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Karnataka: स्पेशल कोर्ट में न्यायाधीश हुंगुंड की नियुक्ति से जुड़ी याचिका का निपटारा, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

Fri, 05 Jan 2024 04:56 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: आदर्श शर्मा Updated Fri, 05 Jan 2024 04:56 PM IST
सार

कर्नाटक भूमि कब्जा निषेध विशेष अदालत के न्यायिक सदस्य के रूप में न्यायाधीश सीजी हुंगुंड की नियुक्ति को चुनौती वाली याचिका वापस ले ली गई।  मेमो को रिकॉर्ड पर रखते हुए 
कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया हैं। 

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Karnataka High Court disposes petition challenging appointment of judge as special court judicial member
कर्नाटक हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शुक्रवार को कर्नाटक भूमि कब्जा निषेध विशेष अदालत में न्यायाधीश सीजी हुंगुंड की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका का कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निपटारा कर दिया हैं। याचिकाकर्ता द्वारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद मामले का निपटारा कर दिया गया हैं। मेमो को रिकॉर्ड पर रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
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आगे बढ़ने की अब जरूरत नहीं- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष दायर ज्ञापन में कहा कि राज्य सरकार ने हुंगुंड को पद से हटा दिया है और इसलिए याचिका पर आगे बढ़ना जरूरी नहीं है। याचिकाकर्ता उमापति ने मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ के समक्ष दायर अपने ज्ञापन में कहा कि रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान सरकार ने अपने आदेश दिनांक 21.09.2023 द्वारा चौथे प्रतिवादी को न्यायिक सदस्य के पद से हटाने का आदेश जारी किया है। आगे कहा गया कि याचिका में मांगी गई राहत पूरी हो गई है और मामले को न्याय और समानता के हित में निपटाया हुआ माना जा सकता है।
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याचिका में नियुक्त आदेश को दी गई थी चुनौती
अधिवक्ता उमापति एस द्वारा दायर जनहित याचिका में नियुक्ति आदेश दिनांक 21.10.2022 को चुनौती देते हुए दावा किया गया कि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश पद के लिए अयोग्य थे। यह दावा किया गया था कि चूंकि हुंगुंड पहले ही 2012 और 2017 के बीच कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं, इसलिए उन्हें किसी अन्य अर्ध न्यायिक मंच पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति एमजीएस कमल की खंडपीठ ने इस संबंध में पहले अगस्त 2023 में सरकार को नोटिस जारी किया था।
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