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Karnataka: नागमंगला में पुरातत्व स्थल के आसपास अतिक्रमण हटाने का आदेश, कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

Sun, 19 Nov 2023 01:52 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: आदर्श शर्मा Updated Sun, 19 Nov 2023 01:52 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को मांड्या के उपायुक्त को दो सप्ताह के भीतर सार्वजनिक कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। नागमंगला में पुरातत्व स्थल के आसपास अतिक्रमण को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट बेहद नाराज है। जनहित याचिका में कहा गया है कि अधिनियम के मुताबिक संरक्षित पुरातत्व स्मारक से 200 मीटर की दूरी पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है।

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Karnataka HC orders removal of encroachments around archeological site in Nagamangala
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नागमंगला में पुरातत्व स्थल के आसपास अतिक्रमण को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट बेहद नाराज है। अधिकारियों की निष्क्रियता पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने मांड्या के उपायुक्त को नागमंगला में सौम्यकेशव मंदिर के आसपास अनधिकृत और अवैध निर्माणों को जारी किए गए नोटिसों का पालन करने और उन्हे कानूनी रुप से हटाने का निर्देश दिया है। 
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दो न्यायाधीश की खंडपीठ ने शनिवार को मांड्या के उपायुक्त को दो सप्ताह के भीतर सार्वजनिक कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। इस दौरान पीठ ने कहा, अवैध अतिक्रमण को चार सप्ताह के भीतर हटाया जाए। बता दें इस पुरातत्व स्थल के आसपास कुल 1,566 निर्माण पाए गए। अब अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि इनमें से कौन से निर्माण अवैध है।
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नागमंगला के निवासी बीवी लोकेश और वसंत कुमार द्वारा 2015 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम के उल्लंघन में मंदिर से 120 मीटर के भीतर एक जामा मस्जिद का निर्माण किया गया था। होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा 12वीं शताब्दी में बनाया गया यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत एक संरक्षित स्मारक है।
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जनहित याचिका में कहा गया है कि अधिनियम के मुताबिक संरक्षित पुरातत्व स्मारक से 200 मीटर की दूरी पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। इस वर्ष नौ अक्तूबर को पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा उनकी उपस्थिति का आदेश दिए जाने के बाद मांड्या के जिलाधिकारी  शनिवार को अदालत में पेश हुए।


अक्तूबर 2023 में हाईकोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्य से तीन साल की अवधि के बाद भी इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है, सिवाय अधिकारियों के बीच पत्राचार है। ऐसा लगता है कि मामले में वास्तविक प्रगति किए बिना अधिकारी केवल कागजी घोड़ों की सवारी करके खुश हैं।
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