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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने जुटे BJP और JDS
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:54 AM IST
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अमित शाह
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बेहतर सोशल इंजीनियरिंग और लिंगायत समुदाय को अलग धर्म के दर्जे का कार्ड खेलकर कर्नाटक में विरोधियों को मुश्किल में डालने वाले मुख्यमंत्री सिद्घारमैया को घेरने के लिए भाजपा ने भी अपनी चाल शुरू कर दी है। पार्टी ने दलितों को साधने की रणनीति बनाई है। इसके लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की दलितों के प्रभावशाली मठ शरना मधरा गुरु पीठ के महंत चेन्नैया स्वामी से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। अगर शाह चेन्नैया को साध पाए तो पार्टी कांग्रेस के दलित वोट बैंक में सेंध लगा लेगी। उधर, जनता दल एस (जेडीएस) भी बसपा से समझौता कर कांग्रेस के इसी वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटी है।
भाजपा अपने समर्थक 17 फीसदी आबादी वाले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा मिलने के सवाल पर उधेड़बुन में है। लिंगायत समुदाय से ही आने वाले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के साथ शाह खुद इनसे जुड़े मठों का दौरा कर स्थिति को भांप रहे हैं। प्लान-बी के तहत दलित कार्ड के लिए वे शरना मधरा मठ भी पहुंचे हैं, जिसके अनुयायियों की संख्या करीब डेढ़ करोड़ है। बीते चुनाव में ये सत्ता पाने वाली कांग्रेस के साथ थे। अगर भाजपा इस मठ को अपने पक्ष में कर पाई तो सिद्घारमैया की मुसलमान, ओबीसी और दलित गठजोड़ वाली सोशल इंजीनियरिंग में बड़ा सेंध लगाने में कामयाब होगी।
उधर, सिद्घारमैया ने इस चुनाव को अपना अंतिम चुनाव बता कर सहानुभूति कार्ड भी चल दिया है। कन्नड़ अस्मिता का पहले ही मुद्दा खड़ा कर चुके सिद्घारमैया की कोशिश मुकाबले को भाजपा बनाम कांगे्रस बनाने की है, जिससे जेडीएस के परंपरागत मतदाता माने जाने वाली वोक्कालिंगा बिरादरी में सेंध लगाई जा सके।
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भाजपा अपने समर्थक 17 फीसदी आबादी वाले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा मिलने के सवाल पर उधेड़बुन में है। लिंगायत समुदाय से ही आने वाले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के साथ शाह खुद इनसे जुड़े मठों का दौरा कर स्थिति को भांप रहे हैं। प्लान-बी के तहत दलित कार्ड के लिए वे शरना मधरा मठ भी पहुंचे हैं, जिसके अनुयायियों की संख्या करीब डेढ़ करोड़ है। बीते चुनाव में ये सत्ता पाने वाली कांग्रेस के साथ थे। अगर भाजपा इस मठ को अपने पक्ष में कर पाई तो सिद्घारमैया की मुसलमान, ओबीसी और दलित गठजोड़ वाली सोशल इंजीनियरिंग में बड़ा सेंध लगाने में कामयाब होगी।
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उधर, सिद्घारमैया ने इस चुनाव को अपना अंतिम चुनाव बता कर सहानुभूति कार्ड भी चल दिया है। कन्नड़ अस्मिता का पहले ही मुद्दा खड़ा कर चुके सिद्घारमैया की कोशिश मुकाबले को भाजपा बनाम कांगे्रस बनाने की है, जिससे जेडीएस के परंपरागत मतदाता माने जाने वाली वोक्कालिंगा बिरादरी में सेंध लगाई जा सके।
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