फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kapil Sibbal in Supreme Court On Triple Talaq Favouring All India Muslim Personal Law Board

SC में बोले सिब्बल- मुस्लिमों के लिए आस्था का विषय है तीन तलाक, इस पर सुनवाई ही गलत

Tue, 16 May 2017 01:38 PM IST
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर Updated Tue, 16 May 2017 01:38 PM IST
विज्ञापन
Kapil Sibbal in Supreme Court On Triple Talaq Favouring All India Muslim Personal Law Board
कपिल सिब्बल - फोटो : Eprahar
ट्रिपल तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू करते हुए कपिल सिब्बल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की ओर से पक्ष रखा। सु्प्रीम कोर्ट ने एआईएमपीएलबी से पूछा कि इस्लाम में ई-डिवोर्स और व्हाट्सएप के जरिए तलाक की क्या जगह है।
विज्ञापन


इस मुद्दे पर सिब्बल ने कहा कि ट्रिपल तलाक 1400 साल पुरानी प्रक्रिया है। इसे असंवैधानिक कैसे कहा जा सकता है। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, "अगर अयोध्या के राम जन्म भूमि होने पर हिंदुओं की आस्था पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, तो ट्रिपल तलाक पर मुस्लिमों के विश्वास पर भी सवाल नहीं उठाना जाना चाहिए।" 
विज्ञापन


कपिल सिब्बल ने संविधान पीठ के समक्ष कहा कि ‘ट्रिपल तलाक’ कोई मसला नहीं है, मसला पितृसत्तात्मक का है। हर पितृसत्तात्मक समाज में इस तरह का भेदभाव होता है, चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम या पारसी या कोई और।
विज्ञापन
विज्ञापन


कपिल सिब्बल ने ये भी कहा कि कोर्ट किसी के विश्वास को निर्धारित नहीं कर सकता और उसे इसमें दखल नहीं देना चाहिए। जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने कपिल सिब्बल से कहा कि तो इसका मतलब है कि हमें इस मामले पर सुनवाई ही नहीं करनी चाहिए। सिब्बल ने कहां हां।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संविधान पीठ केसमक्ष कहा कि बोर्ड को अपने उस बयान पर माफी मांगनी चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि पुरुषों में निर्णय लेने की क्षमता महिलाओं केमुकाबले अधिक होती है। तुषार मेहता ने कहा कि बोर्ड को यह बयान वापस लेना चाहिए और माफी मांगना चाहिए। बोर्ड द्वारा ऐसा न करने पर अदालत को कार्रवाई करनी चाहिए।

सरकार ने कहा, 'हम लाएंगे कानून'

Kapil Sibbal in Supreme Court On Triple Talaq Favouring All India Muslim Personal Law Board
ट्रिपल तलाक - फोटो : Yahoo
केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर ट्रिपल तलाक को खत्म कर दिया जाता है तो सरकार मुसलिम समुदाय के लिए शादी और तलाक को लेकर नया कानून लेकर आएगी। केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ समक्ष कहा ‘अगर ट्रिपल तलाक को खत्म कर दिया जाता है तो सरकार लोगों को ‘अधर’ में नहीं रखेगी। सरकार सामने आएगी। सरकार कानून बनाएगी।’

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप एक ही गेंद पर तीन विकेट गिराना चाहते हैं। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब ट्रिपल तलाक सहित तलाक के तीनों स्वरूप खत्म होने की स्थिति में सरकार ने नया कानून लाने की बात की थी।

रोहतगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के तीन स्तर पर भेदभाव हो रहा है। पहला, मुस्लिम समुदाय में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम अधिकार। दूसरा, देश में दूसरे समुदायों की महिलाओं के मुकाबले मुस्लिम महिलाओं को कम अधिकार। तीसरा, इस्लामिक देशों की मुस्लिम महिलाओं के मुकाबले भारत में मुस्लिम महिलाओं को कम अधिकार उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक की वजह से मुस्लिम की आधी आबादी(महिलाएं) असहाय महसूस कर रही हैं। उन्हें मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। रोहतगी ने कहा कि यह संवेदशील मसला है और अल्पसंख्यक से जुड़ा मसला है लेकिन अभी तक कोई सरकार कानून नहीं बना पायी, लेकिन हम बनाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed