फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Justice Abhay Oka advice to legal professionals avoid worship-rituals for Constitution

Pune: जस्टिस ओका की कानूनी पेशेवरों को नसीहत, पूजा-अनुष्ठान से बचें, संविधान का सम्मान करते हुए करें कोई काम

Mon, 04 Mar 2024 02:05 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 04 Mar 2024 02:05 AM IST
सार

न्यायमूर्ति गवई ने पूछा कि हमें जमानत देने से क्यों डरना चाहिए। जस्टिस ने कहा कि मुकदमा खत्म होने से पहले नौ-10 साल जेल में बिताने के बाद भी अगर न्यायाधीश जमानत याचिका पर विचार नहीं कर पा रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। हमें मौजूदा व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए।

विज्ञापन
Justice Abhay Oka advice to legal professionals avoid worship-rituals for Constitution
जस्टिस अभय ओका। - फोटो : ANI

विस्तार

पुणे के पिंपरी चिंचवड़ में रविवार को एक नये न्यायालय भवन का भूमिपूजन हुआ। भूमिपूजन कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भूषण आर गवई और न्यायाधीश अभय ओका शामिल हुए। इस दौरान न्यायाधीश ओका ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को पूजा-अनुष्ठान से बचना चाहिए। उन्हें संविधान के सम्मान में झुककर ही कोई काम करना चाहिए। कार्यक्रम में जस्टिस बीआर गवई ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिकाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमानत के मामले लंबित होते जा रहे हैं। 

विज्ञापन


नई प्रथा को शुरू करना चाहिए
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में जस्टिस ओका ने कहा कि विवाह से संबंधित विवाद बढ़ रहे हैं। देश भर में पारिवारिक अदालतों की संख्या बढ़ाने  की जरूरत है। खासकर परिवारिक अदालतों का मामला शहरी क्षेत्रों में गंभीर मुद्दा है। एक विवाह विवाद के लिए 10 से 15 मामले दर्ज होते हैं। जिला, सत्र और पारिवरिक अदालतों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। कानूनी पेशे वाले लोगों को नसीहत देते हुए ओका ने कहा कि पूजा अनुष्ठानों से बचें और संविधान के प्रति झुकककर कोई भी काम शुरू करें। संविधान के प्रति सम्मान दिखाने के लिए हमें इस नई प्रथा को शुरू करना चाहिए।
विज्ञापन


यह चिंता का विषय 
कार्यक्रम में जस्टिस गवई कहा कि  सुप्रीम कोर्ट की हर एक पीठ दिन में कम से कम 15 से 20 जमानत मामलों की सुनवाई करती हैं। आजकल ऐसी स्थिति है कि जिला अदालत में जमानत नहीं मिलती। उच्च न्यायालयों में भी जमानत पाना चुनौती बन गया है। सुप्रीम कोर्ट में इसी वजह से जमानत के मामले लंबित होते जा रहे हैं। न्यायमूर्ति ने पूछा कि हमें जमानत देने से क्यों डरना चाहिए। जस्टिस ने कहा कि मुकदमा खत्म होने से पहले नौ-10 साल जेल में बिताने के बाद भी अगर न्यायाधीश जमानत याचिका पर विचार नहीं कर पा रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। हमें मौजूदा व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed