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कांग्रेस का आरोप, जस्टिस लोया मामले से जुड़ी हैं दो अन्य मौतें, एसआईटी करे जांच

Wed, 31 Jan 2018 11:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 31 Jan 2018 11:21 PM IST
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Justice Loya death case: Congress has demanded SIT probe under the supervision of the Supreme Court.

गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकांउटर मामले की सुनवाई से जुड़े जस्टिस बी एच लोया की संदिग्ध परिस्थिति में मौत को लेकर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की है।

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कांग्रेस ने एक बार फिर जज लोया की मौत से जुड़े सरकारी दस्तावेज दिखाकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना कि बात एक मामले की नहीं है। लोकतंत्र को खतरा है। जज और वकीलों की मौत हुई हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी इसे लेकर देश के हर कोने में जाएगी  क्योंकि कुछ छिपाने और बचाने के लिए ऐसा हो रहा है। ये ही बात सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने भी कही थी कि लोकतंत्र खतरे में है।
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पार्टी के नेता कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, विवेक तनखा, रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ नागपुर के दो सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सतीश यूकी और सूर्यकांत भी प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद थे। जिन्होंने बताया कि किस तरह जज लोया ने एक वकील और रिटायर जिला जज की मदद से उनसे संपर्क कर सोहराबुद्दीन मामले में दबाव की जानकारी दी थी।
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सिब्बल ने इस बात से इनकार किया है कि वे इन सबूतों के साथ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उनका कहना है कि वे एसआईटी को सबूत सौंपेंगे। इतने गंभीर मामले में सबूतों के बाद पीआईएल से न्याय नहीं मिलेगा। निष्पक्ष अधिकारियों की गठित एसआईटी सभी रिकार्ड सीज कर जांच करें। सीबीआई और एनआईए की जांच से कुछ नहीं होगा।

वकील सतीश यूकी और सिब्बल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि डाक्टर ने एक ही समय में दो पोस्टमार्टम किए। शरीर की अकड़न और मौत का कारण दो कागजों में अलग-अलग लिखा है।

रिपोर्ट इशारा करती है कि जांच के लिए भेजा गया बिसरा उनका नहीं था। लोया सीबीआई के स्पेशल जज थे लेकिन उस दौरान उनकी सुरक्षा हटी थी। वह नागपुर कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी नहीं है। वह जिस सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरे थे वहां के रिकॉर्ड में उनका नाम तक दर्ज नहीं है। उनके साथ मौजूद दो जजों में एक का ही नाम दर्ज है। ऐसे में क्या छिपाया जा रहा है किसे बचाने की कोशिश हो रही हैं।

सिब्बल ने बताया कि सतीश यूकी और सूर्यकांत नागपुर में वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसी के चलते जज लोया ने इन दोनों से संपर्क के लिए वकील खंडालकर और रिटायर जज तोंबरे को इनके पास भेजा था।

जिन्होंने बताया कि लोया पर जबरदस्त दबाव है और वे डरे हुए हैं, उनकी मदद करें। पहले इन लोगों ने मदद से इनकार किया लेकिन फिर जज लोया ने इन लोगों के साथ 31 अक्तूबर 2014 को मोबाइल से वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बात कर मदद मांगी।

उसके बाद ये दोनों दिल्ली आकर मुझसे और वकील प्रशांत भूषण से भी मिले थे और मामले की जानकारी दी थी। मैं भी ज्यादा मदद नहीं कर सकता था लिहाजा ये दोनों नागपुर लौट गए। सिब्बल ने कहा 30 नवंबर में जज लोया की मौत हो गई। 

मौतें जिन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

Justice Loya death case: Congress has demanded SIT probe under the supervision of the Supreme Court.
1. कांग्रेस के मुताबिक, लोया की मदद के लिए आगे आए वकील खंडालकर को भी धमकी मिलने लगी और 29 नवंबर 2015 को अदालत परिसर की आठवीं मंजिल से गिरने के कारण उनकी मौत हो गई। छुट्टी के कारण उनकी लाश दो दिन बाद मिली। उनका परिवार इसे षड्यंत्र बता रहा है। मौत कब और कैसे हुई पता नहीं। 

2. तोंबरे ने भी जान के खतरे और धमकी की बात कही। उनकी मौत भी रेल यात्रा के दौरान ऊपरी सीट से गिरने और रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण हुई।  

सतीश यूकी बाल-बाल बचे 
इस मामले में दिल्ली आने वाले सतीश यूकी के शेड वाले कार्यालय पर भी पांच सौ किलो का लोहा आकर गिरा, जिसमें वह बच गए। सिब्बल ने एसआईटी जांच के दायरे में इन दोनों मौतों को भी शामिल करने की मांग की है। 
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