{"_id":"62446fc859c637023320d265","slug":"karnataka-high-court-wife-seeking-separate-house-cannot-be-a-ground-for-divorce","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला: पत्नी का अलग घर मांगना तलाक का आधार नहीं हो सकता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला: पत्नी का अलग घर मांगना तलाक का आधार नहीं हो सकता
Wed, 30 Mar 2022 08:27 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 30 Mar 2022 08:27 PM IST
सार
याचिकाकर्ता पति का कहना है कि उसकी पत्नी साल 2017 में उसके बच्चे को लेकर घर से चली गई थी और फिर वापस नहीं आई।
विज्ञापन
अदालत का फैसला
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पत्नी का अलग घर मांगना या अपनी मां या बहन से बिना बताए मिलने जाना तलाक का आधार नहीं हो सकता। कर्नाटक हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अलग घर मांगना या मां-बहन के घर मिलने जाना क्रूरता नहीं है।
विज्ञापन
जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वनाथ शेट्टी की बेंच ने ये फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट में पारिवारिक कलह को लेकर अर्जी दी थी। याचिकाकर्ता पति के मुताबिक, साल 2002 में उसकी शादी हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही ही उसकी पत्नी अलग घर की मांग करने लगी। वह अपनी विधवा मां और छोटे भाई के साथ रहना चाहता है और उन दोनों की जम्मेदारी उसके कंधे पर है।
विज्ञापन
पति का कहना है कि मां और भाई की जिम्मेदारी के चलते वो अपनी पत्नी की अलग घर की मांग नहीं मान सकता। पति का ये भी कहना है कि उसकी पत्नी बिना उसकी मां और भाई को बताए बार-बार अपनी मां और बहन के घर चली जाती है। पति के मुताबिक उसकी इन्हीं आदतों के चलते उसकी जिंदगी तबाह हो गई है। पति का कहना है कि उसकी पत्नी साल 2017 में उसके बच्चे को लेकर घर से चली गई थी और फिर वापस नहीं आई।
विज्ञापन
बाद में उसकी पत्नी ने उसके और उसके परिवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-A, 323, 504, 506 के अलावा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत उसके खिलाफ केस दर्ज करवाया। हालांकि पुलिस जांच में पति और उसके परिवार वाले इन मामलों में निर्दोष पाए गए।