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जल विवाद: 'सीडब्ल्यूएमए के आदेश के खिलाफ जाएंगे शीर्ष कोर्ट'; तमिलनाडु को पानी देने के आदेश पर सिद्धारमैया
Wed, 20 Sep 2023 07:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 20 Sep 2023 07:09 PM IST
सार
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) का आदेश 18 सितंबर को आया था। यह निर्देश सोमवार को एक आपातकालीन बैठक के बाद आया जिसमें कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे। बैठक में कर्नाटक ने कहा था कि वह 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ सकता है जबकि तमिलनाडु ने 12,500 क्यूसेक पानी की मांग की।
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सिद्धारमैया-शिवकुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रही खींचतान खत्म होती नहीं दिख रही है। इस बीच, कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने बुधवार को दिल्ली में कहा कि राज्य सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। ऐसे में राज्य सरकार सीडब्ल्यूएमए के आदेश के खिलाफ निषेधाज्ञा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। इस आदेश में तमिलनाडु को 28 सितंबर तक प्रतिदिन लगभग 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का प्रावधान है। साथ ही सिद्दारमैया ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की भी मांग की।
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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) का आदेश 18 सितंबर को आया था। यह निर्देश सोमवार को एक आपातकालीन बैठक के बाद आया जिसमें कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे। बैठक में कर्नाटक ने कहा था कि वह 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ सकता है जबकि तमिलनाडु ने 12,500 क्यूसेक पानी की मांग की। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों के लिए 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने पर सहमति बनी है। 15 दिनों बाद मामले की फिर से समीक्षा की जाएगी।
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सीडब्ल्यूएमए के आदेश के खिलाफ चर्चा
इस मामले पर चर्चा के लिए सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। इस बीच, वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से इस मामले का राजनीतिकरण न करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक तमिलनाडु को पानी छोड़ने पर सहमत हो गया है। ऐसे में इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।
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दिल्ली में कावेरी जल विवाद के मुद्दे पर हुई चर्चा
कर्नाटक के सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ एक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को छोड़कर राज्य के सभी सांसद शामिल हुए।
कर्नाटक में सूखे जैसी स्थिति- सिद्धारमैया
बैठक के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य संकट में है क्योंकि हमारे यहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। राज्य में सूखे जैसी स्थिति है। 230 तालुकों में से 195 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। जल्द ही होने वाली बैठक में अन्य 20 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त महीने में 123 वर्षों में पहली बार बारिश की कमी देखी गई है। ऐसे में संकट के समय में तमिलनाडु के लिए कितना पानी छोड़ा जाए, यह तय करने का कोई फॉर्मूला नहीं है।
सीडब्ल्यूएमए के पास कोई संकट फार्मूला नहीं
उन्होंने कहा कि इस पीड़ा को दूर करने के लिए कोई संकट फार्मूला नहीं है। हम पानी नहीं छोड़ सकते। हम सीडब्ल्यूएमए के आदेश के खिलाफ निषेधाज्ञा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने संशोधित आदेश में कर्नाटक को एक सामान्य वर्ष में 177.25 टीएमसी कावेरी पानी छोड़ने के लिए कहा था। हालाँकि, इसमें किसी संकटकालीन साल में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा साफ नहीं की गई है।
डीके शिवकुमार ने कही यह बात
वहीं, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि अगर सामान्य वर्ष होता तो अब तक हमें 108 टीएमसी पानी छोड़ना होता। लेकिन अब तक केवल 39.6 टीएमसी पानी ही दिया गया है। हमारे पास न तो पानी है और न ही बारिश। राज्य में पानी का प्रवाह बहुत कम है।