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Child Abuse: जस्टिस बीवी नागरत्ना बोलीं- डीपफेक और एआई आधारित बाल शोषण पर कानून बनाने की जरूरत
Sun, 12 Oct 2025 07:36 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 12 Oct 2025 07:36 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना
- फोटो : एएनआई
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने रविवार को कहा कि डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बाल शोषण जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए उचित प्राधिकरणों को जल्द कानून बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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वह सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी और यूनिसेफ इंडिया की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक परामर्श बैठक के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम का विषय 'बालिका की सुरक्षा: भारत में उसके लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण की ओर' था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि डिजिटल और साइबर स्पेस, खासकर एआई, बालिकाओं के लिए अवसरों के साथ-साथ खतरों का भी कारण बन रहा है।
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उन्होंने कहा, डीपफेक और एआई-सक्षम बाल शोषण से जुड़े मामलों के लिए कानून बनाना अब समय की मांग है। साथ ही, 24 घंटे बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्टिंग, आयु-पुष्टि और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी प्रणाली को भी अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने ने यह भी सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट एआई साइबर अपराध सलाहकार समिति बनाने पर विचार कर सकता है, जो यह अध्ययन करेगी कि एआई और अन्य तकनीकी बदलाव बालिकाओं को किस प्रकार प्रभावित करते हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है।
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जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि न्यायपालिका में एआई से जुड़े खतरों पर प्रशिक्षण और क्षमता-विकास कार्यक्रमों को देशभर में लागू किया जाना चाहिए ताकि न्यायिक अधिकारियों को इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा सके। अंत में उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या की रोकथाम के लिए मौजूदा कानूनों का कड़ाई से पालन और निगरानी बेहद जरूरी है।