1949 में आज के दिन हुआ था कराची समझौता, पाक को मिला था गिलगित बाल्टिस्तान पर कब्जा
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आज पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर के एक बड़ा हिस्से पर कब्जा है। ऐसा भारत और पाकिस्तान के बीच हुए पहले युद्ध की वजह से हुआ। यदि इतिहास पर नजर डाली जाए तो आज ही के दिन 28 अप्रैल 1949 को पीओके की तथाकथित सरकार के राष्ट्रपति ने एक समझौते के तहत गिलगित बाल्टिस्तान का एक बड़ा इलाका पाकिस्तान को सौंप दिया था। यह युद्ध दोनों देशों के बीच अक्तूबर 1947 को हुआ था। जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत का विलय भारतीय संघ में कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद भारत और पाकिस्तान ने इस समझौते पर 1949 में हस्ताक्षर किए थे।
इस दिन को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा 28 अप्रैल 1949 का दिन कश्मीर के इतिहास में सबसे काला दिन है। इस दिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) ने कराची समझौते पर हस्ताक्षर किए था। जिसमें रक्षा/ विदेशी मामलों और पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पूर्ण नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया था। पाकिस्तान की तरफ से इस समझौते पर एम गुरमानी नाम के मंत्री ने हस्ताक्षर किए थे जिसके पास कोई विभाग नहीं था।
भारत-पाकिस्तान के बीच 1947 में हुआ पहला युद्ध
1947 में भारत और पाकिस्तान के आजाद होने के बाद अक्तूबर 1947 में पहली बार दोनों के बीच युद्ध हुआ। पाकिस्तान की तरफ से खुद को आजाद सेना बतानी वाले कबायली हमलावर जब कश्मीर के अंदर दाखिल हुए। तब जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और राज्य के भारतीय संघ में विलय प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। जब तक भारतीय सेना कश्मीर पहुंची तब तक पाकिस्तान की कबायली हमलावरों वहां एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुकी थी और यह रियासत से कट चुका था।
संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद हुआ कराची समझौता
भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध के बीच एक जनवरी 1948 को भारत ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने को कहा। लगभग एक साल बाद एक/दो जनवरी 1949 की दरमियानी रात को यह युद्ध समाप्त हुआ। इसके बाद यूएन ने दोनों देशों को 29 जुलाई, 1949 को एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया। जिसे कराची समझौते के नाम से जाना जाता है। इसमें सीजफायर की लाइनें बनाई गई थीं जिसे हम नियंत्रण रेखा के नाम से जानते हैं।