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Karnataka: महिला की शिकायत- ज्योतिषी ने की छेड़छाड़ तो पति ने चुप रहने को कहा, HC का मुकदमा रद्द करने से इनकार
Tue, 03 Sep 2024 04:18 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 03 Sep 2024 04:18 PM IST
सार
Karnataka: आरोप है कि ज्योतिषी ने महिला की कुंडली को ठीक करने के नाम पर पूजा करने की आड़ में उसे गलत तरीके से छुआ। वहीं, महिला के पति पर भी आरोप है कि उसने ज्योतिषी को नहीं रोका और अपनी पत्नी को घटना का खुलासा न करने की धमकी दी।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कथित छेड़छाड़ के मामले में एक ज्योतिषी और एक महिला के पति खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। याचिका दीपा दर्शन एच.पी (पति) और मोहनदास उर्फ शिवरामू (ज्योतिषी) की ओर से दायर की गई थी। याचिका में उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत उनके खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने की मांग की थी।
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उनके खिलाफ धारा 498 ए (किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार द्वार उनके साथ क्रूरता करना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना), 354 ए (यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लिए सजा) और 508 (व्यक्ति को यह भरोसा दिलाना कि उसे दैवीय अप्रसन्नता का पात्र बनाया जाएगा) के तहत मामला दर्ज है।
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ज्योतिषी और महिला के पति पर क्या हैं आरोप
आरोप है कि ज्योतिषी ने महिला की कुंडली को ठीक करने के नाम पर पूजा करने की आड़ में उसे गलत तरीके से छुआ। महिला के पति पर भी आरोप है कि उसने अपनी पत्नी को घटना का खुलासा न करने की धमकी दी। पति ही महिला को ज्योतिषी के पास लेकर आया था।
पति ने कोर्ट में दी ये दलील
पति ने दलील दी कि आईपीसी की धारा 498 ए के तहत 2018 में उसके खिलाफ पहले एक शिकायत दर्ज की गई थी और 2019 में दर्ज की गई शिकायत में भी उसी तरह के आरोप हैं।
महिला ने कहा- आरोप पिछले मामले से अलग
पति ने यह भी दावा किया कि वह 208 से अपनी पत्नी (शिकायतकर्ता) से अलग रह रहा है,इसलिए नई शिकायत का कोई आधार नहीं है। इसके अलावा, तलाक के लिए एक याचिका यहां की पारिवारिक अदालत में लंबित है। हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि मौजूदा मामले में आरोप पिछले मामले से अलग हैं।
अदालत ने मुकदमा रद्द करने से किया इनकार
दूसरे आरोपी ज्योतिषी पर एक एक अनुष्ठान करने के बहाने शिकायतकर्ता से छेड़छाड़ करने का आरोप है। जबकि पति ने कथित तौर पर उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। यहां तक कि शिकायतकर्ता को विरोध न करने की धमकी भी दी। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती।