{"_id":"63f66e196d7a141c9c0afaf4","slug":"karnataka-govt-files-objections-in-panchamasali-reservation-pil-latest-news-update-2023-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnataka: कर्नाटक सरकार ने पंचमसाली आरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर आपत्ति दर्ज की, की यह मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Karnataka: कर्नाटक सरकार ने पंचमसाली आरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर आपत्ति दर्ज की, की यह मांग
Thu, 23 Feb 2023 01:03 AM IST
अभिषेक दीक्षित
पीटीआई, बेंगलुरु
पीटीआई, बेंगलुरु
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 23 Feb 2023 01:03 AM IST
सार
जनहित याचिका राघवेंद्र डीजी की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार लिंगायत जाति के पंचमसाली समुदाय को आरक्षण की 2ए श्रेणी में शामिल कर सकती है।
विज्ञापन
Karnataka High Court
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अंतरिम रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में आरक्षण की 2ए श्रेणी में लिंगायतों के बीच पंचमसाली समुदाय को शामिल करने के संबंध में कहा गया था। सरकार ने तर्क दिया कि याचिका प्रीमैच्योर यानी बिना पुख्ता तैयारी के दायर की गई है और सरकार की ओर से इस पर कोई फैसला भी नहीं किया गया है। ऐसे में इस याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने किया यह दावा
जनहित याचिका राघवेंद्र डीजी की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार लिंगायत जाति के पंचमसाली समुदाय को आरक्षण की 2ए श्रेणी में शामिल कर सकती है। चूंकि इस तरह के अनुरोध को आयोग ने खुद 2000 में ही खारिज कर दिया था। ऐसे में कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि वह सरकार को ऐसा करने से रोके।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने अंतरिम रिपोर्ट पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट की एक प्रति कोर्ट को सौंपी गई थी। अब मामले में एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट प्रतिमा होनापुरा ने चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी के आधार पर आपत्तियां दर्ज कराईं।
विज्ञापन
सरकार की ओर से दी गई यह दलील
आपत्तियों में कहा गया है कि वर्तमान रिट याचिका में कोई सार्वजनिक हित नहीं है। इसे खारिज करने की सख्त जरूरत है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के जनहित नियमों का पालन भी नहीं किया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि संविधान के अनुच्छेद 15 (4) के अनुसार राज्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिकों के पक्ष में जरूरत के हिसाब प्रावधान कर सकता है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि मंडल आयोग के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकार अपनी कार्यकारी कार्रवाई के माध्यम से निर्धारित कर सकती है कि नागरिकों की किस श्रेणी को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिकों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।