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कर्नाटक: बच्चे स्कूल आना न छोड़ें इसलिए अध्यापक ने क्या कुछ नहीं किया

Mon, 09 Jul 2018 10:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 10:40 AM IST
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Karnataka: Children do not leave school, so what did the teacher do?

कर्नाटक के उडूपि जिले के बाराली गांव में बच्चों में शिक्षा में दिलचस्पी बनाए रखने और बच्चे स्कूल आना न छोड़े इसके लिए प्राथमिक स्कूल के शिक्षक राजाराम स्कूल बस के ड्राइवर की भी जिम्मेदारी खुद ही निभा रहे हैं। आजकल हर सुबह राजाराम जल्दी उठकर घर से निकलते हैं और बस के चार चक्कर लगाकर बच्चों को उनके घरों से लाते हैं। स्कूल में राजाराम को मिलाकर सिर्फ तीन शिक्षक हैं। राजाराम ने बताया कि ज्यादा दूरी होने के चलते कई छात्रों ने स्कूल आना छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने पूर्व छात्रों की मदद से बस खरीदी।

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राजाराम का कहना है कि बस से स्कूल आने के कारण अब स्कूल में छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है। पिछले साल बाराली गांव के आसपास के बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया था। मालूम किया गया तो पता चला कि स्कूल से घर तक आने के लिए रास्ता बेहद खराब है और कोई वाहन भी नहीं चलता है। छात्रों को पांच से छह किमी की दूरी पैदल चलकर आना पड़ता था। अनहोनी के डर से गांव वालों ने अपनी बच्चियों को भी स्कूल भेजना बंद कर दिया था।
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राजाराम ने बताया कि अचानक एक दिन मुझे स्कूल का पुराना छात्र विजय हेगड़े मिला। वो बेंगलुरू में प्रॉपर्टी मैनजमेंट कंपनी चलाता है। उससे स्कूल को लेकर बातचीत हुई तो उसने बताया कि दूरी और खराब रास्ते की वजह से लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। बच्चे बहुत तेजी से कम हो रहे हैं। ऐसे ही चलता रहा तो स्कूल बंद करना पड़ेगा। समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को स्कूल वापस कैसे लाया जाए। इस पर हेगड़े ने मुझे बस खरीदने का आइडिया दिया ताकि बच्चों को घर से लाया जा सके। छह महीने में स्कूल के पुराने छात्र विजय, गनेश शेट्टी ने बस खरीदने के लिए पैसे दिए जिससे बस खरीदी गई। ड्राइवर को कम से कम सात हजार रुपए वेतन देना पड़ता इतनी बड़ी राशि को स्कूल नहीं वहन कर सकता था, इसलिए मैंने खुद बस चलाने की जिम्मेदारी उठाई। अब स्कूल में बच्चों की संख्या 50 से 90 हो गई है।

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