प्रस्तुत मांगों और केंद्र सरकार की तरफ से स्वीकृत राशि में भिन्नता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) का आवंटन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत समय-समय पर गठित वित्त आयोगों की सिफारिशों पर आधारित है।
गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है सहायता का वितरण
इसके अलावा, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ से सहायता का वितरण दिशानिर्देशों और सहायता के मदों और मानदंडों की तरफ से नियंत्रित होता है, जो राज्यों समेत सभी हितधारकों के परामर्श से तैयार किए जाते हैं और ये गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार दिशानिर्देशों की शर्तों को पूरा करने के अधीन स्थापित प्रक्रिया के अनुसार दो बराबर किस्तों (1 जून और 2 दिसंबर) में राज्य सरकारों को एसडीआरएफ का अपना हिस्सा जारी करती है।