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क्या डा. कर्ण सिंह मुख्यमंत्री कमलनाथ को दिला पाएंगे ज्योतिरादित्य से अभयदान?

Mon, 09 Mar 2020 08:21 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 09 Mar 2020 08:21 PM IST
सार

  • ज्योतिरादित्य के बारे में खबर है कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क में हैं
  • कमलनाथ मध्यप्रदेश से राज्यसभा सीट देने को नहीं हो रहे हैं तैयार
  • राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबी दोस्तों में आते हैं ज्योतिरादित्य

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Karan singh will end the tussle between CM kamal nath and Congress leader Jyotiraditya Scindia
Congress leader Jyotiraditya Scindia - फोटो : ANI

विस्तार

सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया बीच सुलह कराने की कोशिशें शुरू हुईं। इनके बीच सुलह कराने की जिम्मेदारी डा. कर्ण सिंह को दी गई। हालांकि बैठक के बाद कमलनाथ मध्यप्रदेश के लिए रवाना हो गए। वहीं ज्योतिरादित्य को मनाने के प्रयास जारी हैं।   

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कांग्रेस अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से खोना नहीं चाहती हैं। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी ज्योतिरादित्य के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर नाराज हैं। ज्योतिरादित्य की नाराजगी कमलनाथ के व्यवहार को लेकर है। ज्योतिरादित्य का मानना है कि कमलनाथ का रिमोट कंट्रोल पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के हाथ में है।

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क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस टूट जाएगी?

सोमवार को हुए घटनाक्रम में कमलनाथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे थे। सोनिया गांधी ने उन्हें मध्य प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी के हित पर ध्यान देने के लिए कहा है। सोनिया गांधी से मिलने के कुछ देर बाद कमलनाथ ज्योतिरादित्य से मिलने के लिए चाणक्यपुरी डा. कर्ण सिंह के आवास पर रवाना हो गए। ज्योतिरादित्य के बारे में खबर है कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क में हैं।

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कैलाश विजयवर्गीय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में हैं। इसी आधार पर कयास लगाया जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश की राजनीति में अपना वजूद बनाए रखने के लिए कमलनाथ सरकार को झटका दे सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव और राज्यसभा सांसद का कहना है कि भाजपा कर्नाटक जैसा प्रयोग मध्यप्रदेश में भी करना चाहती है।

सूचना यह भी है कमलनाथ मध्यप्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा सीट दिए जाने को पहली प्राथमिकता में नहीं दे रहे हैं। इससे भी ज्योतिरादित्य की नाराजगी बढ़ गई है। ज्योतिरादित्य का कहना है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनवाने में उनका भी योगदान है और इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता। ऐसे में एक संभावना यह है कि कांग्रेस पार्टी में अपनी उपेक्षा को देखकर ज्योतिरादित्य सिंधिया बड़ा फैसला कर सकते हैं।

क्या कांग्रेस छोड़ देंगे ज्योतिरादित्य?

यह सवाल थोड़ा पेंचीदा है। ज्योतिरादित्य के लिए ऐसा कर पाना आसान नहीं होगा। ज्योतिरादित्य को करीब से जानने वाले कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि वह पिछले डेढ़ साल से मध्यप्रदेश कांग्रेस और राजनीति में अपनी स्थिति को लेकर बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राज्य में पार्टी और और फिर सरकार की कमान न मिलने से वह बहुत नाराज थे, लेकिन राहुल गांधी के आश्वासन, प्रियंका गांधी के भरोसे पर वह शांत हो गए थे।

पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है कि वह युवा हैं। स्व. माधव राव सिंधिया के बेटे हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में अच्छी पकड़ रखते हैं। पूरे राज्य में भी उनके काफी चाहने वाले हैं, लेकिन इसके साथ-साथ वह कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबी दोस्तों में आते हैं।

यह ज्योतिरादित्य की दबाव की राजनीति हो सकती है, लेकिन उनके लिए कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का फैसला बहुत आसान नहीं होगा। हालांकि पिछली कांग्रेस कार्य समिति की बैठक और फिर कांग्रेस अध्यक्ष की मौजूदगी में होने वाली बैठक को वह बीच में ही छोड़कर चले गए थे। इस बैठक में कमलनाथ भी मौजूद थे।

ज्योतिरादित्य ने छोड़ा साथ तो क्या होगा?

ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ा, तो उनके समर्थक करीब डेढ़ दर्जन विधायक भी पार्टी को छोड़ सकते हैं। हालांकि टीम ज्योतिरादित्य का कहना है कि उनके साथ करीब ढाई दर्जन विधायक हैं। इस क्रम में विधायक इमरती देवी, तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न तोमर, प्रभु राम चौधरी, महिन्द्रा मिसोदिया, मुन्ना लाल गोयल, गिरिराज दंडोदिया, ओपी भदौरिया, विजेंद्र यादव, जसपाल, कमलेश जाटव, राज्यवर्धन सिंह, रघुराज कंसना, सुरेश धाकड़, हरदीप डंग, रक्षा सिरोनिया, जसवंत कमल नाथ सरकार को आईना दिखा रहे हैं।



ऐसा होने पर वह भाजपा के साथ मिलकर या सहयोग से नई सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। हालांकि अभी इसकी संभावना कम है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का  कहना है कि इतनी जल्दी इतने बड़े निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है।

 

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