Karnataka: पुलिस ने हिंदी समाचार चैनल-सलाहकार संपादक के खिलाफ दर्ज की FIR, गलत सूचना फैलाने का लगाया आरोप
Karnataka: कर्नाटक पुलिस ने एक हिंदी समाचार चैनल और उसके सलाहकार संपादक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर राज्य सरकार की वाणिज्यिक वहन सब्सिडी योजना के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप है।
विस्तार
कर्नाटक पुलिस ने एक हिंदी समाचार चैनल और उसके सलाहकार संपादक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर राज्य सरकार की वाणिज्यिक वहन सब्सिडी योजना के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम (केएमडीसी) के सहायक प्रशासक शिवकुमार की शिकायत के बाद चैनल और उसके सलाहकार संपादक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान) और 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ता ने सलाहकार संपादक पर निगम द्वारा दी गई योजना के बारे में झूठी खबरें फैलाने और राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वहीं, प्राथमिकी पर प्रतिक्रिया देते हुए चैनल के सलाहकार संपादक ने कहा कि वह इसके खिलाफ अदालत में लड़ने के लिए तैयार हैं।
चैनल के सलाहकार संपादक ने क्या दी प्रतिक्रिया
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बारे में जानकारी मिली। इस सवाल का जवाब एफआईआर? वह भी गैर जमानती धाराओं के साथ। यानी गिरफ्तारी की पूरी तैयारी। मेरा सवाल था कि आत्मनिर्भर सारथी योजना में हिंदू समुदाय को शामिल क्यों नहीं किया गया? इस लड़ाई के लिए भी मैं तैयार हूं। अब अदालत में मिलेंगे।'
प्राथमिकी में क्या कहा गया
प्राथमिकी के मुताबिक, 11 सितंबर को एक समाचार कार्यक्रम में सलाहकार संपादक ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार इस योजना को प्रदान कर रही है जो केवल अल्पसंख्यकों को लाभ देती है, न कि गैर-अल्पसंख्यक हिंदुओं को। यह राज्य में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे हिंदुओं के साथ अन्याय हो रहा है।
इसमें कहा गया है, 'इस तरह की खबरें प्रकाशित कर हिंदुओं और अन्य धर्मों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है। यह अशांति का माहौल बनाने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने का भी प्रयास है। वह जो बयान दे रहे हैं, उससे पूरी तरह अवगत होने के बावजूद इस तरह की खबरें प्रकाशित करके वह राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं।'
कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम ने भी जारी किया बयान
केएमडीसी ने भी योजना के बारे में एक बयान जारी किया और आरोप लगाया कि चैनल ने खबर को तोड़-मरोड़कर पेश किया। बयान के अनुसार, केएमडीसी बेरोजगार युवाओं को ऑटोरिक्शा, सामान और टैक्सी खरीदने के लिए 50 फीसदी या तीन लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रहा है। इसके अलावा, देवराज उर्स विकास निगम, डॉ बी आर अंबेडकर विकास निगम, वाल्मीकि विकास निगम और आदि जम्भव विकास निगम द्वारा इसी तरह की कई योजनाएं लागू की गई हैं।
उन्होंने कहा, 'ये योजनाएं न केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लिए थीं, बल्कि पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी थीं। यह हिंदू समुदाय के बेरोजगार युवाओं के लिए भी उपलब्ध थी। इन योजनाओं को मौजूदा कांग्रेस सरकार ने नहीं बल्कि पिछली भाजपा सरकार ने लागू किया था।'