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Karnataka HC: हाईकोर्ट का आदेश- एप आधारित ऑटो रिक्शा सेवाओं के लिए 15 दिन के भीतर किराया तय करे राज्य सरकार
Fri, 14 Oct 2022 09:14 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 14 Oct 2022 09:14 PM IST
सार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य की बोम्मई सरकार को पंद्रह दिनों के भीतर एप-आधारित ऑटो-रिक्शा सेवाओं के लिए किराया तय करने का निर्देश दिया।
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कर्नाटक हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य की बोम्मई सरकार को पंद्रह दिनों के भीतर एप-आधारित ऑटो-रिक्शा सेवाओं के लिए किराया तय करने का निर्देश दिया। इससे पहले बीते हफ्ते अधिकारियों ने उबर, रैपिडो और ओला जैसे ऑनलाइन एग्रीगेटर्स को तुरंत अपनी सेवाएं बंद करने का आदेश दिया था।
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सरकार ने दी थी एग्रीगेटर्स को चेतावनी
इन एग्रीगेटर्स को चेतावनी दी गई थी कि अगर किसी ऑटो-रिक्शा को आदेश का उल्लंघन करते पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने तर्क दिया था कि 2016 में 'कर्नाटक ऑन डिमांड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर रूल्स' के तहत जारी लाइसेंस में ऑटो-रिक्शा को कवर नहीं किया गया था।
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सरकार के आदेश को इन दो कंपनियों ने दी चुनौती
सरकार के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गईं थीं। एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड अदालत में सरकार के आदेश को चुनौती दी थी।
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'एक समझौते पर पहुंचें अधिकारी व कंपनियां'
गुरुवार को याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एम.जी.एस. कमल ने सुनवाई की और सुझाव दिया कि अधिकारी और कंपनियां एक समझौते पर पहुंचें और एक कॉमन सबमिशन करें। सरकार एग्रीगेटर्स से बात करने को राजी हो गई थी।
'पंद्रह दिन के भीतर किराया तय करे सरकार'
शुक्रवार को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार पंद्रह दिनों के भीतर किराया तय करे और सभी हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक किराया तय नहीं हो जाता, तब तक एग्रीगेटर्स के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई।