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Karnataka: बंगलूरू अधिवक्ता संघ में आरक्षण की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- शीर्ष अदालत में जा सकते हैं

Sun, 02 Feb 2025 02:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 02 Feb 2025 02:38 AM IST
सार

न्यायमूर्ति आर. देवदास ने अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग अधिवक्ता फाउंडेशन, कर्नाटक एससी/एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक अधिवक्ता संघ द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपना मामला सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की सलाह दी। 

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Karnataka High Court dismisses appeal for SC/ST OBC reservation in Bangalore Advocates Association
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को बंगलूरू अधिवक्ता संघ (एएबी) की गवर्निंग काउंसिल में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की अपील करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

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न्यायमूर्ति आर. देवदास ने अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग अधिवक्ता फाउंडेशन, कर्नाटक एससी/एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक अधिवक्ता संघ द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपना मामला सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की सलाह दी। 
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याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए एएबी की गवर्निंग काउंसिल में जाति-आधारित आरक्षण का अनुरोध किया था, जिसमें गवर्निंग काउंसिल में महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण अनिवार्य किया गया था। 
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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को किया स्पष्ट
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी किया गया था, जो उसे पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की विशेष शक्तियां प्रदान करता है।

चूंकि एएबी के उपनियमों में वर्तमान में जाति-आधारित आरक्षण शामिल नहीं है, इसलिए न्यायालय ने कहा कि वह इस तरह का निर्देश देने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की चिंता को स्वीकारा
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस चिंता को स्वीकार किया कि एएबी में कभी भी एससी/एसटी या ओबीसी पदाधिकारी नहीं रहा है। अदालत ने इस तर्क पर भी ध्यान दिया कि एएबी ने पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया है, इसलिए उसे हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए भी ऐसे उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। 

एएबी में बार के सदस्य शामिल: अदालत
अदालत ने कहा कि एएबी में बार के सदस्य शामिल हैं और इसे राज्य से धन प्राप्त होता है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क किया कि जब एसोसिएशन ने महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया, तो इसने सभी सांविधानिक रूप से अनिवार्य आरक्षणों को लागू करने का द्वार खोल दिया, चाहे वे जाति-आधारित हों या लिंग आधारित। 


सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी करने से परहेज
हालांकि, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के एएबी के निर्णय पर टिप्पणी करने से परहेज किया। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं को लगता है कि वे समान लाभों के हकदार हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। 

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