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कर्नाटक: भाजपा विधायक का दावा, रुके कार्यों को लेकर बोलने पर रहता है कार्रवाई का डर
Tue, 05 Jan 2021 08:19 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 05 Jan 2021 08:19 PM IST
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- फोटो : पीटीआई
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और बीपी यतनाल के बीच कहासुनी की खबर आने के एक दिन बाद मंगलवार को होसदुर्ग से भाजपा विधायक जीडी शेखर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी विधायकों की स्थिति यह हो गई है कि रुके हुए विकास कार्यों के खिलाफ बोलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर सताता रहता है।
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जीडी शेखर ने सोमवार को शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई की दो दिवसीय बैठक में शरीक होने से पहले पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा, '...अगर हम कुछ बोलते हैं तो उसका दूसरा मतलब निकाल लिया जाता है। लिहाजा, हम विधायक असमंजस की स्थिति में हैं...।'
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उन्होंने दावा किया कि मीडिया से अपनी परेशानियों को लेकर बात करने का मतलब होगा कि आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
शेखर ने दावा किया, 'हम इन हालात में कैसे रहें? इससे बेहतर है कि इस सबसे दूर और खामोश रहें। कृपया हमें बख्श दें। हमारे इलाकों में काम नहीं हो पा रहे हैं। मंत्री नहीं मिल पाते हैं... अगर हम मंत्री के पास जाते हैं तो भी काम नहीं होता और यहां तक कि अगर मुख्यमंत्री भी लिखकर दे दें, तब भी काम नहीं हो पाता।'
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इससे पहले, भाजपा सूत्रों ने कहा था कि मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र द्वारा कथित रूप से पार्टी तथा प्रशासनिक मामलों में दखल दिए जाने के चलते मुख्यमंत्री और विजयपुरा से विधायक बीपी यतनाल के बीच कहासुनी हो गई थी। यह मामला पार्टी की अनुशासन समिति को भेज दिया गया है।
यतनाल कथित रूप से मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को लेकर कुछ समय से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि राज्य में येदियुरप्पा की जगह कोई और ले सकता है। हालांकि भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने राज्य में किसी भी तरह की फेरबदल की संभावना से इनकार किया है।
यह बैठक बंगलूरू में एक निजी होटल में हुई थी, जिसमें मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा, कतील और पार्टी के कर्नाटक प्रभारी महासचिव अरुण सिंह मौजूद थे। विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी शिकायतें रखी थीं। मुख्य मांगों में अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य और मंत्री पद दिया जाना शामिल थीं।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में मंत्रिमंडल फेरबदल काफी समय से लंबित है, लेकिन कुछ कारणों के चलते इसे टाल दिया गया है। फिलहाल कुल 34 मंत्री पदों में से सात पद खाली पड़े हैं, जिसके लिए विधायक अपनी-अपनी दावेदारी पेश करने में जुटे हुए हैं।