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Karnataka Results: कांग्रेस की जीत के पांच चेहरे, पर्दे के पीछे से चुपचाप भाजपा को दी पटखनी
Sat, 13 May 2023 04:42 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 13 May 2023 04:42 PM IST
सार
दो बड़े लिंगायत नेताओं पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावदी को भाजपा से कांग्रेस में लाने में भी एमबी पाटिल की अहम भूमिका रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी की जनसभाओं की पूरी रणनीति के पीछे एमबी पाटिल का ही दिमाग रहा।
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कर्नाटक की जीत के हीरो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक चुनाव के नतीजों से साफ है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस राज्य की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। लाख कोशिशों के बाद भी भाजपा की सत्ता से विदाई हो रही है। कांग्रेस की जीत के कई फैक्टर रहे लेकिन पार्टी की जीत में इसके पांच नेताओं की अहम भूमिका रही। इन्हीं नेताओं की रणनीति के दम पर कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा को पटखनी दे दी। इन पांच नेताओं में जी परमेश्वर, रणदीप सुरजेवाला, एमबी पाटिल, शशिकांत सेथिल और सुनील कानुगोलु जैसे नेताओं का नाम शामिल है।
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एमबी पाटिल
एमबी पाटिल कर्नाटक के एक ताकतवर लिंगायत नेता हैं। जिस तरह से भाजपा में येदियुरप्पा बड़े लिंगायत नेता माने जाते हैं, उसी तरह कांग्रेस में एमबी पाटिल का दर्जा माना जाता है। चुनाव से पहले एमबी पाटिल को कांग्रेस की प्रचार समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी और पाटिल ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए भाजपा के खिलाफ आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई। दो बड़े लिंगायत नेताओं पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावदी को भाजपा से कांग्रेस में लाने में भी एमबी पाटिल की अहम भूमिका रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की जनसभाएं और रोड शो की पूरी रणनीति के पीछे एमबी पाटिल का ही दिमाग रहा। कांग्रेस के घर-घर जाकर चुनाव प्रचार की रणनीति ने भी कांग्रेस को फायदा पहुंचाया।
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जी. परमेश्वर
जी परमेश्वर को कर्नाटक कांग्रेस का घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कांग्रेस के घोषणा पत्र में पीएफआई, बजरंग दल पर प्रतिबंध के वादे की काफी चर्चा हुई। इसे लेकर कांग्रेस की आलोचना भी हुई लेकिन घोषणा पत्र की कई योजनाओं को काफी समर्थन भी मिला, जिनमें गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य जैसे योजनाएं शामिल हैं। गृह ज्योति योजना के तहत कांग्रेस ने 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने, गृह लक्ष्मी योजना के तहत परिवार की एक महिला को 2000 रुपए प्रतिमाह देने और अन्न भाग्य योजना के तहत हर बीपीएल परिवार को 10 किलो अनाज देने का वादा किया। इन योजनाओं को खूब समर्थन मिला और यही समर्थन वोटों में तब्दील होकर कांग्रेस की जीत की पटकथा लिख गया। तटीय कर्नाटक के लिए कांग्रेस ने अलग घोषणा पत्र पेश किया, जिसका भी कांग्रेस को फायदा मिला।
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रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस ने पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल की जगह रणदीप सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभारी बनाया था। सुरजेवाला ने ही डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच मतभेद के बावजूद साथ मिलकर काम करने के लिए राजी किया। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ आने से मतदाताओं के बीच अच्छा संदेश गया। इसके पीछे रणदीप सुरजेवाला की रणनीति ही थी। सुरजेवाला ने केंद्रीय नेतृत्व और क्षेत्रीय नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया, जिससे कांग्रेस की रणनीति फुलप्रूफ बन सकी।
शशिकांत सेथिल
2008 बैच के आईएएस अफसर शशिकांत सेथिल ने 2019 में सीएए के मुद्दे पर इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने वॉर रूम की जिम्मेदारी सेथिल को ही सौंपी थी। पार्टी की गतिविधियों को मॉनिटर करने, रणनीति बनाने और फैक्ट चेकिंग में शशिकांत सेथिल ने अहम भूमिका निभाई, जिससे कांग्रेस को प्रचार के दौरान भाजपा को घेरने में मदद मिली। वॉर रूम की मदद से कांग्रेस ने पूरे प्रदेश की विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार पर करीब से नजर रखी।
सुनील कोनुगोलु
चुनावी रणनीतिकार के तौर पर सुनील कोनुगोलु ने शानदार काम किया। पार्टी के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार करने, प्रचार की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन में सुनील कोनुगोलु की भूमिका अहम रही। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ जो आक्रामक रणनीति बनाई, उसके पीछे कोनुगोलु का ही दिमाग था। उल्लेखनीय है कि कोनुगोलु इससे पहले पीएम मोदी के लिए भी काम कर चुके हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए भी कोनुगोलु ने काफी काम किया था।