फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Karnataka: BJP will propose himself in the Supreme Court to prove majority in less time

कर्नाटक: कम समय में बहुमत साबित करने का सुप्रीम कोर्ट में खुद प्रस्ताव रखेगी भाजपा

Fri, 18 May 2018 05:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Updated Fri, 18 May 2018 05:16 AM IST
विज्ञापन
Karnataka: BJP will propose himself in the Supreme Court to prove majority in less time
कर्नाटक के सियासी नाटक में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बावजूद भाजपा किसी तनाव में नहीं है। शुक्रवार को पार्टी खुद सुप्रीम कोर्ट में एक हफ्ते के अंदर बहुमत साबित करने का प्रस्ताव रखेगी। राज्यपाल को लिखे पत्र में पार्टी ने बहुमत का दावा करने के बदले सबसे बड़ी पार्टी के आधार पर सरकार बनाने का मौका मांगा था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्यपाल से मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की ओर से सौंपे गए पत्र की कॉपी मांगे जाने को पार्टी कोई बड़ा मुद्दा नहीं मान रही।
विज्ञापन


शीर्ष अदालत से कर्नाटक में बहुमत साबित करने का वक्त मिलने का है पूरा भरोसा

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, बृहस्पतिवार तड़के सुबह तक चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित किए जाने के लिए दिए गए 15 दिन के लंबे वक्त पर ही आपत्ति जताई। पीठ ने स्वीकार किया कि राज्यपाल के शपथ दिलाने के निर्णय पर रोक नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में पार्टी शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में खुद पीठ के समक्ष कम समय में बहुमत साबित करने का प्रस्ताव रखेगी। 
विज्ञापन


राज्यपाल को सौंपे पत्र में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने का किया था दावा    

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और पूर्व में भी सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका मिलता रहा है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट भी येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने का मौका देगी। साथ ही राज्यपाल को सौंपे पत्र में भाजपा ने बहुमत का दावा नहीं किया है। ऐसे में इस पत्र के जरिए भी राज्यपाल के निर्णय को चुनौती देना आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


संविधान में राज्यपाल के विवेक को दिया गया है महत्व  

मैंने पहले ही कहा था कि त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में संविधान में राज्यपाल या राष्ट्रपति के विवेक को महत्व दिया गया है। तात्कालिक परिस्थितियों के मद्देनजर राज्यपाल और राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यपाल के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया है। 
- सुभाष कश्यप, संविधान विशेषज्ञ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed