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Karnataka: बरसाती नाले की निगरानी के लिए पैनल गठित करने के आदेश, हाईकोर्ट ने कही यह बात

Fri, 08 Dec 2023 10:52 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: आदर्श शर्मा Updated Fri, 08 Dec 2023 10:52 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बरसाती नाले की निगरानी के लिए पैनल गठित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि बृहद बंगलूरू महानगर पालिका(बीबीएमपी) को एक विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण करना चाहिए। 
 

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Karnataka HC orders formation of panel for constant monitoring of storm water drains in Bengaluru
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बंगलूरू में बरसाती नालों की लगातार निगरानी के लिए एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान आदेश दिए हैं। 
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साथ ही कहा कि बृहद बंगलूरू महानगर पालिका(बीबीएमपी) को एक विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण करना चाहिए। यदि जरूरत हो तो नए बरसाती नालों (एसडब्लूडी) के गठन के लिए भूमि अधिग्रहण करना चाहिए। हाईकोर्ट की एकल पीठ का आदेश एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं पर आया।
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कपंनी ने एसडब्ल्यूडी के अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए बीबीएमपी द्वारा जारी किए गए नोटिसों को चुनौती दी थी। वहीं हाईकोर्ट ने नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि बीबीएमपी के पास मामले पर ठोस दस्तावेज नहीं है।  वहीं बृहद बंगलूरू महानगर पालिका(बीबीएमपी) के वकील ने कहा कि यह हिस्सा जल मार्ग था। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही यह जल मार्ग था, जिसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खरब भूमि के रूप में वगीकृत किया गया था। इसे रिकॉर्ड में बी-खरब भूमि के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं था। 
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इसके अलावा, निर्माण के लिए कंपनी को दी गई योजना की मंजूरी से पहले बीबीएमपी के एसडब्ल्यूडी विभाग के मुख्य अभियंता द्वारा एक निरीक्षण किया गया था। 23 नवंबर को अपने फैसले में न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ ने कहा, यह बीबीएमपी का काम है कि वह पानी की रुकावट के कारण का पता लगाने के लिए क्षेत्र में और उसके आसपास के सभी तूफानी जल नालों का विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण करें।


कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 के मुताबिक कि खुली भूमि का कोई भी हिस्सा जिसका उपयोग भूमि सर्वेक्षण के दौरान खेती या खेती के लिए नहीं किया जा सकता है, उसे खरब भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
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