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सिब्बल का तंज : किस कानूनी जानकार ने इन्हें आरक्षण की सलाह दी थी

Wed, 09 Jan 2019 08:57 PM IST
अमर शर्मा डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 09 Jan 2019 08:57 PM IST
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Kapil Sibal in parliament says: Which legal expert advised BJP to give reservation
कपिल सिब्बल
राज्यसभा में गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर हुई चर्चा में कई नेताओं की गर्मागर्म बहस और तीखे व्यंग्य सुनाई पड़े। बुधवार रात कांग्रेसी सांसद कपिल सिब्बल जब बिल पर चर्चा कर रहे तो उन्होंने एक ऐसी बात कह दी, जिस पर कई सांसद हंस पड़े। सिब्बल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होगा। पता नहीं, किस कानूनी जानकार ने इन्हें यानी भाजपा को आरक्षण की सलाह दी थी। इस चर्चा के बीच मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी तंज कस दिया। उन्होंने कहा, इनको आरक्षण का कोई पता नहीं है।
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सिब्बल का कहना था कि सरकारी नौकरी और अनुबंध वाली नौकरी रोजाना कम हो रही हैं। अब सरकार आरक्षण देने जा रही है। ये पता नहीं है कि यह किसे मिलेगा। इसका जो मापदंड तय किया गया है, वो तो खुद ही उलझन भरा है। ये कैसे तय होगा कि कौन गरीब है।
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देश में केवल 3.7 फीसदी लोग आयकर देते हैं, बाकी लोग जो आयकर नहीं देते, क्या इसका मतलब यह है कि वे गरीब हैं। किस परिवार की कितनी आय है, इस बाबत कोई फार्मूला निर्धारित नहीं है। लोग झूठे सर्टिफिकेट देकर आरक्षण लेंगे। सरकार अपने लोगों को इसका फायदा देगी।
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सिब्बल ने कहा, क्या अभी तक सरकार ने कोई ऐसा मापदंड तैयार किया है जिससे कि स्पष्ट तौर पर यह पता लग सके कि वह आर्थिक तौर पर कमजोर है। ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति की सालाना आय 22,405 रुपये है और शहरी क्षेत्र में 91,405 रुपये है। आरक्षण देने का मापदंड 66 हजार रुपये आय सालाना प्रतिव्यक्ति तय किया गया है। ऐसे में तो किसी ग्रामीण को आरक्षण मिलेगा नहीं।


सिब्बल ने कहा, सरकार को पहले इंदिरा साहनी केस के बारे में सोचना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने यह फैसला दिया था कि आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा। अगर किसी राज्य में इस सीमा से ज्यादा आरक्षण दिया गया है तो वहां का केस सर्वोच्च न्यायालय में पेंडिंग है।
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