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Supreme Court: शीर्ष कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- हर मामला हम तक आएगा तो 500 सालों तक नहीं खत्म होगी पेंडेंसी

Thu, 04 Aug 2022 04:01 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 04 Aug 2022 04:01 PM IST
सार

जस्टिस संजय किशन कौल ने अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर हर मामला कोर्ट तक आएगा तो 500 सालों में भी लंबित मामलों का निपटारा नहीं हो पाएगा। उन्होंने मामलों के त्वरित समाधान के लिए उपाय अपनाने पर जोर दिया है। 

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Justice Kaul said that if every case comes to the Supreme Court then the pendency will not end for 500 years
देश की अदालतों में लंबित हैं मामले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के एक जस्टिस ने देश की अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता जाहिर की है। गुरुवार को जस्टिस संजय किशन कौल ने मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर हर एक मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक आएगी तो 500 सालों में भी लंबित मामलों का निपटारा नहीं हो पाएगा। ये पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायधीश ने इस तरह का बयान दिया हो। हाल ही में संसद में बोलते हुए कानून मंत्री ने भी इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की थी। 

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क्या बोले जस्टिस संजय किशन कौल
जस्टिस संजय किशन कौल ने अदालतों में पेंडेंसी को लेकर अदालत के सदस्यों से कहा ,'लंबित मामलों की बड़ी संख्या समस्या पैदा कर रही है। अब अगर हर मामले को आखिर तक चलाना है, अगर हर मामला आखिर में सुप्रीम कोर्ट में आना है तो 200 साल या 500 सालों में भी लंबित मामले खत्म नहीं होगें।' इस दौरान उन्होंने मध्यस्थता और लोगों को मुकदमेबाजी के बारे में जागरुक करने पर जोर दिया। 
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जस्टिस कौल ने कहा कि इस मुद्दे पर लोक अदालतें और मध्यस्थता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके जरिए ना केवल मामलों को जल्दी निपटाया जा सकेगा बल्कि समय और धन की भी बचत होगी। 
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सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुकी है चिंता
गौरतलब है कि मई में सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में काफी समय से लंबित आपराधिक मामलों पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने नोट किया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, पटना, बॉम्बे और ओडिशा हाईकोर्ट में बड़ी तादाद में मुकदमे लंबित हैं।


इतने मामले हैं लंबित
वहीं, इस साल मार्च में केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि देश की विभिन्न अदालतों में 4.70 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में इस साल दो मार्च तक 70,154 मामले लंबित थे। कानून मंत्री किरण रिजिजू ने अपने लिखित जवाब में कहा था कि 25 उच्च न्यायालयों में 21 मार्च तक 58,94,060 मामले लंबित थे। उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में लंबित मामलों का आंकड़ा नेशनल ज्युडिशियल डाटा ग्रिड के पास उपलब्ध नहीं है।

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