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High Court: तंबाकू पर GST और उत्पाद शुल्क लगा सकती है सरकार, HC ने चुनौती देने वाली याचिका की खारिज

Wed, 05 Oct 2022 11:47 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Wed, 05 Oct 2022 11:47 PM IST
सार

न्यायमूर्ति एम आई अरुण ने हाल के फैसले में कहा, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाना सार्वजनिक नीति का मामला है और रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए यह अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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Karnataka High court Both GST and Excise duty can be imposed on tobacco
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के साथ-साथ उत्पाद शुल्क लगा सकती है। कोर्ट ने तंबाकू निर्माताओं की तरफ से चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। 
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न्यायमूर्ति एम आई अरुण ने हाल के फैसले में कहा, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाना सार्वजनिक नीति का विषय है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। सीजीएसटी स्वयं तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर कर लगाने के अलावा उत्पाद शुल्क लगाने पर विचार करता है। हाईकोर्ट की धारवाड़ पीठ केंद्रीय वित्त मंत्रालय और सीजीएसटी तथा केंद्रीय उत्पादशुल्क के संयुक्त आयुक्त के आदेश के खिलाफ तंबाकू उत्पादकों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। संयुक्त आयुक्त ने 25 मार्च 2021 को बेलागावी क्षेत्र में बनने और बिकने वाले तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क तथा राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) लगाने का आदेश जारी किया।
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सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज (जीएसटी) एक्ट 2017 से पहले तंबाकू उत्पादों पर सेंट्रल एक्साइज एक्ट के साथ सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट के तहत टैक्स लगता था। संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में शामिल वस्तुओं को छोड़कर केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम को निरस्त कर दिया गया था। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि आबकारी अधिनियम को निरस्त कर दिया गया था। तंबाकू और तंबाकू उत्पादों को संविधान की सातवीं अनुसूची में प्रविष्टि 84 के तहत जोड़ा गया था। इस प्रकार सीजीएसटी अधिनियम 2017 के प्रावधानों के तहत कर लगाने के अलावा उत्पाद शुल्क लगाया जा सकता है। याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बेहतर स्पष्टीकरण के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संदर्भ दिया गया है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम को निरस्त करने से सातवीं अनुसूची के तहत निर्धारित एनसीसीडी का भुगतान करने वाले याचिकाकर्ता दोषमुक्त नहीं होते हैं।


 
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