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HC: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की मंजूरी, कर्नाटक हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को सौंपी जिम्मेदारी

Sat, 12 Nov 2022 07:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 12 Nov 2022 07:57 PM IST
सार

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि अस्पताल राज्य की कीमत पर अपने अस्पताल में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रुल्स, 1971 के तहत प्रक्रिया को तुरंत पूरा करेगा। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसी प्रक्रिया के लिए किसी भी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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Karnataka High Court says Doctor deciding authority to terminate 25-week pregnancy of teen rape victim
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 13 साल की बलात्कार पीड़िता के 25 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने के लिए बेंगलुरू के एक सरकारी अस्पताल को अनुमति दे दी है। अदालत ने इस मामले में यह भी कहा है कि पीड़िता की जांच करने और डॉक्टरों द्वारा निर्णायक प्राधिकारी के रूप में यह तय करने कि गर्भ समाप्त करने की प्रक्रिया में उसकी जान को कोई खतरा नहीं होगा, के बाद गर्भ को को समाप्त किया जा सकता है। अब इस मामले में पूरी जिम्मेदारी डॉक्टर्स के पास आ गई है।     

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कहा "प्रक्रिया डॉक्टर की आगे की परीक्षा के अधीन है, जिसे ऐसी प्रक्रिया करनी है और यदि डॉक्टर की राय में इस तरह की प्रक्रिया से याचिकाकर्ता के जीवन को नुकसान या चोट लग सकती है तो डॉक्टर अंतिम निर्णय लेने वाला प्राधिकारी होगा।"
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जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि अस्पताल राज्य की कीमत पर अपने अस्पताल में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रुल्स, 1971 के तहत प्रक्रिया को तुरंत पूरा करेगा। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसी प्रक्रिया के लिए किसी भी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है, तो मामले में भविष्य के डीएनए परीक्षण के लिए भ्रूण को संरक्षित किया जाएगा। भ्रूण का नमूना अस्पताल द्वारा बेंगलुरु या हैदराबाद में केंद्रीय फोरेंसिक परीक्षण प्रयोगशाला को संरक्षण के लिए भेजा जाएगा।
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गौरतलब है कि मई 2022 में पीड़िता के साथ दुष्कर्म हुआ था। जिसके बाद पीड़िता ने अपनी मां के माध्यम से एक याचिका के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अब अदालत ने यह आदेश दिया है। 

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