{"_id":"66962a91846c6427e603795a","slug":"kargil-war-25-years-tale-of-indian-army-wins-and-pakistan-pickle-and-salt-connection-news-and-updates-2024-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kargil War 25 Years: प्वाइंट 4875 जीतने की खुशी और पाकिस्तानी अचार की कहानी, खाने में नमक और जहर का ये कनेक्शन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kargil War 25 Years: प्वाइंट 4875 जीतने की खुशी और पाकिस्तानी अचार की कहानी, खाने में नमक और जहर का ये कनेक्शन
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
कारगिल युद्ध।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कारगिल जंग के दौरान 17,000 फीट ऊंची चोटी प्वाइंट 4875 पर कब्जा करना इतना आसान नहीं था। यह कारगिल युद्ध की सबसे मुश्किल पहाड़ पर लड़ी गई लड़ाई थी। कोहरे से ढकी हुई 80 डिग्री के कोण पर खड़ी बर्फीली ढलानें जज्जा तोड़ने के लिए काफी थीं। इन ऊंचाइयों पर, जहां न तो कोई पक्षी मिलता था और न ही कोई जानवर। फिर भी भारतीय सेना ने कारगिल की इन चोटियों पर जीत हासिल की। गोलीबारी के बीच प्वाइंट 4875 की ढलानें खून से लाल थीं। रात में गोरखा और नागा सैनिकों ने जब अपनी रेजिमेंटल खुखरी और क्लीवर का इस्तेमाल किया तो, भगवान शिव के तांडव की याद आ गई। पाकिस्तानी सैनिकों के धड़ नाले में इधर-उधर गिरे पड़े थे। सैनिक जीत की खुशी में झूम रहे थे। 16,000 फीट की ऊंचाई पर पाकिस्तानी हरी मिर्च के अचार का यादगार स्वाद अभी भी हमारे बहादुरों को याद है। जुलाई 1999 में मश्कोह सेक्टर में प्वाइंट 4875 कॉम्प्लेक्स पर 13 जेएके राइफल्स ने जीत हासिल की, और बटालियन को दो परमवीर चक्र मिले।खून से लथपथ शवों को भर लिया था अपनी बाहों में
वीर चक्र से सम्मानित और युद्ध के दौरान अल्फा कंपनी की कमान संभालने वाले ब्रिगेडियर एस विजय भास्कर ने बताया कि उस दिन उत्साह कुछ अलग ही था। कुछ ही क्षण पहले ही, उन्होंने अपने साथियों के खून से लथपथ शवों को अपनी बाहों में भर लिया था, तो वहीं उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को सम्मानजनक कब्र में दफनाया भी था। वह बताते हैं, हमारे अंदर अलग-अलग भावनाएं थीं। पहली सुबह कैप्टन विक्रम बत्रा की शहादत, दूसरी मिशन पूरा होने पर मिली राहत। तीसरी खुशी प्वाइंट 4875 (जिसे अब बत्रा टॉप के नाम से जाना जाता है) पर तिरंगा फहराने की थी, तो चौथी चिंता यह थी कि भले ही पाकिस्तान की 12 नॉर्दन लाइट इन्फैंट्री चोटियों से भाग गई थी, लेकिन हमें निशाना बनाकर तोपखाने की गोलाबारी अभी भी जारी थी।
पाकिस्तानियों के पास था ढेर सारा सूखा राशन
सेना मेडल से सम्मानित कर्नल राजेश अधाऊ बताते हैं कि कारगिल में प्वाइंट 4875 के टॉप पर पाकिस्तानी बंकरों की तलाशी के दौरान हमारे जवानों को खाना पकाने, सोने/आराम करने के लिए एक स्टॉकिंग हट के साथ तीन पाकिस्तानी फाइबर-ग्लास स्नो हट मिले। पाकिस्तानियों ने बहुत सारा सूखा राशन स्टॉक किया हुआ था। जब हमने हमला किया तो वे अपने सैनिकों के लिए भोजन पकाने की तैयारी कर रहे थे। इस हमले में कुछ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि अन्य भाग गए। हमें चावल, आटा, आलू, प्याज और फ्रॉजन मांस के अलावा दो से तीन प्रकार के अचार मिले।
चखा हरी मिर्च का अचार
प्वाइंट 5140 और प्वाइंट 4875 कॉम्प्लेक्स की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाने वाले कर्नल राजेश अधाऊ ने बताया कि जवानों को पाकिस्तानी खाने को छूने से भी मना किया गया था। ब्रिगेडियर भास्कर बताते हैं कि हमें शक था कि उन्होंने भागने से पहले खाने में जहर मिलाया होगा। लेकिन कुछ जवान नहीं माने। उनमें कर्नल अधाऊ और युद्ध के दौरान अधाऊ के मेडिकल असिस्टेंट सूबेदार मेजर शिव राज सिंह चौहान भी शामिल थे। वह बताते हैं कि मेडिकल असिस्टेंट ने कहा कि चूंकि अचार में नमक है, इसलिए जहर बेअसर होगा। उन्होंने हरी मिर्च का अचार चखा, जो काफी स्वादिष्ट था। हमें यह देख कर आश्चर्य हुआ कि वहां पाकिस्तानी के कुकहाउस में ताजी, हरी फ्रांस बींस भी थीं। भीषण जंग में भी पाकिस्तानियों ने अपनी सप्लाई लाइनें बाकायदा जारी रखी हुईं थीं।
मिली इत्र की बोतल और लक्स साबुन
हालांकि, बटालिक सेक्टर में जब पाकिस्तानियों को खदेड़ा गया, तो वहां तलाशी में अचार जैसा कुछ नहीं मिला। हालांकि वहां कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी जरूर बनाया गया था। पाकिस्तानी अधिकारी मौज में थे। कारगिल युद्ध के दौरान बटालिक एलओसी सेक्टर में 70 इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व करने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर देविंदर सिंह बताते हैं कि प्वाइंट 4812 स्थित, खालूबार रिज में कैप्टन कमर के बंकर से 12 जेएके लाइट इन्फैंट्री के जवानों को एक इत्र की बोतल और लक्स साबुन की एक टिकिया मिली। वहां राशन, हथियार, गैस मास्क, गोलियां जो कुछ भी बचा था, हमने सब स्मृति चिन्ह के तौर पर संभाल कर रख लिया था।