आधार की अनिवार्यता खत्म वाले जस्टिस बोबडे होंगे अगले सीजेआई, वकालत से शुरू किया था सफर
पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने का जारी करने वाली पीठ में थे जस्टिस बोबडे
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (एसए बोबडे) उस बेंच के हिस्सा थे, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया था कि आधार कार्ड न होने के आधार पर किसी भारतीय नागरिक को मूल सेवाओं और सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता है।
जस्टिस बोबडे ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस एके सीकरी के साथ सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था। पीठ ने इसके लिए नए लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगाई थी।
जस्टिस बोबडे ने अपने एक फैसले में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित अपने भ्रूण को खत्म करने के लिए एक महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज कर दी थी। हाल ही में चल रहे अयोध्या भूमि विवाद के जुड़े मामले में भी वह भी सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की सांविधानिक पीठ में शामिल हैं। जस्टिस बोबडे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट में जज होने के साथ ही महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं।
वकालत से शुरू हुआ था सफर
जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होेंने नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री ली है। 1978 में जस्टिस बोबडे ने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र के सदस्य बने थे। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में वकालत की और 1998 में वरिष्ठ वकील बने। वर्ष 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली। जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे।
मुकदमों में मध्यस्थता की जरूरत पर बल
जस्टिस बोबडे को मुकदमे से पहले मध्यस्थता की जरूरत पर बल देने के लिए जाना जाता है। उनका मानना है कि लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिले इसके लिए मध्यस्थता को कानूनी सहायता प्रणाली की तरह इस्तेमाल होना चाहिए। 17वीं अखिल भारतीय मीट ऑफ स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज के एक उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा था कि 2017 से मार्च 2018 के बीच मध्यस्थता के माध्यम से 1,07,587 मामलों का निपटारा किया गया।