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Karnataka: CM ने विधानसभा में RCB के सम्मान समारोह के फैसले का किया बचाव, कहा- सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया

Sun, 08 Jun 2025 11:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर/बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर/बंगलूरू। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 08 Jun 2025 11:05 PM IST
सार

Karnataka: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा के सामने आरसीबी के सम्मान समारोह को आयोजित करने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि वहां कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने आयोजित किया था और वह केवल आमंत्रण पर कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

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Karnataka CM defends holding RCB felicitation at Vidhana Soudha despite police warning
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को विधानसभा के सामने आरसीबी की जीत के जश्न को मनाने के फैसले का बचाव किया और कहा कि वह कोई अनहोनी नहीं हुई। मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया तब आई, जब पुलिस उपायुक्त (विधानसभा सुरक्षा) का एक पत्र सामने आया, जिसमें आयोजन से पहले अधिकारियों ने विधानसभा परिसर में समारोह आयोजित करने के खिलाफ आगाह किया था। 

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सिद्धारमैया ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा के सामने यह कार्यक्रम कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) की ओर से आयोजित किया गया था और वह केवल आमंत्रण पर शामिल हुए थे। चार जून को आईपीएल में आरसीबी की जीत के मौके पर विधानसभा के सामने सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। इसके साथ ही चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में भी एक समारोह आयोजित किया गया था। वहीं बड़ी भीड़ जमा होने के कारण भगदड़ मची, जिसमें 11 लोग मारे गए और 56 घायल हुए।
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डीसीपी (विधानसभा सुरक्षा) ने चार जून को सरकार के सचिव, कर्मचारी विभाग और प्रशासन सुधार विभाग (डीपीएआर) को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने जल्दबाजी में कार्यक्रम आयोजित करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इतने सारे लोगों के लिए सुरक्षा करना मुश्किल है क्योंकि उनके पास पुलिस बल कम है और इतना जल्दी तैयारी करना आसान नहीं होगा। यह पत्र अब सामने आया है। डीपीएआर ने पूछा था कि क्या विधानसभा की मुख्य सीढ़ियों पर आरसीबी खिलाड़ियों का सम्मान समारोह करना ठीक रहेगा। इसके जवाब में यह पत्र लिखा गया था।

डीसीपी (विधानसभा सुरक्षा) के पत्र में लिखा था कि आरसीबी के देशभर में बहुत बड़े प्रशंसक हैं। अगर जल्दबाजी में विधानसभा की मुख्य सीढ़ियों पर कार्यक्रम रखा गया तो लाखों प्रशंसक वहां पहुंच जाएंगे। इससे सुरक्षा व्यवस्था में दिक्कत होगी क्योंकि वहां पुलिसकर्मी कम हैं। उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े कार्यक्रम के लिए शहर के बाहर से भी पुलिस लानी पड़ेगी, जिसमें समय लगेगा। कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक पुलिस दोनों को भी मिलकर काम करना होगा, लेकिन समय कम है।

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अधिकारी ने कहा कि अगर यह कार्यक्रम होता है, तो विधानसभा आने वालों के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पास देना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। इसके साथ ही, सचिवालय के कर्मचारियों के अपने परिवार के साथ कार्यक्रम में आने की संभावना है, इसलिए इसे रोकने के लिए आदेश जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सचिवालय के कर्मचारियों के लिए दोपहर में छुट्टी दी जाए ताकि वे भी वहां न आएं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि विधानसभा के आसपास अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, क्योंकि बड़ी भीड़ आने की उम्मीद है। डीसीपी ने लिखा कि विधानसभा एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण इमारत है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा कार्यक्रम करने में समय लगना चाहिए ताकि भवन को कोई नुकसान न पहुंचे और नियमों का पालन हो। इसके बावजूद सरकार का जो भी फैसला होगा उसे माना जाएगा।

पत्र के बारे में पूछे जाने पर सिद्धारमैया ने मैसूर में पत्रकारों से कहा, आखिरकार, पत्र में क्या लिखा है? पुलिस सरकार के फैसले के अनुसार काम करेगी। यह पत्र मुझे नहीं मिला। डीपीएआर सचिव ने अनुमति दी है। मुझे बताया गया तो मैंने अनुमति दे दी कि कार्यक्रम विधानसभा के सामने हो।  जब पूछा गया कि क्या विधानसभा के सामने हुए कार्यक्रम में कोई घटना हुई, जिसमें राज्यपाल भी शामिल थे, तो उन्होंने कहा कि वहां कुछ नहीं हुआ। भगदड़ की घटना बाद में स्टेडियम में हुई।


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जब पूछा गया कि क्या डीपीएआर सचिव सत्यवती को भी उन पांच पुलिस अधिकारियों की तरह निलंबित किया जाएगा, जिनमें तब के पुलिस आयुक्त बी दयानंद भी शामिल थे, तो मुख्यमंत्री ने कहा, सत्यवती ने क्या किया? विधानसभा के सामने क्या हुआ?सिद्धरामैया ने बताया कि डीपीएआर सचिव ने नियमित प्रक्रिया में उनसे अनुमति मांगी थी कि कार्यक्रम विधानसभा के सामने रखा जाए। मुख्य सचिव ने कहा था कि अनुमति दी जा सकती है और पुलिस ने भी सहमति दी थी।

उन्होंने कहा, केएससीए के सचिव और कोषाध्यक्ष मुझसे मिले और मुझे बुलाया। यह हमारा आयोजन नहीं था। उन्होंने आयोजन किया था और मुझे बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि राज्यपाल भी आएंगे, इसलिए मैं गया। इसके अलावा मुझे कुछ पता नहीं है। सरकार का इसमें कोई लेना-देना नहीं है। मैं स्टेडियम के कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया था। 

भगदड़ की घटना पर मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार क्रिकेट स्टेडियम को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करेगी। किसी भी सरकार में ऐसी अप्रिय घटना नहीं होनी चाहिए। इस घटना ने व्यक्तिगत रूप से मुझे और सरकार को बहुत दुख पहुंचाया है। इस मामले में पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। खुफिया प्रमुख और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव को भी बदला गया है। मामले को गंभीरता से लिया गया है और उचित कार्रवाई की गई है। हालांकि, सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया है, फिर भी यह घटना दुखद है। इस मामले में सरकार ने कोई गलत कदम नहीं उठाया है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है। इसलिए सरकार को कोई शर्मिंदगी नहीं होनी चाहिए। जब कुंभ मेले में लोगों की मौत हुई थी, तब क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था? क्या भाजपा और जेडीएस ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की थी? 

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