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आलोचना के लिए जजों को बनाया जा रहा है सॉफ्ट टारगेट: जस्टिस एनवी रमना
Sun, 13 Sep 2020 04:08 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 13 Sep 2020 04:08 AM IST
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जस्टिस एनवी रमना
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम जज जस्टिस एनवी रमना ने शनिवार को न्यायाधीशों को आलोचना के लिए सॉफ्ट टारगेट बनाए जाने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को आत्मसंयम का पालन करना पड़ता है और खुद का बचाव करने का उनके पास कोई उपाय नहीं होता।
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भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने वाले जस्टिस रमना ने कहा, चूंकि न्यायाधीश अपने बचाव में बोलने से खुद को रोकते हैं, उन्हें अब आलोचना के लिए सॉफ्ट टारगेट समझा जा रहा है। सोशल मीडिया और प्रौद्योगिकी के प्रसार ने इस प्रवृत्ति को और जटिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि जजों को गपशप का पात्र बनाया जा रहा है। यह गलतफहमी है कि न्यायाधीश आराम का जीवन जीते हैं। यह सच नहीं है।
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न्यायाधीशों को स्वतंत्र होने के लिए अपने सामाजिक जीवन को संतुलित करना होता है। उन्होंने ये बातें सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आर भानुमति की किताब ‘ज्यूडिशियरी, जज, एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस’ नामक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में कही।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने भी जस्टिस रमना की टिप्पणियों का समर्थन किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायाधीशों के बोलने की स्वतंत्रता उन्हीं कानूनों द्वारा छीनी जाती है जिन कानूनों के तहत दूसरे लोगों को बोलने की स्वतंत्रता मिलती है। इन्हीं का इस्तेमाल करते हुए न्यायपालिका और न्यायाधीशों की आलोचना की जाती है।
जस्टिस बोबडे ने कहा, जिला अदालतों से लेकर ऊपरी अदालतों तक सभी न्यायाधीश एकसमान काम करते हैं। सभी न्याय करते हैं। यह आसान काम नहीं है। न्यायाधीशों को उन चीजों को करने के लिए कहा जाता है जो दूसरे करने से बचते हैं।