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कानों देखी: अजीत जोगी का जोग
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Nov 2018 07:37 PM IST
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ajit jogi
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छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जोग चल रहा है। अब उनकी पार्टी तो एक तरह उनके घर और करीबियों की पार्टी हो गई है। यहां तक कि बसपा के साथ गठबंधन का भी यही हाल है। बसपा के टिकट पर अजीत जोगी के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पत्नी रेणु जोगी को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो वह भी जोगी की पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। बहू ऋचा भी बसपा से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में हैं। जोगी जी ने पहले चुनाव लड़ने के प्रति अनिच्छा जताई थी।
हालांकि वह कहते रहे हैं कि इस बार वह सीएम बनेंगे, लेकिन अंतत: उन्होंने भी मरवाही सीट से चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। कुल मिलाकर किसी को भी अजीत जोगी यह चुनावी मंत्र नहीं समझ में आ रहा है। बसपा भी इस भटकी हुई दिशा से हैरान है। जबकि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के नेता खुश हैं। उन्हें लग रहा है कि चलिए कम से कम जोगी से जान तो छूटी। कांग्रेस के खेमे में एक अच्छी खबर है। पहले जहां लग रहा था कि जोगी-मायावती का गठबंधन छत्तीसगढ़ में खेल बिगाड़ेगा, वहीं अब बिलासपुर संभाग को छोड़कर पार्टी को कहीं कोई खतरा नहीं आ रहा है।
चौटाला परिवार में याचना नहीं अब रण होगा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के घर हर रोज चौपाल सज रही है। पहले ओम प्रकाश चौटाला खड़े-खड़े फैसले दे देते थे और लोग मान लेते थे। अब बारी उल्टी है। ओम प्रकाश चौटाला की बहू, पोते, बेटों की ही लड़ाई है। अजय चौटाला का परिवार पांडवों का उदाहरण देकर दहाड़ रहा है कि याचना नहीं अब रण होगा, जीवन में जय या मरण होगा। लिहाजा चौटाला परिवार में चौपाल हर रोज सज रही है, लेकिन कोई रास्ता निकल नहीं रहा है। अब हालत और पेचीदा हो गई है। अजय चौटाला ने तिहाड़ जेल से 14 दिन के लिए बाहर आते ही ऐलान कर दिया कि वह इतनी आसानी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) छोड़ने वाले नहीं। उन्होंने यह कहकर ओम प्रकाश चौटाला को भी हैरान कर दिया कि इनेलो न उनकी है और न उनके बाप की बपौती। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मजे की बात है कि अजय चौटाला को लेने उनके पुत्र दुष्यंत चौटाला ही गए थे। इस दौरान दुष्यंत चौटाला ने अपने चाचा अभय चौटाला का बिना नाम लिए उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई। परिवार के भीतर छिड़ी इस कलह को देखकर अब ओम प्रकाश चौटाला के भी हौसले पस्त हो रहे हैं।
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लोगों का डर निकाल रहे हैं राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद आक्रामक होकर राजनीति की इबारत लिख रहे हैं। वह लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोल रहे हैं। राहुल के इस तरीके को उनकी पार्टी के कई नेता खूब डिफेंड करते हैं। एक तेज तर्रार महिला नेता का कहना है कि राहुल लोगों का डर बाहर निकाल रहे हैं। उस नेता के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह ने सरकारी एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों को डरा रखा है। यह डर अपनी पार्टी के नेताओं के अलावा विपक्ष के नेताओं में भी पैदा किया जा रहा है। दोनों नेताओं के डर से लोग अपनी बात तक नहीं कह पा रहे हैं। इसलिए राहुल गांधी लोगों का डर बाहर निकाल रहे हैं। राहुल ने यही गुजरात विधानसभा चुनाव में भी किया था। उन्होंने लोगों का भय निकाला था और कांग्रेस का ग्राफ अचानक ऊपर उठना शरू हो गया था। राहुल गाधी को उम्मीद है कि यही पांच राज्यों के चुनाव में होने वाला है और मोदी जी से नाराज वोट बैंक कांग्रेस को वोट कर सकता है।
दीपावली बाद मोदी, योगी शुरू करेंगे प्रचार
पांच राज्यों के चुनाव में अभी तक योगी जी ने कोई खास अभियान शुरू नहीं किया है। भाजपा के योगी जी बड़े स्टार प्रचारक हैं। हर राज्य में उनकी जोरदार मांग है। यहां तक कि तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी योगी जी की मांग सबसे अधिक है। छत्तसीगढ़, म.प्र. और राजस्थान के नेता भी योगी जी को प्रचार के लिए मांग रहे हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री की समस्या यह है कि वह देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं। अगले साल प्रयागराज में कुंभ होना है और कुंभ के समापन के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव होने हैं। दोनों ही योगी जी की अग्निपरीक्षा है। इसलिए योगी आदित्यनाथ बड़ी मुश्किल से समय निकाल पा रहे हैं। वह दीपावली के बाद पांच राज्यों में पार्टी का प्रचार करेंगे। यही स्थिति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी है। लिहाजा इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं।
मूर्तियों का युग फिर आ रहा है
मूर्तियों, स्मारकों के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती विख्यात थी, लेकिन अब मायावती का नंबर कटने जा रहा है। करीब 3000 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात में सरकार पटेल की मूर्ति लगी है। मुंबई में छत्रपति शिवाजी की भी विशालकाय प्रतिमा लगनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य और गगन चुंबी प्रतिमा की स्थापना का संकल्प ले चुके हैं। इसकी केवल औपचारिक घोषणा भर बाकी है। जयललिता के अनुयाइयों का भी तमिलनाडु में उनकी विशालकाय प्रतिमा लगाने का दबाव बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ई पलानिस्वामी, उप मुख्यमंत्री ओ पनीर सेल्वम और टीटीवी दिनाकरण के बीच में भी इसको लेकर काना-फूसी चल रही है। वहीं डीएमके के एक नेता का कहना है कि कलैइनार(पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि) की एक भव्य प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। वह तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन के प्रवर्तकों में थे। लग रहा है कि जैसे-जैसे समय बीतेगा अभी कुछ और मूर्तियों की चाहत रखने वाले प्रस्ताव सामने आएंगे।
दिव्या जी धीरे-धीरे चलिए
आपको गुजरात चुनाव का दौर याद होगा। कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया कैंपेनर दिव्या स्पंदना के ट्वीट ने धूम मचा दी थी। कांग्रेस के नेताओं ने भी दिव्या स्पंदना को हाथों-हाथ लिया। राहुल गांधी भी अपने नेताओं के मुंह से उनकी प्रशंसा सुनकर स्तब्ध थे। समय के साथ स्पंदना को इसका ईनाम भी मिला, लेकिन अब वही दिव्या अखर रही हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में दिव्या के दो विवादित ट्वीट भी आए। प्रधानमंत्री मोदी की साइबर सेना ने उनपर हमला भी बोला और वह ट्रोल भी हुई, लेकिन इससे बड़ा खतरा अब दिव्या के लिए कांग्रेसी ही बन गए हैं। लगातार कोई न कोई दिव्या की शिकायत लेकर पहुंच रहा है। राहुल गांधी इस बदली हुई परिस्थिति से भी हैरान हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का खुद मानना है कि 100 चीजें अच्छी हुई तो एकाध में चूक हो सकती है। हमें इसके लिए भी तैयार रहना चाहिए, लेकिन कांग्रेस हैं कि उन्हें अब दिव्या अखर रही हैं।
सोनिया को अखर गया
यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने तय कर रखा है कि वह पार्टी के अंदरुनी मामलों से दूर ही रहेंगी। इसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही देखें, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस के भीष्म पितामहों ने कृष्ण की तरह सोनिया गांधी का वचन तुड़वा ही दिया। इससे सोनिया खुद काफी आहत हुई। सोनिया को बड़ा झटका तब लगा जब म.प्र. विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंह एक दूसरे के खिलाफ मुखर हो गए। मुखर ही नहीं हुए बल्कि राहुल गांधी की उपस्थिति में बोलते-बोलते ज्यादा ही बोल गए। यूपीए चेयरपर्सन के पास राजस्थान में भी कुछ ऐसी ही खबरे आ रही हैं। बताते हैं इसके बाद से वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की थोड़ा मदद करने लगी हैं। बताते हैं कि कांग्रेस को लग रहा है कि जनता तो उसका साथ दे रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं के करतब ही सब पर पानी फेर दे रहे हैं। फिलहाल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन दोनों ही इस तरह की स्थिति नहीं चाहते। इसके लिए जो बन पड़ रहा है, करने की तैयारी कर रहे हैं।
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हालांकि वह कहते रहे हैं कि इस बार वह सीएम बनेंगे, लेकिन अंतत: उन्होंने भी मरवाही सीट से चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। कुल मिलाकर किसी को भी अजीत जोगी यह चुनावी मंत्र नहीं समझ में आ रहा है। बसपा भी इस भटकी हुई दिशा से हैरान है। जबकि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के नेता खुश हैं। उन्हें लग रहा है कि चलिए कम से कम जोगी से जान तो छूटी। कांग्रेस के खेमे में एक अच्छी खबर है। पहले जहां लग रहा था कि जोगी-मायावती का गठबंधन छत्तीसगढ़ में खेल बिगाड़ेगा, वहीं अब बिलासपुर संभाग को छोड़कर पार्टी को कहीं कोई खतरा नहीं आ रहा है।
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चौटाला परिवार में याचना नहीं अब रण होगा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के घर हर रोज चौपाल सज रही है। पहले ओम प्रकाश चौटाला खड़े-खड़े फैसले दे देते थे और लोग मान लेते थे। अब बारी उल्टी है। ओम प्रकाश चौटाला की बहू, पोते, बेटों की ही लड़ाई है। अजय चौटाला का परिवार पांडवों का उदाहरण देकर दहाड़ रहा है कि याचना नहीं अब रण होगा, जीवन में जय या मरण होगा। लिहाजा चौटाला परिवार में चौपाल हर रोज सज रही है, लेकिन कोई रास्ता निकल नहीं रहा है। अब हालत और पेचीदा हो गई है। अजय चौटाला ने तिहाड़ जेल से 14 दिन के लिए बाहर आते ही ऐलान कर दिया कि वह इतनी आसानी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) छोड़ने वाले नहीं। उन्होंने यह कहकर ओम प्रकाश चौटाला को भी हैरान कर दिया कि इनेलो न उनकी है और न उनके बाप की बपौती। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मजे की बात है कि अजय चौटाला को लेने उनके पुत्र दुष्यंत चौटाला ही गए थे। इस दौरान दुष्यंत चौटाला ने अपने चाचा अभय चौटाला का बिना नाम लिए उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई। परिवार के भीतर छिड़ी इस कलह को देखकर अब ओम प्रकाश चौटाला के भी हौसले पस्त हो रहे हैं।
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लोगों का डर निकाल रहे हैं राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद आक्रामक होकर राजनीति की इबारत लिख रहे हैं। वह लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोल रहे हैं। राहुल के इस तरीके को उनकी पार्टी के कई नेता खूब डिफेंड करते हैं। एक तेज तर्रार महिला नेता का कहना है कि राहुल लोगों का डर बाहर निकाल रहे हैं। उस नेता के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह ने सरकारी एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों को डरा रखा है। यह डर अपनी पार्टी के नेताओं के अलावा विपक्ष के नेताओं में भी पैदा किया जा रहा है। दोनों नेताओं के डर से लोग अपनी बात तक नहीं कह पा रहे हैं। इसलिए राहुल गांधी लोगों का डर बाहर निकाल रहे हैं। राहुल ने यही गुजरात विधानसभा चुनाव में भी किया था। उन्होंने लोगों का भय निकाला था और कांग्रेस का ग्राफ अचानक ऊपर उठना शरू हो गया था। राहुल गाधी को उम्मीद है कि यही पांच राज्यों के चुनाव में होने वाला है और मोदी जी से नाराज वोट बैंक कांग्रेस को वोट कर सकता है।
दीपावली बाद मोदी, योगी शुरू करेंगे प्रचार
पांच राज्यों के चुनाव में अभी तक योगी जी ने कोई खास अभियान शुरू नहीं किया है। भाजपा के योगी जी बड़े स्टार प्रचारक हैं। हर राज्य में उनकी जोरदार मांग है। यहां तक कि तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी योगी जी की मांग सबसे अधिक है। छत्तसीगढ़, म.प्र. और राजस्थान के नेता भी योगी जी को प्रचार के लिए मांग रहे हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री की समस्या यह है कि वह देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं। अगले साल प्रयागराज में कुंभ होना है और कुंभ के समापन के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव होने हैं। दोनों ही योगी जी की अग्निपरीक्षा है। इसलिए योगी आदित्यनाथ बड़ी मुश्किल से समय निकाल पा रहे हैं। वह दीपावली के बाद पांच राज्यों में पार्टी का प्रचार करेंगे। यही स्थिति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी है। लिहाजा इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं।
मूर्तियों का युग फिर आ रहा है
मूर्तियों, स्मारकों के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती विख्यात थी, लेकिन अब मायावती का नंबर कटने जा रहा है। करीब 3000 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात में सरकार पटेल की मूर्ति लगी है। मुंबई में छत्रपति शिवाजी की भी विशालकाय प्रतिमा लगनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य और गगन चुंबी प्रतिमा की स्थापना का संकल्प ले चुके हैं। इसकी केवल औपचारिक घोषणा भर बाकी है। जयललिता के अनुयाइयों का भी तमिलनाडु में उनकी विशालकाय प्रतिमा लगाने का दबाव बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ई पलानिस्वामी, उप मुख्यमंत्री ओ पनीर सेल्वम और टीटीवी दिनाकरण के बीच में भी इसको लेकर काना-फूसी चल रही है। वहीं डीएमके के एक नेता का कहना है कि कलैइनार(पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि) की एक भव्य प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। वह तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन के प्रवर्तकों में थे। लग रहा है कि जैसे-जैसे समय बीतेगा अभी कुछ और मूर्तियों की चाहत रखने वाले प्रस्ताव सामने आएंगे।
दिव्या जी धीरे-धीरे चलिए
आपको गुजरात चुनाव का दौर याद होगा। कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया कैंपेनर दिव्या स्पंदना के ट्वीट ने धूम मचा दी थी। कांग्रेस के नेताओं ने भी दिव्या स्पंदना को हाथों-हाथ लिया। राहुल गांधी भी अपने नेताओं के मुंह से उनकी प्रशंसा सुनकर स्तब्ध थे। समय के साथ स्पंदना को इसका ईनाम भी मिला, लेकिन अब वही दिव्या अखर रही हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में दिव्या के दो विवादित ट्वीट भी आए। प्रधानमंत्री मोदी की साइबर सेना ने उनपर हमला भी बोला और वह ट्रोल भी हुई, लेकिन इससे बड़ा खतरा अब दिव्या के लिए कांग्रेसी ही बन गए हैं। लगातार कोई न कोई दिव्या की शिकायत लेकर पहुंच रहा है। राहुल गांधी इस बदली हुई परिस्थिति से भी हैरान हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का खुद मानना है कि 100 चीजें अच्छी हुई तो एकाध में चूक हो सकती है। हमें इसके लिए भी तैयार रहना चाहिए, लेकिन कांग्रेस हैं कि उन्हें अब दिव्या अखर रही हैं।
सोनिया को अखर गया
यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने तय कर रखा है कि वह पार्टी के अंदरुनी मामलों से दूर ही रहेंगी। इसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही देखें, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस के भीष्म पितामहों ने कृष्ण की तरह सोनिया गांधी का वचन तुड़वा ही दिया। इससे सोनिया खुद काफी आहत हुई। सोनिया को बड़ा झटका तब लगा जब म.प्र. विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंह एक दूसरे के खिलाफ मुखर हो गए। मुखर ही नहीं हुए बल्कि राहुल गांधी की उपस्थिति में बोलते-बोलते ज्यादा ही बोल गए। यूपीए चेयरपर्सन के पास राजस्थान में भी कुछ ऐसी ही खबरे आ रही हैं। बताते हैं इसके बाद से वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की थोड़ा मदद करने लगी हैं। बताते हैं कि कांग्रेस को लग रहा है कि जनता तो उसका साथ दे रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं के करतब ही सब पर पानी फेर दे रहे हैं। फिलहाल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन दोनों ही इस तरह की स्थिति नहीं चाहते। इसके लिए जो बन पड़ रहा है, करने की तैयारी कर रहे हैं।