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कारगिल विजय दिवस: मुशर्रफ ने रची थी साजिश, बीमारी से हो गई थी दर्दनाक जिंदगी, आखिरी वक्त में ऐसा था हाल

Mon, 24 Jul 2023 02:52 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 24 Jul 2023 02:52 PM IST
सार

आज हम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर परवेज मुशर्रफ की कहानी बताएंगे। ये भी बताएंगे कि कैसे भारत को धोखा देने वाले परवेज मुशर्रफ की जिंदगी बदतर हो गई थी? आखिरी वक्त में परवेज किस हाल में थे? आइए जानते हैं... 

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Kargil Victory Day: Pervez Musharraf hatched a conspiracy of kargil war, illness made life painful
कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है। 24 साल पहले इसी दिन भारत ने पाकिस्तान को घुटने के बल ला दिया था। भारतीय जवानों ने पाकिस्तान की सेना को घर में घुसकर मारा और युद्ध में जीत हासिल की। तब से लेकर अब तक हर साल 26 जुलाई को भारत में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। 
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कारगिल युद्ध की बात हो और परवेज मुशर्रफ का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। परवेज मुशर्रफ तब पाकिस्तान के राष्ट्रपति हुआ करते थे। मुशर्रफ वही शख्स थे, जिन्होंने कारगिल युद्ध की साजिश रची थी। भारत को धोखा दिया था। आज हम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर परवेज मुशर्रफ की कहानी बताएंगे। ये भी बताएंगे कि कैसे भारत को धोखा देने वाले परवेज मुशर्रफ की जिंदगी बदतर हो गई थी? आखिरी वक्त में परवेज किस हाल में थे? आइए जानते हैं... 
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पहले मुशर्रफ के बारे में जान लीजिए
परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुआ था। 1947 में भारत विभाजन के कुछ दिन पहले ही उनके पूरे परिवार ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया। उनके पिता पाकिस्तान सरकार में काम करते थे। साल 1998 में परवेज मुशर्रफ जनरल बने। उन्होंने भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध की साजिश रची। लेकिन भारत के बहादुर सैनिकों ने उनकी हर चाल पर पानी फेर दिया। अपनी जीवनी ‘इन द लाइन ऑफ फायर - अ मेमॉयर' में जनरल मुशर्रफ ने लिखा कि उन्होंने कारगिल पर कब्जा करने की कसम खाई थी। लेकिन नवाज शरीफ की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाए।
 
 

1999 से 2008 तक पाकिस्तान पर शासन करने वाले 79 वर्षीय जनरल मुशर्रफ पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था और 2019 में संविधान को निलंबित करने के लिए मौत की सजा दी गई थी। बाद में उनकी मौत की सजा को निलंबित कर दिया गया था। 2020 में लाहौर उच्च न्यायालय ने मुशर्रफ के खिलाफ नवाज शरीफ सरकार द्वारा की गई सभी कार्रवाइयों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसमें उच्च राजद्रोह के आरोप पर शिकायत दर्ज करना और एक विशेष अदालत के गठन के साथ-साथ इसकी कार्यवाही भी शामिल थी। 

 
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1998 में रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ को सेना प्रमुख बनाया था। लेकिन एक साल बाद ही 1999 में जनरल मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर दिया और पाकिस्तान के तानाशाह बन गए। उनके सत्ता संभालते ही नवाज शरीफ को परिवार समेत पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था। 30 मार्च 2014 को मुशर्रफ पर तीन नवंबर 2007 को संविधान को निलंबित करने का आरोप लगाया गया था। 17 दिसंबर, 2019 को एक विशेष अदालत ने मुशर्रफ को उनके खिलाफ उच्च राजद्रोह के मामले में मौत की सजा सुनाई। पूर्व सैन्य शासक इलाज के लिए मार्च 2016 में देश छोड़कर दुबई चले गए थे और उसके बाद से पाकिस्तान नहीं लौटे। इसी साल पांच फरवरी को दुबई के एक अस्पताल में 79 साल के परवेज मुशर्रफ ने आखिरी सांस ली। मुशर्रफ अमाइलॉइडोसिस बीमारी से जूझ रहे थे। 

क्या है अमाइलॉइडोसिस की बीमारी? 
इसे समझने के लिए हमने एसआरएन के डॉ. महेश से बात की। उन्होंने कहा, परवेज मुशर्रफ को अमाइलॉइडोसिस नाम की बीमारी थी। ये बीमारी तब होती है जब शरीर में अमाइलॉइड नाम का प्रोटीन बनने लगता है। यह अमाइलॉइड प्रोटीन शरीर के अंगों को ठीक से काम करने से रोकता है। इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में हृदय, किडनी, लीवर, स्प्लीन, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र शामिल हैं। कई बार अमाइलॉइडोसिस कुछ अन्य बीमारियों के साथ भी होते हैं। इसके चलते पूरा शरीर कमजोर हो जाता है। धीरे-धीरे शरीर का एक-एक अंग काम करना बंद कर देता है। 
 
अमाइलॉइडोसिस का ट्रिटमेंट भी कैंसर के इलाज की तरह होता है। इसमें भी उन्हीं दवाइयों का प्रयोग होता है, जो कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होतीं हैं। इसके अलावा इसमें भी मरीज को कीमोथेरेपी दी जाती है। साथ ही अमाइलॉइड उत्पादन को कम करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं।
 

आखिरी वक्त में कैसा था मुशर्रफ का हाल? 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परवेज मुशर्रफ बीमारी के चलते काफी कमजोर हो गए थे। वह खुद से चल भी नहीं पाते थे। हालत ये थी कि उनसे सही से बोला भी नहीं जा पाता था। डॉक्टर्स ने उन्हें काफी बचाने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो पाया। अमाइलॉइडोसिस के लक्षण ज्यादातर काफी सूक्ष्म होते हैं। जैसे-जैसे शरीर में अमाइलॉइडोसिस बढ़ता है, अमाइलॉइड का जमाव दिल, लीवर, प्लीहा, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को गंभीर थकान, वजन कम होना, पेट, टांगों, टखनों या पैरों में सूजन होना, स्तब्ध हो जाना, हाथ या पैर में झुनझुनाहट, दर्द, त्वचा के रंग में परिवर्तन होना, आंखों के आस-पास त्वचा पर बैंगनी धब्बे होना, सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगता है। कुछ इसी तरह की समस्याओं से परवेज भी अपने आखिरी दिनों में जूझ रहे थे। 
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