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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने बजट पर जताई चिंता, कहा- बाल कल्याण सरकार की प्राथमिकता में नहीं

Thu, 04 Feb 2021 02:20 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 04 Feb 2021 02:20 PM IST
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Kailash Satyarthi Children s Foundation expresses concern on budget says child welfare is not in priority of government
कैलाश सत्यार्थी - फोटो : ANI
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को 2021-22 बजट पेश किया था। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) ने गुरुवार को बच्चों से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए इस बजट में धन आवंटन पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे अपर्याप्त बताया है।
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केएससीएफ के सीईओ एससी सिन्हा ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्ष 2021-22 के लिए पेश बजट में बच्चों से संबंधित कुल् आवंटित धनराशि में 11 प्रतिशत की कमी की गई है। बाल कल्याण के लिए आवंटित धनराशि इस बार कुल बजट का मात्र 2.46 प्रतिशत ही है, जबकि वर्ष 2020-21 में यह 3.16 प्रतिशत थी। यह चिंता की बात है कि 2021-22 के दौरान बच्चों के कल्याण के लिए आवंटित बजट का हिस्सा पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान सबसे कम है। बच्चों के कल्याण के लिए आवंटित राशि 96,042 करोड़ से घटाकर 85,713 करोड़ कर दी गई है। उन्होंने कहा, ये आंकड़े देखकर साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार ने इस बार बजट में बाल कल्याण को प्राथमिकता में नहीं रखा है।
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केएससीएफ के सीईओ एससी सिन्हा ने कहा कि बाल सुरक्षा सेवाएं (सीपीएस) उन बच्चों को प्रदान की जाती हैं, जो दुर्व्यवहार या शोषण का शिकार होते हैं या समाज के सुरक्षा जाल से बाहर होते हैं। यह बच्चों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है। बाल सुरक्षा सेवाएं गुलामी से मुक्त उन सभी बच्चों को प्रदान की जाती हैं, जो मजदूरी, ट्रैफिकिंग, दुर्व्यवहार, बाल विवाह आदि के शिकार होते हैं। यह योजना जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत स्थापित संस्थानों को चलाने के लिए धन भी प्रदान करती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट से पता चलता है कि बच्चों के यौन शोषण और शोषण के अन्य रूपों के अपराध लगातार बढ़े हैं। कोविड-19 महामारी के कारण हाशिए के लोग और हाशिए पर चले गए हैं। इसीलिए आज के दौर में सीपीएस कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। 
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बता दें कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन की स्थापना की। यह संस्था बंधुआ और बाल मजदूरी की पहचान कर उन्हें मजदूरी से मुक्त कराने और उनका पुनर्वास कराने का कार्य करती है।

 
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