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जस्टिस लोया की कहानी जिगरी दोस्त की जुबानी

Thu, 19 Apr 2018 03:03 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 19 Apr 2018 03:03 PM IST
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jutice loya death case supreme court bjp amit shah latur shorabuddin shaik encounter
Judge Loya - फोटो : Live Law.in
अंग्रेजी पत्रिका 'द कैरेवान' में हाल में एक खबर प्रकाशित की गई थी जिसमें सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई की विशेष अदालत के जज बृजमोहन हरकिशन लोया की मौत पर उनके परिजनों ने संदेह जताया था। जस्टिस लोया की मौत 30 नवंबर और एक दिसंबर 2014 की दरम्यानी रात को नागपुर में हुई थी। वो अपने साथी जज की बेटी की शादी में शामिल होने नागपुर गए थे।
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जस्टिस लोया ने लातूर के दयानंद लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद वकालत की शुरुआत भी उन्होंने लातूर जिला न्यायालय से की थी। कॉलेज में उनके सहपाठी और लातूर जिला न्यायालय में सहकर्मी रहे लातूर बार असोसिएशन के सदस्य एडवोकेट उदय गावारे के अनुसार जस्टिस लोया एक उत्साही युवा थे, जो अन्याय के खिलाफ थे। उनको अपने देश के कानून पर पूरा यकीन था।
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बीबीसी से बात करते हुए उदय गावारे ने जस्टिस लोया के साथ बिताए हुए पलों को याद किया। उन्होंने बताया, "जस्टिस बृजमोहन हरकिशन लोया दिलेर और बुद्धिमान इंसान थे। वो अन्याय के खिलाफ थे। उनका समाजवाद में दृढ़ विश्वास था।"
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वो बताते हैं, "हमलोग साथ जूनियरशिप में थे। वो हर केस को संजीदगी से लेते थे। हर केस का बेहतरीन तरीके से अध्ययन करते थे। यही उनकी खासियत थी।" जस्टिस लोया कॉलेज के दिनों में पढ़ाई को लेकर भी काफी संजीदा रहते थे। वो विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।

गावारे बताते हैं, "जस्टिस लोया पढ़ाई में अच्छे जरूर थे, पर वो किताबी कीड़ा नहीं थे। उनकी याद्याश्त इतनी अच्छी थी कि जो एक बार पढ़ लेते थे, वो उन्हें याद रहती थी।"

नाटककार और बेहतरीन खिलाड़ी

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justice loya

पुरानी यादों का जिक्र करते हुए वो आगे जोड़ते हैं, "कॉलेज में हमलोग खूब नाटक किया करते थे। वो न सिर्फ नाटकों में माहिर थे, टेबल टेनिस भी बेहतरीन खेलते थे।" उदय गावारे के अनुसार जस्टिस लोया इंटरनेशल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हाल ही में चुने गए भारतीय जज दलवीर भंडारी के ओएसडी भी रहे थे।

जस्टिस लोया ने 1986 से 1994 तक लातूर कोर्ट में वकालत की। इस दौरान उन्होंने कई नामी वकीलों के अंदर काम किया। इसके बाद वो न्यायिक सेवा में चले गए।  गावारे बताते हैं, "लॉ की पढाई पूरी करने के बाद हम 15 दोस्त वकालत में आए थे। जस्टिस लोया भी उनमें से एक थे। हमलोगों की सोच थी कि किसी के भी साथ अन्याय नहीं होने देंगे। जस्टिस लोया भी इसी तरह से सोचते थे।"

उन्होंने बताया कि वो किसी भी केस का संजीदगी से अध्ययन करते थे। वो कोर्ट में तथ्यों पर बात करते थे।

अंतिम बार जब वो लातूर पहुंचे थे

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जस्टिस लोया सामान्य परिवार से थे। उनके परिवार में लोग व्यापार और किसानी करने थे। उनकी तीन बहनें और दो बेटे हैं। जस्टिस लोया जिस केस की सुनवाई कर रहे थे, उसमें भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष और गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह अभियुक्त थे, जिन्हें लोया की मौत की बाद सीबीआई की विशेष अदालत के अगले जज ने बरी कर दिया था।

गावारे बताते हैं कि उनके दोस्त हंसमुख इंसान थे। वो तनाव बहुत कम लेते थे, लेकिन 2014 में जब वो दिवाली में लातूर घर आए थे तो बहुत तनाव में थे।

उदय गावारे कहते हैं, "वो उस समय सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनावाई कर रहे थे और वो उसे लेकर काफी तनाव में थे। वो बोलते थे कि मेरे पास बहुत सीरियस केस है। उन्होंने 'किसी' का फोन आने का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था- मैं जो भी करूंगा कानून के दायरे में ही करूंगा।"

'शादी में मेरी टाई तक बांधी थी'

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जस्टिस लोया जब भी बंबई से लातूर जाते थे अपने पुराने साथियों से जरूर मिलते थे। लेकिन 2014 में जब वो अंतिम बार वहां गए तो वे अपने दोस्तों और सहकर्मी से मिलने नहीं गए थे। एडवोकेट उदय गावारे अपने दोस्त के साथ बिताए पलों का फिर से जिक्र करते हैं। कहते हैं, "1983 से 1986 तक हमलोग कॉलेज में साथ थे। हमलोग हंसते थे, खेलते थे। एक-दूसरे का सुख-दुख शेयर करते थे।"

अपनी शादी के दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं, "11 जून 1989 को मेरी शादी थी। वो दो दिन मेरे घर रहे थे। मुझे मेकअप कैसा करना है, कपड़े कैसे पहनने हैं, सब उन्होंने ही तय किया था। टाई तक बांधी थी।"

"वो सारे पल खत्म हो गए। ये सब सोचकर आंखों में आंसू आ जाते हैं।" जिस दिन उनकी मौत हुई थी, गावारे उनके घर गए थे। उन्होंने बताया कि जस्टिस लोया के पिता और अन्य परिजन उनकी मौत को प्राकृतिक मौत नहीं मान रहे थे। उनके मन में मौत को लेकर कई सवाल थे।

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