फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Karnataka: Court refuses to cancel Pocso case against Yediyurappa, grants pre-arrest bail

Karnataka: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को झटका, हाईकोर्ट ने पॉक्सो केस खारिज करने से किया इनकार

Fri, 07 Feb 2025 12:14 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 07 Feb 2025 12:14 PM IST
सार

Karnataka: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को आंशिक राहत देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी, लेकिन उनके खिलाफ पॉक्सो मामले को रद्द करने से इनकार करते हुए मामले को ट्रायल कोर्ट में वापस भेज दिया।

विज्ञापन
Karnataka: Court refuses to cancel Pocso case against Yediyurappa, grants pre-arrest bail
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को बड़ा झटका - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बता दें कि, हाईकोर्ट ने एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उनके खिलाफ दर्ज पॉक्सो केस को खारिज करने से मना कर दिया है और मामले को ट्रायल कोर्ट में वापस भेज दिया। लेकिन इसके साथ ही उन्हें आंशिक राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना, जिन्होंने पहले येदियुरप्पा को गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम संरक्षण दिया था, ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। 
विज्ञापन


येदियुरप्पा पर क्या लगे हैं आरोप?
बीएस. येदियुरप्पा पर भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला पिछले साल 14 मार्च को 17 वर्षीय एक लड़की की मां की शिकायत पर दर्ज किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि येदियुरप्पा ने दो फरवरी को यहां डॉलर्स कॉलोनी में अपने आवास पर एक भेंट के दौरान उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया था। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न के लिए पोक्सो अधिनियम की धारा 8 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (ए) के तहत येदियुरप्पा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान क्या दिए गए तर्क?
इस मामले की सुनवाई के दौरान, येदियुरप्पा के वकील ने आरोपों से इनकार करते हुए तर्क दिया कि मां और बेटी ने पहले भी एक पुराने मामले के संबंध में उनसे संपर्क किया था जिसमें लड़की का किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से यौन उत्पीड़न किया गया था। हालांकि, राज्य अभियोजन पक्ष ने दावों का खंडन करते हुए तर्क दिया कि येदियुरप्पा के खिलाफ पर्याप्त सबूत है और नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने का आरोप एक 'जघन्य' अपराध है जिसके लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट के फैसले से संज्ञान आदेश को रद्द करके येदियुरप्पा को राहत मिली है, लेकिन मामले की जांच जारी है और ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्रवाई होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सीवी नागेश ने येदियुरप्पा का प्रतिनिधित्व किया, जबकि विशेष सरकारी वकील प्रोफेसर रविवर्मा कुमार और अधिवक्ता एस बालन शिकायतकर्ता के परिवार की ओर से पेश हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed